मध्य प्रदेश में मानसून अब कमजोर पड़ने लगा है। मौसम विभाग ने अगले चार दिन हल्की बारिश का अनुमान जताया है। वहीं छत्तीसगढ़ में गरज-चमक के साथ वज्रपात का खतरा बना है। राजस्थान के 20 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट जारी हुआ है। तीनों राज्यों में किसानों को अगले कुछ दिन सतर्क रहने की जरूरत है।
एमपी में मानसून की चाल सुस्त
मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान में 15 सितंबर को मौसम बदला हुआ है। तीनों राज्यों में अलग-अलग तरह की चेतावनी जारी हुई है। मध्य प्रदेश में मानसून सीजन खत्म होने में अब सिर्फ 15 दिन बचे हैं। प्रदेश में अभी तक सामान्य बारिश का 88 प्रतिशत पानी गिर चुका है। इंदौर उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिलों में बारिश का कोटा पूरा नहीं है। यहां अब भी सामान्य से कम पानी गिरा है। भोपाल और ग्वालियर समेत 18 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी बरस चुका है।
मौसम विभाग के मुताबिक अगले चार दिन भारी बारिश की संभावना नहीं है। बहुत भारी बारिश का भी कोई अलर्ट नहीं है। प्रदेश में अब सिर्फ हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे किसानों को कटाई के काम में थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि कुछ इलाकों में रुक-रुक कर बारिश परेशानी भी बढ़ा सकती है।
पश्चिमी एमपी में हल्की बारिश
प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में पिछले चार दिनों से लगातार बादल बरस रहे थे। भोपाल इंदौर उज्जैन ग्वालियर चंबल और नर्मदापुरम संभाग में तेज पानी गिरा। इन इलाकों में मानसून पिछले कई दिनों से सक्रिय रहा। सोमवार को भी कुछ जिलों में तेज बारिश दर्ज हुई। हालांकि मंगलवार से बारिश वाला सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर पड़ने की संभावना है। इसके चलते 15 से 17 सितंबर तक हल्की बारिश ही होती रहेगी। कुछ इलाकों में रुक-रुककर बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है।
पूर्वी एमपी में ज्यादा बारिश
पूर्वी मध्य प्रदेश की तस्वीर इससे थोड़ी अलग है। मौसम विभाग के अनुसार यहां इस बार अच्छी बारिश दर्ज हुई है। जबलपुर सागर रीवा और शहडोल संभाग में सामान्य से ज्यादा पानी गिरा है। इन इलाकों के किसानों को इस बार अच्छी बारिश मिली। निवाड़ी में सामान्य से 49 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज हुई है। मऊगंज में यह आंकड़ा 44 प्रतिशत और सतना में 34 प्रतिशत रहा। मैहर में भी सामान्य से 29 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड हुई है।
इंच में देखें तो मऊगंज में सबसे ज्यादा 54.9 इंच बारिश हुई है। सतना में भी 50 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है। दूसरी तरफ आलीराजपुर अब भी सूखे जैसे हालात से जूझ रहा है। वहां अभी तक केवल 16 इंच बारिश हुई है। यह सामान्य के आधे से भी कम है। यह अंतर आलीराजपुर के किसानों के लिए चिंता की बड़ी वजह बना हुआ है।
एक्सपर्ट बोले, बारिश होगी कम
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक 15 सितंबर से बारिश कम होगी। उनके मुताबिक यह गिरावट धीरे-धीरे होगी। उनका कहना है कि बारिश का दायरा भी छोटा हो सकता है। पहले जितनी बड़ी बारिश अब नहीं दिखेगी। उनके अनुसार अगले सात दिन पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश जारी रहेगी। कुछ जगहों पर तेज तो कुछ इलाकों में सिर्फ हल्की बारिश दर्ज होगी।
एमपी में अब तक कितनी बारिश
मौसम विभाग के मुताबिक मध्य प्रदेश में अब तक 834.4 मिलीमीटर यानी करीब 32.8 इंच बारिश हो चुकी है। इस समय तक प्रदेश में सामान्य रूप से 886.6 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश अब भी सामान्य बारिश से करीब 2.1 इंच पीछे चल रहा है। पूरे प्रदेश में औसत से छह प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। पूर्वी हिस्से में यह कमी सिर्फ एक प्रतिशत रही। पश्चिमी हिस्से में यही कमी 11 प्रतिशत तक पहुंच गई।
सीजी में वज्रपात का खतरा
छत्तीसगढ़ में 15 सितंबर को मौसम बदला हुआ रह सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश के कई इलाकों में बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का खतरा भी बना रहेगा। मौसम का ऐसा ही मिजाज 16 और 17 सितंबर को भी दिख सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार 15 सितंबर को कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है। यह बारिश हल्की से मध्यम स्तर की रह सकती है। इस दौरान बादल गरजने और बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा। कुछ इलाकों में तेज हवा भी चल सकती है। बारिश के समय खुले मैदानों में जाने से बचना चाहिए। पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होना खतरनाक हो सकता है।
सीजी में अगले तीन दिन बारिश
प्रदेश में बारिश का दौर अभी पूरी तरह थमने वाला नहीं है। 16 सितंबर को भी कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है। इस दौरान गरज-चमक की स्थिति दोबारा बन सकती है। 17 सितंबर को भी कई जगहों पर बारिश के आसार बने हुए हैं। अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बदलता रहेगा।
राजधानी रायपुर में 15 सितंबर को बादल छाए रहने की संभावना है। शहर के कुछ इलाकों में हल्की बारिश भी हो सकती है। हालांकि पूरे प्रदेश में एक जैसी बारिश देखने को नहीं मिलेगी। कहीं हल्की तो कहीं मध्यम बारिश दर्ज होने का अनुमान है। घर से निकलने से पहले स्थानीय मौसम की जानकारी जरूर देख लें।
गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों में जाना खतरे से खाली नहीं है। ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूरी बनाए रखना जरूरी है। मौसम खराब होने पर तुरंत किसी सुरक्षित जगह पर रुक जाएं। कुल मिलाकर 15 सितंबर को प्रदेश में मानसून सक्रिय बना रहेगा। कई इलाकों में बारिश और वज्रपात की आशंका बनी रहेगी।
राजस्थान के 20 जिले अलर्ट पर
राजस्थान में बारिश का दौर अभी थमने का नाम नहीं ले रहा। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर ने 17 सितंबर तक बारिश का अलर्ट जारी किया है। आज प्रदेश के 20 जिलों में बारिश की चेतावनी दी गई है। उदयपुर संभाग में 13 सितंबर की रात से तेज बारिश शुरू हुई थी। यह दौर 14 सितंबर की शाम छह बजे तक जारी रहा। डूंगरपुर और बांसवाड़ा में चार इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है।
बंगाल की खाड़ी से आया लो-प्रेशर सिस्टम फिलहाल सक्रिय बना हुआ है। इसका असर दक्षिणी राजस्थान गुजरात और मध्य प्रदेश में भी दिख रहा है। इस सिस्टम के कारण कई इलाकों में भारी बारिश दर्ज हुई है। इसका सबसे ज्यादा असर उदयपुर और कोटा संभाग में देखने को मिला है।
राजस्थान में कहां कितनी बारिश
पिछले 24 घंटे में झालावाड़ के रायपुर इलाके में 75 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। डूंगरपुर बांसवाड़ा और राजसमंद में भी 21 मिलीमीटर तक पानी गिरा है। सोमवार को सिरोही प्रतापगढ़ जालौर और बारां में भी बारिश हुई। इसके अलावा जयपुर जोधपुर पाली और अजमेर में भी पानी गिरा। इन जिलों के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। इससे पहले बांसवाड़ा के लुहाड़िया और डूंगरपुर के सागवाड़ा में तेज बारिश हुई थी। दोनों जगह 109-109 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है।
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून ट्रफ अब दक्षिण की तरफ खिसक गई है। यह गुजरात के नलिया से लो-प्रेशर सिस्टम होते हुए आगे बढ़ रही है। ट्रफ राजगढ़ दमोह पेंड्रा रोड राउरकेला और दीघा से होकर गुजर रही है। इसके बाद यह ट्रफ बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। लो-प्रेशर सिस्टम फिलहाल गुजरात और दक्षिणी राजस्थान की सीमा के पास सक्रिय है। अरब सागर से लगातार नमी भी मिल रही है। इसी वजह से अगले दो दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना है।
राजस्थान में अब भी है गर्मी
इस साल पश्चिमी राजस्थान में मानसून का असर कमजोर रहा है। यहां के ज्यादातर जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। कुछ इलाकों में सूखे जैसे हालात भी बने हुए हैं। सितंबर का दूसरा सप्ताह बीतने के बाद भी गर्मी कम नहीं हुई। कई जिलों में दिन का तापमान अब भी 40 डिग्री के करीब है। सोमवार को सबसे ज्यादा तापमान जैसलमेर में दर्ज किया गया।
किसानों के लिए क्या मायने
तीनों राज्यों का यह मौसमी बदलाव किसानों के लिए बेहद अहम है। मध्य प्रदेश में यह वक्त खरीफ फसल की कटाई का है। किसानों को उपज मंडी तक भी पहुंचानी है। रुक-रुक कर होने वाली हल्की बारिश से खेतों में नमी बनी रह सकती है। इससे कटाई के काम में देरी होने का खतरा बढ़ जाता है। निवाड़ी और मऊगंज जैसे इलाकों में बारिश ज्यादा हुई है। यहां जलभराव से फसल खराब होने की आशंका है।
वहीं आलीराजपुर और पश्चिमी राजस्थान में बारिश कम हुई है। यहां किसानों की सिंचाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। छत्तीसगढ़ में वज्रपात का अलर्ट किसानों के लिए खास चेतावनी है। खेतों में काम कर रहे किसान गरज-चमक के दौरान तुरंत सुरक्षित जगह चले जाएं। राजस्थान के उदयपुर और कोटा संभाग में तेज बारिश हुई है। यहां खड़ी फसल को नुकसान होने का डर है। किसानों को सलाह है कि कटाई से पहले मौसम अपडेट जरूर देखें। मंडी जाने से पहले भी यह जांच जरूरी है।
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