शिवपुरी के किसान अमित जैन ने 2004 में ट्रैक्टर और मशीनरी का व्यापार शुरू किया। इससे उन्हें लाभ तो हुआ लेकिन संतुष्टि नहीं मिली। इसलिए उन्होंने खेती के क्षेत्र में संभावनाओं को तलाशना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने खाद बीज की दुकान खोली और किसानों के सीधे संपर्क में आए। धीरे-धीरे उनकी दुकान भरोसेमंद कृषि उत्पाद केंद्र बन गई।

व्यवसाय करते खेती में जागी रुचि
किसानों से संपर्क और खेतों में आने- जाने के दौरान किसान अमित जैन को खेती में दिलचस्पी जागी। वे परम्परागत खेती से हटकर कुछ करना चाहते थे जिससे लाभ भी हो। काफी जानकारी जुटाने के बाद उन्होंने अंत में टमाटर की खेती का निर्णय लिया। अमित बताते हैं टमाटर की मांग पूरे साल रहती है। सीजन के उतार चढ़ाव के अनुरूप उसकी कीमतें भी घटती बढ़ती है। बस फिर वे सीधे खेती में उतर गए।
20 बीघा में पैदा कर रहे टमाटर
अमित अपनी 20 बीघा जमीन पर टमाटर की खेती कर रहे हैं। खेती को मुनाफे में बदलने के लिए आधुनिक तौर तरीके और तकनीकी का सहारा ले रहे हैं। वे जून माह से टमाटर की बुवाई करते हैं। बुवाई में 15-15 दिन का अंतराल रखते हैं। इसके पीछे उनका तर्क है कि एक साथ पौध रोपने से पैदावार एक साथ आएगी और इसे बाजार में खपाने में मुश्किल होगी। वहीं मंडी में एक साथ इतना टमाटर पहुंचने से कीमत भी गिर जाएगी।
हाइब्रिड बीज ने बढ़ाया मुनाफा
प्रगतिशील किसान अमित का कहना है पुराने तरीकों से सब्जी की खेती से नुकसान का अंदेशा रहता है। खेती करने के साथ ही वे हाइब्रिड टमाटर की किस्मों का उपयोग करने के साथ ही नई किस्म विकसित करने पर भी ध्यान दे रहे हैं। हाइब्रिड किस्मों से ज्यादा उत्पादन मिलता है और गुणवत्ता भी अच्छी रहती है। ऐसी वैराइटी के टमाटर देशी के मुकाबले कई दिन तक खराब नहीं होते।
ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत
टमाटर की खेती की सिंचाई के लिए अमित जैन तकनीकी का उपयोग करते हैं। उन्हें टमाटर के खेत में ड्रिप सिस्टम लगा रखा है। इससे उन्हें फसल की सिंचाई में ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। वहीं बूंद बूंद पानी से सिंचाई करने से पौधों के खराब होने और पानी की बर्बादी से भी निजात मिल जाती है। क्योंकि ड्रिप सिस्टम से पानी सीधे पौधे की जड़ तक पहुंचता है। अब वे पूरे खेत में यह सिस्टम लगाने की तैयार कर रहे हैं। वहीं खरपतवार की समस्या और नमी को जल्द सूखने से बचाने मल्चिंग का सहारा भी ले रहे हैं।
वैज्ञानिक नजरिया बचा रहा नुकसान
अमित जैन का कहना है टमाटर की खेती करने में वैज्ञानिक नजरिया कारगर साबित हो रहा है। जहां साधारण तरीके और परम्परागत सब्जी उत्पादक फसल खराब होने के संकट से घिरे रहते हैं। वहीं हाईब्रिड बीज, नई किस्म, जैविक खाद, गुणवत्तापूर्ण उर्वरक और कीटनाशकों से ऐसी मुश्किल दूर हो जाती है। मौसम की सटीक जानकारी, कीटों के प्रकोप, फफूंद की समस्या से भी समय रहते निजात मिल जाती है।
एक बीघा से तीन लाख तक की कमाई
विशेषज्ञों के अनुसार एक बीघा में सब्जी की खेती करने पर करीब 50 हजार रुपए की लागत आती है। इस खेती से जहां आम किसान लाख से डेढ़ लाख तक निकाल पाते हैं। वहीं अमित को इतने ही खेत से दो से तीन लाख तक की कमाई हो जाती है। अमित का कहना है किसानों को पुराना ढर्रा छोड़ना होगा। मौसम से लेकर बीज और उर्वरक से लेकर कीट व्याधियों के नियंत्रण में वैज्ञानिक नजरिए और आधुनिक तरीके अपनाने होंगे।
