देश के कई राज्यों में मानसून फिर सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मध्य भारत में बारिश बढ़ने का अनुमान जताया है। इसका सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में दिख सकता है।
राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से बारिश कमजोर बनी हुई थी। अब पूर्वी राजस्थान में बादल दोबारा बरस सकते हैं। बारिश किसानों को राहत देगी, पर तेज हवा फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है।
मध्य प्रदेश में कहां होगी भारी बारिश
मध्य प्रदेश में 11 सितंबर को कई स्थानों पर बारिश का अनुमान है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां ज्यादा रह सकती हैं। पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कहीं-कहीं भारी बारिश संभव है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, नर्मदापुरम और उज्जैन संभाग में बादल छाए रहेंगे। कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज हवा चलने की भी आशंका है।
रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली और शहडोल संभाग में बारिश बढ़ सकती है। जबलपुर, कटनी, मंडला और बालाघाट में भी सावधानी जरूरी होगी। भोपाल, सीहोर, रायसेन और नर्मदापुरम में मध्यम बारिश संभव है। मालवा और निमाड़ के कई हिस्सों में भी बादल बरस सकते हैं। खेतों में पहले से पानी होने पर फसलों को नुकसान संभव है। खासकर सोयाबीन और उड़द की फसल में पानी नहीं रुकना चाहिए।
मौसम विभाग के राष्ट्रीय पूर्वानुमान में पूर्वी मध्य प्रदेश में 10 से 12 सितंबर तक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 11 सितंबर को कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।
छत्तीसगढ़ में तेज होगा मानसून
छत्तीसगढ़ में 11 सितंबर को मानसून सक्रिय रहने का अनुमान है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश और बिजली गिरने की आशंका है। रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और महासमुंद में बारिश का दौर बन सकता है। धमतरी, गरियाबंद, बालोद और कबीरधाम में भी बादल बरस सकते हैं। बस्तर संभाग के जिलों में भारी बारिश की संभावना ज्यादा रहेगी।
बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर और दंतेवाड़ा में सावधानी जरूरी है। सुकमा और बीजापुर में तेज बारिश से नाले उफन सकते हैं। सरगुजा संभाग में भी गरज-चमक की स्थिति बन सकती है।
रायपुर में आसमान सामान्य रूप से बादलों से घिरा रह सकता है। शहर में कुछ दौर की बारिश होने का पूर्वानुमान है। छत्तीसगढ़ में धान की फसल के लिए बारिश फायदेमंद साबित हो सकती है। खेतों में अधिक पानी जमा होने पर पौधों को नुकसान होगा। लगातार नमी से कीट और रोग फैलने की आशंका भी बढ़ेगी।
राजस्थान में फिर सक्रिय होगा मानसून
राजस्थान में कमजोर पड़ा मानसून फिर सक्रिय होने वाला है। 11 सितंबर से पूर्वी राजस्थान में बारिश बढ़ने का अनुमान है। पश्चिमी राजस्थान में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। जयपुर, भरतपुर, कोटा और उदयपुर संभाग में मौसम बदलेगा। कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। अजमेर संभाग में भी बादल छाने का अनुमान है।
कोटा, बारां, बूंदी और झालावाड़ में बारिश ज्यादा प्रभावी रह सकती है। चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा और डूंगरपुर में भी बारिश संभव है। हाड़ौती क्षेत्र में 13 और 14 सितंबर को भारी बारिश बढ़ सकती है। पश्चिमी राजस्थान में मौसम गर्म बना रह सकता है। कुछ जिलों में छिटपुट बारिश से तापमान में कमी आएगी। जोधपुर और बीकानेर संभाग में बारिश का फैलाव सीमित रह सकता है।
बारिश से फसलों को फायदा भी, नुकसान भी
सितंबर की बारिश सोयाबीन, धान और मक्का के लिए महत्वपूर्ण है। कम बारिश वाले इलाकों में इससे मिट्टी को जरूरी नमी मिलेगी। इससे फसलों की बढ़वार और दाने बनने में मदद हो सकती है।
तेज बारिश से सोयाबीन और दलहन फसलों में जलभराव होगा। खेत में पानी रुकने से जड़ें सड़ सकती हैं। उड़द और मूंग में फलियां खराब होने का खतरा रहेगा। धान के खेतों में जरूरत से अधिक पानी निकालना जरूरी है। मक्का और कपास के खेतों में भी जल निकासी रखें। तेज हवा से मक्का, केला और पपीता गिर सकते हैं।
किसान इन बातों का रखें ध्यान
किसान बारिश के दौरान खाद और कीटनाशक का छिड़काव रोक दें। मौसम साफ होने के बाद ही दवाओं का उपयोग करें। खेत में कटी फसल खुले स्थान पर नहीं छोड़ें। सोयाबीन, उड़द और मूंग के खेतों से अतिरिक्त पानी निकालें। सब्जियों की क्यारियों के आसपास छोटी नालियां तैयार रखें। केला और पपीता जैसे पौधों को मजबूत सहारा दें।
बिजली चमकने पर किसान पेड़ के नीचे खड़े नहीं हों। खुले खेतों और पानी भरे स्थानों से तुरंत बाहर निकलें। पशुओं को बिजली के खंभों और तारों से दूर बांधें। मौसम का असर हर जिले में अलग हो सकता है। किसान स्थानीय पूर्वानुमान देखकर ही खेती संबंधी फैसला लें। जिला कृषि विभाग और मौसम केंद्र की सलाह पर ध्यान देना जरूरी है।
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