राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में फसल अवशेष जलाने पर सख्ती होगी। जिला प्रशासन ने इसके लिए नई व्यवस्था बनाई है। खेतों में अवशेष जलाने की घटनाओं पर निगरानी होगी। किसानों को अवशेष प्रबंधन के लिए भी जागरूक किया जाएगा। जिला कलेक्टर डॉ. अमित यादव ने समिति गठित की है। यह समिति उपखंड स्तर पर काम करेगी। संबंधित उपखंड अधिकारी समिति के अध्यक्ष होंगे। कृषि विभाग के अधिकारी भी समिति में शामिल होंगे। उप पुलिस अधीक्षक भी समिति के सदस्य होंगे। खंड विकास अधिकारी और तहसीलदार भी सदस्य बनाए गए हैं।
फसल अवशेष जलाने की घटनाएं रोकना इसका मुख्य उद्देश्य है। प्रशासन कार्रवाई के साथ जागरूकता पर भी जोर देगा। किसानों को अवशेष खेत में मिलाने की सलाह दी जाएगी। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में मदद मिल सकती है। जिला प्रशासन की सूचना के अनुसार, यह व्यवस्था निर्देशों के तहत बनाई गई है। इन निर्देशों में फसल अवशेष नहीं जलाने पर जोर है। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (Commission for Air Quality Management) से जुड़े निर्देशों का भी उल्लेख है।
हफ्ते में होगी समिति की बैठक
फसल अवशेष जलाने की घटनाओं के दौरान बैठक होगी। उपखंड स्तर पर साप्ताहिक बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें रोकथाम से जुड़े कामों की समीक्षा होगी। निगरानी की स्थिति पर भी चर्चा की जाएगी।
समिति घटनाओं की जानकारी जुटाने पर भी नजर रखेगी। नियम तोड़ने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। प्रशासन ने दंडात्मक कार्रवाई की बात भी कही है। इसका मकसद अवशेष जलाने की घटनाएं कम करना है।
बैठकों में निगरानी व्यवस्था की समीक्षा होगी। जरूरत के अनुसार आगे की कार्रवाई तय होगी। इससे स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी भी तय होगी। खेतों में आग की घटनाओं पर तुरंत सूचना देने पर जोर रहेगा।
गांवों में किसानों से होगा संपर्क
प्रशासन ने गांव स्तर पर भी व्यवस्था बनाई है। पंचायत समिति के विकास अधिकारी इसमें भूमिका निभाएंगे। पटवारी और कृषि पर्यवेक्षक भी किसानों से संपर्क करेंगे। ग्राम पंचायत स्तर के कर्मचारी भी अभियान में जुड़ेंगे। यह संयुक्त टीम किसानों को अवशेष नहीं जलाने समझाएगी। किसानों को फसल अवशेष के सही इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी। अवशेषों को खेत में मिलाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
प्रशासन का जोर सिर्फ जुर्माने पर नहीं रहेगा। किसानों को वैकल्पिक प्रबंधन के तरीके भी बताए जाएंगे। खेत में अवशेष मिलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने पर जोर होगा। अगर जागरूकता के बाद भी आग लगाई जाती है, तो सूचना दी जाएगी। ऐसी सूचना ब्लॉक स्तर की समिति तक पहुंचेगी। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
रकबे के हिसाब से लगेगा जुर्माना
फसल अवशेष जलाने पर जुर्माना जमीन के रकबे से जुड़ा है। जिला प्रशासन की सूचना में तीन श्रेणियां बताई गई हैं। दो एकड़ से कम जमीन पर 5 हजार रुपए लगेंगे। यह राशि प्रत्येक घटना के आधार पर बताई गई है। दो एकड़ या उससे ज्यादा जमीन पर अलग दर लागू होगी। पांच एकड़ से कम जमीन के लिए 10 हजार रुपए होंगे। पांच एकड़ से ज्यादा जमीन पर 30 हजार रुपए होंगे।
इस तरह बड़े रकबे वाले किसानों पर ज्यादा जुर्माना पड़ेगा। छोटे किसानों के लिए जुर्माने की राशि कम रखी गई है। प्रशासन ने इन दरों का उल्लेख नियमों के आधार पर किया है। फसल अवशेष जलाने पर कार्रवाई का मुद्दा नया नहीं है। कई राज्यों में इसे रोकने के लिए निगरानी होती है। खेतों में आग से वायु प्रदूषण बढ़ने की चिंता रहती है। मिट्टी पर इसके असर को लेकर भी जागरूकता अभियान चलते हैं।
किसानों के लिए क्या जरूरी है
श्रीगंगानगर में किसानों के लिए सावधानी जरूरी होगी। फसल कटाई के बाद अवशेष जलाने से बचना होगा। प्रशासन की ओर से वैकल्पिक प्रबंधन अपनाने को कहा गया है। किसान अवशेषों को खेत में मिलाने के विकल्प पर विचार कर सकते हैं। इससे अवशेषों का खेत में ही प्रबंधन हो सकता है। कृषि विभाग के कर्मचारी इस बारे में जानकारी देंगे।
सबसे अहम बात जुर्माने की राशि है। पांच एकड़ से ज्यादा जमीन पर 30 हजार रुपए तक जुर्माना है। इसलिए किसान कार्रवाई से पहले नियमों की जानकारी रखें। स्थानीय कृषि अधिकारियों से भी जरूरी जानकारी ली जा सकती है। यह कार्रवाई श्रीगंगानगर जिले में प्रशासनिक निगरानी से जुड़ी है। खबर में बताई गई व्यवस्था इसी जिले की है। किसानों को स्थानीय निर्देशों का पालन करना होगा। किसी भी स्थिति में अवशेष जलाने से पहले नियम समझना जरूरी है।
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