दौसा जिले का बाजरा इन दिनों खूब पसंद हो रहा है। व्यापारी इसकी चमक और बड़े दानों के मुरीद हैं। मीठे स्वाद की भी तारीफ हो रही है। कटाई अब अंतिम दौर में है और मंडियों में बंपर आवक दिख रही है।
दौसा के बाजरे की खासियत
दौसा का बाजरा कई राज्यों में क्वालिटी के लिए मशहूर है। इसकी तीन बातें खास बताई गई हैं। दाने बड़े हैं, चमक अच्छी है और स्वाद मीठा है। इसी वजह से व्यापारी इसे पसंद कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि इलाके के ज्यादातर किसान रासायनिक खाद और कीटनाशक बहुत कम इस्तेमाल करते हैं। इसी कारण यह बाजरा लगभग हर बाजार के लिए ठीक माना जाता है।
मंडियों में कितनी आवक
सबसे ज्यादा चर्चा दौसा मंडी की है। जानकारी के मुताबिक यहां रोजाना औसतन 30 से 35 हजार कट्टे आ रहे हैं। कट्टा यानी बोरी। जिले की दूसरी मंडियों में भी माल पहुंच रहा है। लालसोट, बांदीकुई, मंडावरी और रामगढ़ पचवारा में भी बंपर आवक बताई गई है।
दौसा को राजस्थान के शीर्ष पांच बाजरा उत्पादक जिलों में गिना जाता है। यानी यह जिला प्रदेश की बाजरा पट्टी में अहम जगह रखता है। यहां की मंडियों में कई राज्यों से खरीदार आ रहे हैं।
पंजाब से दक्षिण तक सप्लाई
दौसा का बाजरा अब कई राज्यों तक जा रहा है। बांदीकुई मंडी से पंजाब, हरियाणा और गुजरात को माल भेजा जा रहा है। पंजाब के खरीदार इसे ज्यादातर पशु आहार और पोल्ट्री फीड के लिए लेते हैं।
गुजरात और तमिलनाडु समेत कई राज्यों के व्यापारी इसे खाने के लिए लेते हैं। यानी वहां यह इंसानों के भोजन में काम आता है। दक्षिण भारत की सप्लाई हिंडौन रेलवे स्टेशन से मालगाड़ी के जरिये होती है।
बाजरे के इस्तेमाल और मांग
बाजरे के इस्तेमाल अब रोटी और खिचड़ी तक सीमित नहीं हैं। इसका उपयोग पशु आहार और भोजन में हो रहा है। बिस्कुट और बच्चों के अनाज वाले प्रोसेस्ड उत्पाद भी इससे बनते हैं। शहरी बाजारों में इन उत्पादों की मांग बढ़ रही है।
यानी बाजरे का बाजार तीन हिस्सों में बंटा दिखता है। पहला हिस्सा पशु आहार और पोल्ट्री का है। दूसरा हिस्सा घर के भोजन का है। तीसरा हिस्सा कंपनियों के बनाए प्रोसेस्ड उत्पादों का है।
सेहत को लेकर क्या दावे हैं
बाजरे को पोषण से भरपूर बताया गया है। दावा है कि इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस मिलता है। फाइबर पाचन में मदद करता है। यह स्वाभाविक रूप से ग्लूटेन-फ्री भी है। सर्दियों में बाजरे की रोटी और खिचड़ी खूब खाई जाती है।
किसानों के लिए एमएसपी क्या है
किसान के लिए मंडी भाव के साथ एमएसपी भी अहम है। एमएसपी (Minimum Support Price) यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य। केंद्र ने 13 मई 2026 को खरीफ फसलों के नए एमएसपी मंजूर किए थे।
खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए बाजरे का एमएसपी 2,900 रुपए प्रति क्विंटल है। पिछले सीजन 2025-26 में यह 2,775 रुपए था। यानी 125 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। यह करीब 4.5 फीसदी ज्यादा है।
सरकारी अनुमान के मुताबिक बाजरा किसानों को लागत पर 56 फीसदी मुनाफा मिलेगा। मूंग के बाद यह दूसरा सबसे ऊंचा अनुमान है। हालांकि यह अनुमानित मार्जिन है। असल कमाई मंडी के भाव और लागत पर निर्भर करेगी।
किसान अपनी मंडी का ताजा भाव जरूर देखें। भाव एमएसपी से नीचे हो, तो बिचौलियों को फसल बेचने में जल्दबाजी न करें। सरकारी खरीद के बारे में कृषि विभाग से पूछें।
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