किसान की बात,सूत्र के साथ

राजस्थान में उर्वरक की कमी नहीं: कृषि मंत्री ने दिया भरोसा- रबी 2026-27 के लिए स्टॉक तैयार, कालाबाजारी पर सख्ती

newz@gmail.com | Oct 8, 2026, 17:44 IST

राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने कहा कि रबी सीजन के लिए उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक है। किसानों को अफवाह में आकर भंडारण नहीं करना चाहिए। कालाबाजारी पर 24 मामले दर्ज हुए और 118 लाइसेंस निलंबित या निरस्त किए गए।

राजस्थान

राजस्थान के किसान रबी की बुवाई की तैयारी में हैं। ऐसे में खाद को लेकर चिंता भी बढ़ी है। अब सरकार ने साफ किया है कि प्रदेश में उर्वरक की कमी नहीं है। कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने किसानों से भरोसा रखने को कहा।

प्रदेश में कितना स्टॉक है

प्रदेश में अभी तीन लाख 72 हजार मीट्रिक टन यूरिया का स्टॉक है। डीएपी (Di-Ammonium Phosphate) का स्टॉक एक लाख 6 हजार मीट्रिक टन है। एनपीके (Nitrogen Phosphorus Potassium) का स्टॉक 97 हजार मीट्रिक टन है। एसएसपी (Single Super Phosphate) का स्टॉक दो लाख आठ हजार मीट्रिक टन है।

सरकार ने कम स्टॉक और ज्यादा खपत वाले जिलों की पहचान की है। इन जिलों और ब्लॉकों में मांग के हिसाब से पहले आपूर्ति हो रही है। रोज की उपलब्धता पर भी नजर रखी जा रही है।

रबी 2026-27 के लिए राज्य स्तर की एक अहम बैठक हुई। बैठक राज्य स्तरीय फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेटरी टास्क फोर्स की थी। अध्यक्षता मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने की। मकसद जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाना था।

रबी 2026-27 में फसल योजना

केंद्र सरकार तिलहन और दलहन की खेती बढ़ाना चाहती है। इसी वजह से राजस्थान में इनका रकबा बढ़ाने का प्रस्ताव है। अनाज का रकबा घटाने का प्रस्ताव रखा गया है।

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने पिछले सीजन के आंकड़े भी बताए। रबी 2025-26 में 39.82 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुवाई हुई थी। दलहन की बुवाई 20.69 लाख हेक्टेयर में हुई थी। अनाज की बुवाई 42.77 लाख हेक्टेयर में की गई थी।

इस बार तिलहन का प्रस्तावित रकबा 40.06 लाख हेक्टेयर है। दलहन का रकबा 21.95 लाख हेक्टेयर रखा गया है। अनाज का प्रस्तावित रकबा 38.50 लाख हेक्टेयर है। फसल के हिसाब से खाद की जरूरत देखकर वितरण योजना बनी है।

केंद्र से मिला कितना आवंटन

रबी 2026-27 में अक्टूबर के लिए केंद्र ने राजस्थान को यूरिया आवंटित किया है। यह मात्रा 4 लाख 60 हजार मीट्रिक टन है। 1 अक्टूबर का स्टॉक भी इसमें शामिल है। अब तक 4 लाख 33 हजार मीट्रिक टन यूरिया की व्यवस्था हो चुकी है।

डीएपी का आवंटन भी हुआ है। अक्टूबर के लिए केंद्र ने 2 लाख 400 मीट्रिक टन डीएपी तय किया है। इसके मुकाबले 1 लाख 41 हजार मीट्रिक टन की व्यवस्था हो चुकी है। इसमें भी 1 अक्टूबर का स्टॉक शामिल है। मंत्री के मुताबिक आवंटन के हिसाब से आपूर्ति जारी है।

राज्य सरकार केंद्र के साथ लगातार तालमेल बना रही है। मकसद प्रदेश की जरूरत के हिसाब से आपूर्ति पक्की करना है।

कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई

विभाग ने समय समय पर विशेष अभियान चलाए हैं। जमाखोरी, कालाबाजारी और खाद को दूसरी जगह भेजने (डायवर्जन) पर कार्रवाई हुई। विभाग ने 12 हजार 362 बिक्री केंद्रों की जांच की। इस दौरान 24 एफआईआर (First Information Report) दर्ज की गईं।

लाइसेंस पर भी सख्ती हुई। कुल 115 उर्वरक लाइसेंस निलंबित किए गए। 3 लाइसेंस निरस्त किए गए। यानी 118 लाइसेंस पर कार्रवाई हुई।

डायवर्जन के मामलों में अलग अलग उर्वरकों के 1223 बैग जब्त हुए। गुण नियंत्रण कार्रवाई में अब तक 8 हजार 533 बैग जब्त हुए। इनमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी जैसे उर्वरक शामिल हैं। अब तक 11 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों पर दोष सिद्ध होना अभी बाकी है।

सरकार 10 सितंबर से 15 अक्टूबर तक विशेष गुण नियंत्रण अभियान चला रही है। इसमें निरीक्षण, जब्ती और नमूने लेने की कार्रवाई हो रही है। उर्वरक डायवर्जन रोकने पर भी जोर है।

वितरण में पारदर्शिता कैसे

प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी मंजू राजपाल ने वितरण का तरीका समझाया। उन्होंने बताया कि केंद्र हर महीने राज्यों को आवंटन करता है। यह आवंटन कंपनी के हिसाब से भी होता है।

राज्य सरकार जिलों की मांग देखकर जिलेवार आपूर्ति योजना बनाती है। इससे खाद का समान और पारदर्शी वितरण हो रहा है। उनके मुताबिक पिछले साल की तुलना में फॉस्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता बेहतर है। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड देखने की सलाह दी जा रही है। कार्ड की सिफारिश के हिसाब से ही संतुलित खाद डालने को कहा गया है।

हर बिक्री केंद्र पर विभाग के कर्मचारियों की नामजद ड्यूटी लगी है। आयुक्त कृषि नरेश कुमार गोयल ने यह जानकारी दी। जहां किसान ज्यादा हैं, वहां कतार लगवाई जा रही है। खाद का वितरण अफसरों की निगरानी में कराया जा रहा है।

जिलों में निगरानी का इंतजाम

सीमा से सटे जिलों पर खास ध्यान है। खाद दूसरे राज्यों में न जाए, इसलिए 61 चेक पोस्ट बनाए गए हैं। इन पर विभाग के कर्मचारी तैनात हैं। जरूरत पड़ने पर पुलिस भी मदद करती है।

सभी जिलों में कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं। यहां से कालाबाजारी, जमाखोरी और डायवर्जन पर नजर रखी जाती है। खाद की उपलब्धता और वितरण की स्थिति भी नियमित देखी जाती है। प्रमुख शासन सचिव ने जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। नियम तोड़ने वालों को किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

किसानों से मंत्री की अपील

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने किसानों से घबराने से बचने को कहा। उनका कहना है कि प्रदेश में खाद की कमी नहीं है। इसलिए अफवाह या बहकावे में न आएं। जरूरत से ज्यादा खरीदारी और भंडारण की जरूरत नहीं है।

मंत्री ने कहा कि किसान अपनी असली जरूरत के हिसाब से ही खाद खरीदें। राज्य सरकार किसानों के हित को सबसे ऊपर रख रही है। केंद्र और राज्य के स्तर पर तालमेल और निगरानी आगे भी जारी रहेगी।

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