राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा है कि प्रदेश में उर्वरकों की कमी नहीं होगी। उनके मुताबिक खरीफ 2026 में डीएपी और यूरिया की आपूर्ति मांग से ज्यादा रही। रबी सीजन में भी किसानों को मांग के हिसाब से खाद मिलेगी। मंत्री ने किसानों से कहा कि उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। उनका दावा है कि केंद्र सरकार से भी खाद की आपूर्ति लगातार जारी है।
खरीफ में कितनी खाद मिली
खरीफ 2026 में डीएपी (Di-Ammonium Phosphate) की मांग 5.10 लाख मीट्रिक टन थी। इसके मुकाबले 5 लाख 44 हजार 995 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध कराया गया। यह मंत्री का दिया आंकड़ा है।
यूरिया की मांग 11 लाख मीट्रिक टन थी। इसके सामने 17 लाख 15 हजार 814 मीट्रिक टन यूरिया दिया गया। मंत्री ने इसे दोनों खादों की पर्याप्त आपूर्ति का सबूत बताया।
मोटे हिसाब से डीएपी की आपूर्ति मांग से करीब सात प्रतिशत ज्यादा रही। यूरिया की आपूर्ति मांग से करीब 56 प्रतिशत ज्यादा बताई गई है। ये आंकड़े सरकार की ओर से दिए गए हैं।
रबी सीजन में कितना स्टॉक
डॉ. मीणा ने बताया कि रबी सीजन की बुवाई अभी शुरुआती दौर में है। अभी प्रदेश में 1 लाख 5 हजार 584 मीट्रिक टन डीएपी का स्टॉक है। यूरिया का स्टॉक 3 लाख 63 हजार 969 मीट्रिक टन बताया गया है। इसके अलावा डीएपी के 14 रैक रास्ते में हैं। इनमें करीब 35 हजार मीट्रिक टन खाद है। मंत्री के मुताबिक यह खाद 14 अक्टूबर 2026 तक मिल सकती है।
मौजूदा साप्ताहिक खपत के हिसाब से डीएपी करीब 18 दिन चलेगा। यूरिया का स्टॉक करीब 35 दिन चलेगा। केंद्र से लगातार आपूर्ति मिल रही है। इसलिए रबी में भी खाद बनाए रखने की व्यवस्था की जा रही है।
कालाबाजारी पर सख्ती का दावा
कृषि मंत्री ने कहा कि खाद बंटवारे में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं होगी। उनके मुताबिक विभाग समय-समय पर विशेष अभियान चलाता है। इसमें जमाखोरी, कालाबाजारी और यूरिया के अवैध डायवर्जन पर कार्रवाई होती है। टैगिंग जैसी गड़बड़ियों में लिप्त विक्रेताओं पर भी सख्ती की जा रही है। डायवर्जन का मतलब है खेती की खाद को दूसरे कामों में भेज देना। टैगिंग का मतलब है खाद के साथ दूसरा सामान जबरन बेचना।
विक्रेताओं पर कार्रवाई, 25 एफआईआर दर्ज
मंत्री के मुताबिक 2026-27 में अब तक 11,770 विक्रेताओं का निरीक्षण हुआ है। इस दौरान 9,585 नमूने लिए गए। गड़बड़ी मिलने पर 1,238 फर्मों को कारण बताओ नोटिस दिए गए।
इसके अलावा 64 विक्रेताओं की बिक्री पर रोक लगाई गई। 128 फर्मों के उर्वरक प्राधिकार पत्र निलंबित या निरस्त किए गए। 25 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। मंत्री ने बताया कि 11 गिरफ्तारियां भी हुई हैं।
इन मामलों में दोष सिद्ध होना अभी बाकी है। एफआईआर या गिरफ्तारी का मतलब अपराध साबित होना नहीं है। अदालत में सुनवाई के बाद ही फैसला होगा।
गुणवत्ता जांच और कंट्रोल रूम
मंत्री ने बताया कि खाद की गुणवत्ता के लिए विशेष अभियान चल रहा है। इसमें औचक निरीक्षण किए जा रहे हैं। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।
सभी जिलों में कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। वहां से खाद की उपलब्धता, बंटवारे और आपूर्ति पर नजर रखी जाती है। मकसद यह है कि किसानों को समय पर अच्छी गुणवत्ता की खाद मिले।
नैनो खाद पर मंत्री ने क्या कहा
डॉ. मीणा ने साफ किया कि नैनो खाद के लिए दबाव नहीं है। यह बात नैनो डीएपी और नैनो यूरिया पर लागू है। किसान अपनी इच्छा और जरूरत के हिसाब से इन्हें खरीद सकते हैं।
मंत्री के अनुसार सरकार नतीजे देखकर नैनो खाद को बढ़ावा दे रही है। यानी बढ़ावा दिया जा रहा है, पर खरीद की बाध्यता नहीं है।
जबरन टैगिंग पर रोक
मंत्री ने कहा कि खाद के साथ जबरन दूसरा सामान बेचने पर रोक रहेगी। खाद का बंटवारा कृषि विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में कराया जा रहा है। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता रहने का दावा किया गया है।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। खाद की उपलब्धता और बंटवारे पर लगातार नजर रखी जाए। उन्होंने कहा कि किसानों का हित सबसे ऊपर रखा जाए।
रबी की बुवाई और खाद की जरूरत
रबी की बुवाई अभी शुरुआती अवस्था में है। इसलिए खाद की मांग आने वाले हफ्तों में बढ़ सकती है। मंत्री के मुताबिक किसानों को मांग के अनुसार डीएपी और यूरिया मिलता रहेगा।
ऐसे में स्टॉक की निगरानी और समय पर आपूर्ति अहम हो जाती है। मंत्री ने यही बात दोहराई कि समयबद्ध उपलब्धता सरकार की प्राथमिकता है।
किसान अब क्या करें
किसान जरूरत के हिसाब से ही खाद खरीदें और पक्का बिल जरूर लें। कोई विक्रेता दूसरा सामान लेने का दबाव डाले, तो कृषि विभाग को शिकायत दें। जिला कंट्रोल रूम की मदद भी ली जा सकती है।
डीएपी का स्टॉक करीब 18 दिन का बताया गया है। इसलिए बुवाई की योजना पहले से बनाएं। जरूरत से ज्यादा खरीद या जमाखोरी से बचें। इससे दूसरे किसानों को खाद मिलने में दिक्कत नहीं होगी।
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