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नंदन फलोद्यान योजना की मदद से ग्वालियर के किसान लोकेंद्र के खेत में लगे फलदार पौधे, आप भी उठाएं योजना का फायदा

newz@gmail.com | Oct 15, 2026, 15:14 IST

ग्वालियर की ग्राम पंचायत चैत के किसान लोकेंद्र सिंह के खेत में नंदन फलोद्यान योजना से फलदार पौधे लगे हैं। उनके मुताबिक योजना ने खेत में बाग विकसित करने का मौका दिया है।

नंदन फलोद्यान योजना

ग्वालियर जिले के किसान लोकेंद्र सिंह के खेत की तस्वीर बदल रही है। पहले उनके खेत में पारंपरिक खेती होती थी। अब वहां फलदार पौधों की कतारें लहलहा रही हैं। यह बदलाव नंदन फलोद्यान योजना की मदद से आया है।

नंदन फलोद्यान से बदली राह

लोकेंद्र ग्वालियर जिले की ग्राम पंचायत चैत में रहते हैं। उनके खेत में अब फलदार पौधे तैयार हो रहे हैं। यह नंदन फलोद्यान योजना के तहत हुआ है। नंदन फलोद्यान योजना एक सरकारी योजना है। इसके तहत किसान को अपने खेत में बाग विकसित करने का मौका मिला है। लोकेंद्र सिंह इसका उदाहरण हैं।

क्या है नंदन फलोद्यान योजना

नंदन फलोद्यान योजना मध्यप्रदेश में मनरेगा के तहत चलने वाली ग्रामीण उपयोजना है। इसका मकसद पात्र परिवारों की निजी जमीन पर फलदार पौधे लगाकर बगीचा विकसित करना है। इससे पर्यावरण को मदद और परिवार के लिए लंबे समय में आय का स्रोत बनाने की कोशिश होती है।

योजना के लिए इन परिवारों को पात्र बताया गया है:

  • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवार
  • गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवार
  • भूमि सुधार के लाभार्थी और इंदिरा आवास योजना के लाभार्थी
  • लघु और सीमांत किसान

आवेदन ग्रामसभा के जरिए होता है और आवेदन शुल्क नहीं है।

पहले परंपरागत खेती, अब बाग

पहले लोकेंद्र सिंह अपने खेत में पारंपरिक खेती करते थे। मौसम की फसल बोते थे और उसी से आमदनी होती थी। अब उसी खेत में फलदार पौधे कतार में लगे हैं। यह बाग उनके लिए अतिरिक्त आमदनी का मजबूत जरिया है। यानी खेत की जमीन अब दो तरह से काम आ रही है।

लोकेंद्र ने माना सीएम का आभार

लोकेंद्र सिंह के मुताबिक योजना ने उन्हें मौका दिया है। यह मौका अपने खेत में फलोद्यान विकसित करने का है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का धन्यवाद भी किया है। यह उनका अपना बयान है।

बाग की खेती क्यों अलग है

फलों का बाग लगाना एक साल की फसल जैसा नहीं होता। पौधे लगाने के बाद कई साल उनकी देखभाल करनी पड़ती है। फल आने में भी समय लगता है। यह आम जानकारी है, खबर का दावा नहीं।

एक बार बाग तैयार हो जाए, तो साल दर साल फल मिलते हैं। इसी वजह से कई किसान बाग को अतिरिक्त आमदनी का साधन मानते हैं। लोकेंद्र सिंह भी यही कहते हैं।

पौधों की देखभाल का सवाल

फलदार पौधों को शुरुआती सालों में खास देखभाल चाहिए। सिंचाई, खाद और सुरक्षा का ध्यान रखना पड़ता है। गर्मी और पाले से भी बचाना होता है। यह सामान्य जानकारी है। लोकेंद्र का उदाहरण दिखाता है कि पारंपरिक किसान भी बाग सोच सकता है। सरकारी योजना की मदद से जोखिम कम हो सकता है।

योजना से जुड़ना चाहने वाले किसान स्थानीय उद्यानिकी कार्यालय से जानकारी लें। पात्रता, आवेदन की प्रक्रिया और मिलने वाली मदद वहीं से पक्की करें। यह सामान्य सलाह है, खबर का हिस्सा नहीं।

बाग लगाने से पहले क्या देखें

बाग लगाने से पहले खेत की मिट्टी और पानी की स्थिति देख लें। जिस फल का पौधा लगाना है, उसकी जलवायु से मेल भी जरूरी है। पौधे भरोसेमंद जगह से लें।

बाग के बीच की खाली जमीन का इस्तेमाल कैसे हो, यह भी सोचना चाहिए। इसके लिए विशेषज्ञ की सलाह मददगार रहेगी। ये बातें आम सलाह हैं।

बाग से होने वाला बदलाव

लोकेंद्र के खेत में अब पौधों की कतारें दिखती हैं। पहले यहां मौसमी फसल की जमीन थी। यह बदलाव गांव के दूसरे किसानों का ध्यान भी खींच सकता है। पड़ोसी का बाग देखकर किसान के मन में भी नई सोच आती है। यह आम अनुभव है, खबर का दावा नहीं।

बिक्री की योजना पहले बनाएं

बाग से कमाई तभी होती है, जब फल को अच्छा बाजार मिले। इसलिए बिक्री की योजना शुरू में ही सोचनी चाहिए। नजदीकी मंडी और खरीदार की जानकारी जुटाना काम आता है।

फल कब आएंगे और कितने आएंगे, यह किस्म पर निर्भर करता है। कई किसान शुरुआती सालों के लिए अलग आमदनी का इंतजाम रखते हैं। यह सामान्य सोच है, खबर का हिस्सा नहीं।

योजना की जानकारी कहां से लें

सरकारी योजना में आम तौर पर पात्रता और आवेदन की शर्तें होती हैं। इनमें जमीन के कागज और पहचान जैसे दस्तावेज लग सकते हैं। यह आम जानकारी है।

सही शर्तें स्थानीय उद्यानिकी अधिकारी बता सकते हैं। किसी बिचौलिए के भरोसे आवेदन करने से बचें। आधिकारिक कार्यालय से पुष्टि करना बेहतर रहता है।

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