किसान की बात,सूत्र के साथ

राजस्थान में मूंगफली बीजों की गुणवत्ता पर सवाल, 15 में से 14 नमूने फेल होने के बाद फर्मों के लाइसेंस रद्द, FIR

newz@gmail.com | Oct 15, 2026, 20:12 IST

राजस्थान में मूंगफली के बीजों की जांच में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। ग्रो आउट टेस्ट में 15 में से 14 नमूने आनुवंशिक शुद्धता के मानकों पर खरे नहीं उतरे। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने संबंधित फर्मों के खिलाफ एफआईआर और लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए हैं।

मूंगफली बीज

राजस्थान में मूंगफली के बीजों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। कृषि विभाग की औचक जांच में अधिकांश नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। ग्रो आउट टेस्ट में जांचे गए 15 नमूनों में से 14 अमानक मिले। यह जांच बीजों की किस्म और आनुवंशिक शुद्धता का पता लगाने के लिए की गई थी। जांच में केवल एक नमूना निर्धारित मानकों के अनुसार सही पाया गया। इस खुलासे के बाद संबंधित फर्मों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है।

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से एफआईआर दर्ज कराने और लाइसेंस निरस्त करने को कहा है। विभाग का कहना है कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।

छह क्षेत्रों में हुए औचक निरीक्षण

कृषि मंत्री के अनुसार, विभाग को बीजों की बिक्री में गड़बड़ी की सूचना मिली थी। आरोप था कि कुछ व्यापारी बाजार से अनाज खरीद रहे थे। इसके बाद उसे आकर्षक पैकिंग में बीज बताकर बेचे जाने की आशंका जताई गई।

इस सूचना के आधार पर विभाग ने औचक निरीक्षण किए। अधिकारियों ने गोविंदगढ़, सीकर, जयपुर, सुजानगढ़, चूरू और बीकानेर में संबंधित फर्मों की जांच की। इन निरीक्षणों के दौरान मूंगफली की अलग-अलग किस्मों के नमूने लिए गए।

इसके बाद इन नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराई गई। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि बीज अपनी घोषित किस्म के अनुरूप हैं या नहीं। परीक्षण में आनुवंशिक शुद्धता की स्थिति भी जांची गई।

विभागीय जांच में सामने आए नतीजे चिंता बढ़ाने वाले हैं। कुल 15 नमूनों में से 14 आनुवंशिक शुद्धता के निर्धारित मानकों पर अमानक मिले। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में संबंधित फर्मों के नाम नहीं बताए गए हैं।

किन किस्मों के नमूने जांचे गए?

जांच में मूंगफली की पांच किस्मों से जुड़े नमूने शामिल थे। इनमें जीजी-10, आरजी-510, टीजी-37 ए, टीजीवी-24 और आरजी-578 शामिल हैं। इन नमूनों को उगाकर उनकी विशेषताओं का परीक्षण किया गया। चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने जांच की प्रक्रिया पूरी की। दल ने नमूनों की तुलना संबंधित संदर्भ किस्मों से की। इस तुलना के आधार पर किस्म की पहचान और आनुवंशिक शुद्धता का आकलन किया गया।

मंत्री के अनुसार, अलग-अलग किस्मों के नमूनों में आनुवंशिक शुद्धता का स्तर काफी कम मिला। जीजी-10 किस्म के चार नमूनों में यह स्तर 4.12 से 6.37 के बीच रहा। टीजीवी-24 किस्म के एक नमूने में आनुवंशिक शुद्धता केवल 2.25 प्रतिशत मिली।

आरजी-510 किस्म के पांच नमूनों में आनुवंशिक शुद्धता 61.12 से 67.25 के बीच पाई गई। वहीं, आरजी-578 किस्म के चार नमूनों में यह स्तर 30.12 से 37.75 प्रतिशत के बीच रहा। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कई नमूनों में घोषित किस्म से जुड़ी शुद्धता की स्थिति कमजोर थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में टीजी-37 ए किस्म के अलग परिणाम का विवरण नहीं दिया गया है। कुल मिलाकर 15 नमूनों में से 14 अमानक घोषित किए गए।

क्या होता है ग्रो आउट टेस्ट?

ग्रो आउट टेस्ट बीजों की गुणवत्ता जांचने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इसमें बीजों को उगाकर उनके पौधों की विशेषताओं को देखा जाता है। फिर उनकी तुलना प्रमाणित संदर्भ किस्मों से की जाती है।

इस प्रक्रिया से यह जांचने में मदद मिलती है कि बीज घोषित किस्म के अनुरूप हैं या नहीं। पौधों की बढ़वार और दूसरी पहचान योग्य विशेषताओं के आधार पर आनुवंशिक शुद्धता का आकलन किया जाता है।

कृषि मंत्री ने इस जांच को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, बीजों की सही किस्म और आनुवंशिक शुद्धता सुनिश्चित करने में यह प्रक्रिया मदद करती है। इससे गुणवत्ता से जुड़ी अनियमितताओं की पहचान की जा सकती है।

फर्मों पर होगी सख्त कार्रवाई

कृषि मंत्री ने संबंधित फर्मों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को एफआईआर दर्ज कराने और लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई आगे बढ़ाने को कहा गया है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने गुणवत्ताहीन बीज बेचने और किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों पर कार्रवाई जारी रखने की बात कही।

किसानों के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज जरूरी

बीज फसल उत्पादन की शुरुआत होते हैं। बीज की किस्म और गुणवत्ता का असर फसल की बढ़वार पर पड़ सकता है। इसलिए किसानों के लिए भरोसेमंद स्रोत से बीज खरीदना महत्वपूर्ण है। मूंगफली की खेती में किसान बीज खरीदने से पहले किस्म की जानकारी लेते हैं। वे अपने क्षेत्र, मौसम और खेती की जरूरतों के अनुसार बीज चुनते हैं। ऐसे में घोषित किस्म की शुद्धता पर सवाल उठना चिंता का विषय है।

यदि बीज की गुणवत्ता अपेक्षा के अनुरूप नहीं होती, तो किसान को आर्थिक नुकसान का जोखिम हो सकता है। हालांकि, इस मामले में किसी खास किसान के नुकसान का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। जांच में सामने आई अनियमितता बीजों की गुणवत्ता पर निगरानी की जरूरत को जरूर दिखाती है।

कृषि विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य ऐसी गड़बड़ियों को रोकना और किसानों तक गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री पहुंचाना है। विभाग ने बीजों के साथ उर्वरक और कीटनाशी की गुणवत्ता पर भी निगरानी जारी रखने की बात कही है।

सरकार ने निगरानी बढ़ाने पर दिया जोर

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बीज, उर्वरक और कीटनाशी समय पर मिलने चाहिए। इसके लिए विभागीय निगरानी और कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने किसानों के हितों की रक्षा को सरकार की प्राथमिकता बताया। मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस दिशा में गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

मूंगफली बीजों की जांच में सामने आए परिणाम अब विभागीय कार्रवाई का आधार बनेंगे। संबंधित फर्मों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह महत्वपूर्ण रहेगा। किसानों के लिए भी यह मामला बीज खरीदते समय सावधानी बरतने का संकेत है। बीज खरीदते समय किसान प्रमाणित स्रोत, किस्म का नाम, बैच विवरण और पैकिंग से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं। किसी गड़बड़ी का संदेह होने पर संबंधित कृषि अधिकारी से संपर्क करना चाहिए। इससे शिकायत की जांच कराने में मदद मिल सकती है।

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