मध्य प्रदेश के मंदसौर में औषधीय खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले में तीन जगह हर्बल क्लस्टर बनाए गए हैं। इनमें 12 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में औषधीय फसलें उग रही हैं। यह काम उपज से उद्यम अभियान के तहत हो रहा है। इसका मकसद किसानों को समृद्ध बनाना है। अब इन क्लस्टरों को प्रोसेसिंग और पैकेजिंग से भी जोड़ने की तैयारी है।
मंदसौर में तीन हर्बल क्लस्टर
मंदसौर जिले में तीन जगह हर्बल क्लस्टर बनाए गए हैं। ये जगहें धमनार, सेमलिया हीरा और नंदावटा हैं। तीनों जगह औषधीय फसलों की खेती हो रही है।
कुल 12 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में खेती हो रही है। आम तौर पर क्लस्टर का मतलब किसानों के एक समूह से होता है। ये किसान एक जैसी फसलों की खेती साथ मिलकर करते हैं। इससे उपज को एक जगह जोड़ने और आगे बेचने में आसानी होती है।
उपज से उद्यम अभियान क्या है
उपज से उद्यम अभियान का नाम ही इसका उद्देश्य बताता है। इसमें खेती की उपज को उद्यम यानी कारोबार से जोड़ा जाता है। किसान सिर्फ कच्चा माल बेचने तक सीमित नहीं रहते। इस अभियान के तहत मंदसौर में औषधीय खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य किसानों को समृद्ध बनाना है। हर्बल क्लस्टर इसी सोच का हिस्सा हैं।
जिला पंचायत में हुई बैठक
जिला पंचायत कार्यालय में एक बैठक हुई। इसमें क्लस्टरों के विकास पर चर्चा की गई। साथ ही किसानों की आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के उपायों पर भी बात हुई।
बैठक में कलेक्टर दिव्यांक सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी क्लस्टर से जुड़े किसानों के लगातार संपर्क में रहें। साथ ही उनकी आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाएं।
इन पांच फसलों की हो रही खेती
इन क्लस्टरों में कई औषधीय फसलें उगाई जा रही हैं। इनमें अश्वगंधा, कालमेघ और चिया सीड शामिल हैं। अकरकरा और चंद्रसूर की खेती भी हो रही है। इन सभी को औषधीय फसलें बताया गया है। इनसे अलग अलग तरह के हर्बल उत्पाद बनाए जा सकते हैं। क्लस्टर में प्रोसेसिंग की योजना भी बनाई गई है।
प्रोसेसिंग और पैकेजिंग प्लान
क्लस्टरों में सिर्फ खेती नहीं होगी। यहां उपज को आगे के काम के लिए तैयार करने की व्यवस्था भी बनेगी। इसमें प्रोसेसिंग, ग्रेडिंग और छंटाई शामिल है। पैकेजिंग का काम भी इसी व्यवस्था का हिस्सा होगा।
इसके अलावा हर्बल उत्पाद बनाने और पाउडर तैयार करने की योजना है। इससे उपज की कीमत बढ़ाने के रास्ते खुलते हैं। कच्ची उपज की जगह तैयार उत्पाद बेचने का विकल्प मिलता है।
अश्वगंधा से बनेंगे कई उत्पाद
प्रस्तावित उत्पादों की सूची में अश्वगंधा सबसे पहले आता है। इससे पाउडर, कैप्सूल और टैबलेट बनाने की योजना है। हेल्थ सप्लीमेंट बनाने की बात भी कही गई है।
तुलसी और कालमेघ के उत्पाद
तुलसी से हर्बल चाय बनाई जा सकेगी। तुलसी ड्रॉप्स भी बनाने का प्रस्ताव है। सूखी पत्तियों के पैकेट भी तैयार किए जाएंगे। कालमेघ से पाउडर और टैबलेट बनाने की योजना है। इसके अलावा कालमेघ से स्वरस भी तैयार किया जाएगा। स्वरस यानी पौधे से निकाला गया रस।
इसबगोल, चिया और अकरकरा
इसबगोल से दो चीजें तैयार करने की योजना है। इनमें पशु आहार और भूसी शामिल हैं। चिया सीड से आटा और तेल बनाने का प्रस्ताव है। अकरकरा से पाउडर और तेल बनाए जाएंगे। इस तरह एक ही फसल से एक से ज्यादा उत्पाद बनाने की सोच है। इससे किसानों को बाजार में बेचने के अधिक विकल्प मिल सकते हैं।
सफेद मूसली के उत्पाद
सफेद मूसली से भी कई उत्पाद बनाने की योजना है। इनमें पाउडर, कैप्सूल, टैबलेट और तेल शामिल हैं। इस तरह सूची में सात औषधीय उपज के उत्पाद दिए गए हैं।
यहां एक बात ध्यान देने की है। खबर की फसल सूची में तुलसी, इसबगोल और सफेद मूसली अलग से नहीं हैं। लेकिन प्रस्तावित उत्पादों की सूची में ये तीनों शामिल हैं।
कलेक्टर ने अफसरों को क्या कहा
कलेक्टर दिव्यांक सिंह का जोर किसानों से सीधे संपर्क पर रहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि क्लस्टर के किसानों से नियमित बात होती रहे। इससे किसानों से सीधा संवाद बना रहेगा। उन्होंने आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए कदम उठाने को भी कहा।
किसानों के लिए क्या मायने
मंदसौर के इन क्लस्टरों से किसानों के लिए नया रास्ता खुल सकता है। प्रोसेसिंग और पैकेजिंग जुड़ने से वे तैयार उत्पाद की तरफ बढ़ सकते हैं।
हालांकि अभी खबर में किसानों की संख्या नहीं बताई गई है। कमाई के आंकड़े और खरीदारों की जानकारी भी नहीं दी गई है। प्रोसेसिंग यूनिट कब तक शुरू होगी, यह भी साफ नहीं है।
आने वाले दिनों में प्रशासन की अगली घोषणाओं पर नजर रहेगी। उन्हीं से साफ होगा कि योजना किस रफ्तार से आगे बढ़ती है। फिलहाल इतना तय है कि मंदसौर में औषधीय खेती संगठित रूप ले रही है।
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