मालवा के बिन्नायगा गांव के किसान राधेश्याम परिहार ने बंजर जमीन को सोना बना दिया है। कभी रोजाना बीस रुपये कमाने वाले मजदूर आज करोड़ों का कारोबार कर रहे हैं सफलतापूर्वक। उनका जैविक ब्रांड मालवा माटी अब पूरे भारत में ऑनलाइन बिक रहा है।
पांच बीघा बंजर जमीन से शुरू हुआ संघर्ष
साल 2011 से पहले पिता से अलग होने पर उन्हें पांच बीघा बंजर जमीन मिली थी। जमीन पूरी तरह बंजर थी, इसलिए परिवार का गुजारा करना भी मुश्किल हो रहा था। मजबूरी में उन्होंने मजदूरी शुरू की, जिससे रोजाना सिर्फ बीस रुपए मिलते थे।
जैविक खेती ट्रेनिंग लेकर बदली खेती की सोच
खेती का पक्का इरादा करके उन्होंने शाजापुर कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क किया। फिर गुजरात जाकर जैविक खेती का प्रशिक्षण लिया और नई तकनीकें सीखीं। वहां से वे एक क्विंटल हल्दी और बीस किलो अरंडी के बीज लेकर आए।
तालाब की मिट्टी से जमीन को बनाया उपजाऊ
तालाब की उपजाऊ मिट्टी लाकर उन्होंने अपनी बंजर जमीन को खेती योग्य बनाया। पहले ही साल उन्हें एक लाख रुपए का मुनाफा हुआ, जो बड़ी सफलता थी। इस सफलता के बाद उन्होंने मसाला खेती का विस्तार करने का फैसला किया।
मोबाइल से सीखी जैविक खेती की तकनीक
गांव में नेटवर्क खराब होने के बावजूद उन्होंने मोबाइल से जैविक खेती की रिसर्च की।रासायनिक खाद से खराब हुई जमीन को विषमुक्त करने में चार साल लग गए। रसायन छोड़कर उन्होंने केंचुओं की मदद से वर्मीकम्पोस्ट बनाना शुरू कर दिया।
बंजर जमीनें खरीदकर बढ़ाया कारोबार
आमदनी बढ़ने पर उन्होंने आसपास की बंजर जमीनें खरीदकर उन्हें उपजाऊ बनाया। आज वे पचास बीघा जमीन के मालिक हैं और तीन सौ बीघा पट्टे पर लेते हैं। वे मसालों के साथ-साथ औषधीय फसलों की खेती पर भी ध्यान दे रहे हैं।
प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर शुरू की ब्रांडिंग
साल 2014 में उन्होंने खेत में ही सफाई, सुखाने और पैकेजिंग की यूनिट लगाई। शुरुआत में वे ऑफलाइन बेचते थे, बाद में अमेजन फ्लिपकार्ट पर बिक्री शुरू की। उनकी उपज अब भोपाल, दिल्ली, जोधपुर और इंदौर भी जाती है।
करोड़ों का कारोबार, लाखों में मुनाफा
उनका जैविक खेती से सालाना कारोबार आज एक करोड़ तीस लाख रुपए तक पहुंच गया है। इस कारोबार से उन्हें सालाना तीस लाख रुपए से अधिक शुद्ध लाभ हो रहा है। बंजर जमीन से शुरू हुआ उनका सफर अब देश के किसानों के लिए प्रेरणा है।
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राधेश्याम परिहार मध्यप्रदेश के बिन्नायगा गांव के किसान हैं। उन्होंने बंजर जमीन को जैविक खेती से उपजाऊ बनाया और मालवा माटी ब्रांड शुरू किया।
राधेश्याम परिहार का जैविक खेती से सालाना कारोबार करीब 1.30 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। उन्हें इससे 30 लाख रुपये से ज्यादा शुद्ध लाभ मिल रहा है।
मालवा माटी ब्रांड के तहत जैविक मसाले और औषधीय फसलें बेची जाती हैं। इनके उत्पाद ऑनलाइन अमेजन और फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध हैं।
