संजय शर्मा@BHOPAL. रासायनिक खाद और कीटनाशकों से बांझ होती जमीन की सुध लेने अब किसान आगे आ रहे हैं। सोल सोसाइटी फॉर ऑर्गेनिक फार्मिंग की मदद से भोपाल के आसपास के किसान जैविक खेती सीख रहे हैं। सब्जी उत्पादक किसानों को इससे दोहरा फायदा हो रहा है। जैविक खेती अपनाने के बाद खेत में मंहगे रासायनिक खाद और कीटनाशकों के छिड़काव से छुटकारा मिल गया है। वहीं जैविक तरीके से पैदा सब्जियां गांव से ही मंडी से 20 फीसदी ज्यादा कीमत पर खरीदी जा रही हैं। यानी किसानों की खेती की लागत घटी है और मुनाफा बढ़ गया है।
जमीन को बांझ कर रहे रसायन
ऑर्गेनिक फार्मिंग के एक्सपर्ट जितेन्द्र सिंह बताते हैं पैदावार बढ़ाने के चक्कर में खेतों में सालों से रासायनिक खाद डाले जा रहे हैं। वहीं कीट व्याधियों, खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए भी घातक कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है। जमीन में पैदावार बढ़ाने वाले प्राकृतिक तत्वों का संतुलन बिगड़ गया है। इस वजह से मंहगे खाद और पैदावार बढ़ाने वाले रसायन डालने के बाद भी पैदावार घटती जा रही है।
जैविक खेती बनी विकल्प
रासायनिक खाद, कीटनाशकों के कारण खेती की लागत कई गुना बढ़ गई है। जबकि उत्पादन कम होता जा रहा है, जिससे किसानों को घाटा उठाना पड़ रहा है। ऐसे में किसान एक बार फिर जैविक खेती का रुख कर रहे हैं। इसकी वजह भी अहम है। रासानिक खेती के मुकाबले जैविक की लागत काफी कम है। गोबर के खाद, वर्मीकम्पोस्ट, जीवामृत किसान खुद ही बनाकर उपयोग कर रहे हैं। जिससे खर्च कम हुआ है और जैविक फल-सब्जियों ने मुनाफा बढ़ा दिया है।

जैविक खेती सीख रहे किसान
जैविक खेती विशेषज्ञ जितेन्द्र सिंह का कहना है भोपाल के आसपास के दर्जनभर गांवों में वे किसानों को जैविक खेती सिखा रहे हैं। किसान भी इसके लिए आगे आ रहे हैं। शुरूआती नुकसान की आशंका से डरे किसानों को वे जैविक खेती के लाभ समझाते हैं। उन्हें आसपास जैविक खेती करने वाले किसानों से जोड़ा जाता है। उनके खेतों का मुआयना कराते हैं। अब बरखेड़ी जैसे एक गांव में ही 40 से ज्यादा किसान जैविक तरीके से सब्जी फल पैदा कर रहे हैं।
घर से बिक्री ने बढ़ाई कमाई
सोल सोसाइटी किसानों के समूह बनाकर उनसे गांव में ही सब्जी और फल खरीदती है। किसानों को मंड़ी भाव के मुकाबले 10 से 20 फीसदी ज्यादा कीमत भी मिलती है। यानी एक तो किसान को सब्जी को मंडी ले जाने के झंझट से निजात मिल जाती है दूसरा भाड़ा भी बच जाता है। इसी दोहरे- तिहरे मुनाफे और फसल में मंहगे खाद- कीटनाशकों के उपयोग का खर्च की बचत देख किसान जैविक खेती के सोल मॉडल को अपना रहे हैं।
हर दिन जेब में पहुंच रहा पैसा
आमतौर पर किसानी सीजन आधारित कमाई देती है लेकिन जैविक खेती कर रहे भोपाल के सैकड़ों किसानों की जेब में हर दिन रुपया पहुंच रहा है। अब उनकी खेती ठीक वैसे ही कमाई दे रही है जैसे किसी व्यवसायी की होती है। सुबह घर से सब्जी बिक जाती है और शाम को खाते में रुपया आ जाता है। इसमें उन्हें न तो आढ़तियों से मोल भाव का सामना करना पड़ता और एक भी रुपया खर्च नहीं होता।
इस फायदे को देखकर अब और भी किसान जैविक खेती की तरफ बढ़ रहे हैं। जैविक खाद और देशी तरीकों से कई किसानों ने अपने खेतों की मिट्टी को सुधार लिया है। उनके खेतों में भी अब भरपूर केंचुएं और मित्र कीट फिर से नजर आने लगे हैं। वहीं अब ये किसान न केवल अपने परिवार बल्कि और लोगों के लिए भी रसायनरहित सब्जियां और फलों का उत्पादन कर मुनाफा कमा रहे हैं।
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