मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में जंबो सीताफल को नई पहचान दिलाने की तैयारी है। जिला प्रशासन इस फल को देश-विदेश के बाजारों से जोड़ना चाहता है। इसके लिए ‘सीताफल से समृद्धि’ अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत किसानों का पंजीयन और पौधों की गणना जारी है। यह काम अब अंतिम चरण में पहुंच गया है।
सिवनी का जंबो सीताफल अपने बड़े आकार और मिठास के लिए जाना जाता है। इसे ‘एक जिला, एक उत्पाद’ योजना में भी शामिल किया गया है। इसे जीआई (Geographical Indication) टैग प्राप्त उत्पाद के रूप में पहचान मिली है। जीआई टैग किसी खास क्षेत्र से जुड़े उत्पाद की पहचान बताता है। इससे उत्पाद की ब्रांडिंग और बाजार पहुंच मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
किसानों का पंजीयन अंतिम चरण में
अभियान के पहले चरण में जिले के गांवों में सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसमें सीताफल के पौधों की संख्या दर्ज की जा रही है। किसानों की निजी जमीन पर लगे पौधों को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। खेतों, बाड़ियों और मेड़ों पर लगे पौधों की जानकारी जुटाई जा रही है।
इसके अलावा राजस्व भूमि, सड़क किनारे और वन भूमि के पौधों की गणना भी हो रही है। इस पूरी प्रक्रिया से जिले में सीताफल की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। प्रशासन के अनुसार, सही आंकड़े आगे की योजनाएं बनाने में मदद करेंगे।
कलेक्टर नेहा मीना ने किसानों से सर्वेक्षण में सहयोग की अपील की है। जिन किसानों का अभी तक पंजीयन नहीं हुआ है, वे जल्द संपर्क कर सकते हैं। अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक उत्पादक किसानों को जोड़ना है। इससे भविष्य में बाजार और प्रसंस्करण की योजनाएं तैयार करने में सुविधा होगी।
उत्पादन से निर्यात तक वैल्यू चेन
जिला प्रशासन केवल सीताफल बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहता। इसके लिए पूरी वैल्यू चेन (Value Chain) विकसित करने की योजना है। इसमें उत्पादन से लेकर संग्रहण और ग्रेडिंग तक की व्यवस्था शामिल होगी।
फलों की ग्रेडिंग से आकार और गुणवत्ता के अनुसार अलग-अलग श्रेणियां बन सकेंगी। पैकेजिंग से उत्पाद को सुरक्षित बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन से सीताफल आधारित नए उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे सिवनी जंबो सीताफल की अलग बाजार पहचान मजबूत हो सकती है। प्रशासन किसानों को बड़े खरीदारों और नए बाजारों से जोड़ना चाहता है।
जिला स्तरीय कार्यशाला होगी आयोजित
अभियान के अगले चरण में जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें सीताफल उत्पादक किसान और विक्रेता शामिल होंगे। किसान उत्पादक संगठन यानी FPO (Farmer Producer Organization) के सदस्य भी भाग लेंगे।
खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी जोड़ा जाएगा। नाबार्ड (NABARD) और एपीडा (APEDA) जैसी संस्थाओं को आमंत्रित करने की योजना है। विशेषज्ञों की मदद से बाजार और निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा होगी।
कार्यशाला में सीताफल की मार्केटिंग और प्रसंस्करण पर जानकारी दी जाएगी। किसानों को पैकेजिंग और ब्रांडिंग के तरीकों से अवगत कराया जाएगा। वित्तीय सहायता और प्रसंस्करण इकाइयों की संभावनाएं भी समझाई जाएंगी।
इसके अलावा बड़े खरीदारों और निर्यात बाजारों से जुड़ने के अवसर बताए जाएंगे। प्रशासन का लक्ष्य किसानों, वित्तीय संस्थाओं और कारोबारियों के बीच समन्वय बढ़ाना है। इससे सीताफल आधारित स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है।
बड़े बाजारों तक पहुंच की उम्मीद
सिवनी का जंबो सीताफल पहले से कई शहरों में पहुंचता है। अक्टूबर 2024 की एक रिपोर्ट में इसकी मांग का उल्लेख हुआ था। इसमें मध्य प्रदेश के अलावा दिल्ली, आगरा और नागपुर जैसे शहर शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, छपारा क्षेत्र के खैरमटाकोल क्लस्टर में इसका उत्पादन होता है।
सीताफल की खासियतों में इसका बड़ा आकार और मीठा स्वाद शामिल हैं। वर्ष 2024 की रिपोर्ट में एक फल का वजन 600 से 700 ग्राम तक बताया गया था। हालांकि, यह आंकड़ा पुराने समाचार का है। वर्तमान उत्पादन और बाजार की स्थिति नए सर्वेक्षण से स्पष्ट होगी।
जिला प्रशासन अब इस उत्पाद को बड़े बाजारों से जोड़ना चाहता है। राष्ट्रीय बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी ध्यान रहेगा। इसके लिए गुणवत्ता, पैकेजिंग और आपूर्ति व्यवस्था मजबूत करना जरूरी होगा।
सीताफल से बढ़ सकती है आय
अभियान का प्रमुख उद्देश्य किसानों को बेहतर मूल्य दिलाना है। इसके लिए उत्पादन से लेकर बिक्री तक की व्यवस्था विकसित की जाएगी। सही ग्रेडिंग और पैकेजिंग से बाजार की जरूरत पूरी करने में मदद मिल सकती है।
प्रसंस्करण से सीताफल के गूदे और अन्य उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर कारोबार के नए अवसर बन सकते हैं। महिला समूहों और छोटे उद्यमियों के लिए भी संभावनाएं खुल सकती हैं।
मई 2026 की एक रिपोर्ट में सिवनी में सीताफल प्रसंस्करण का उल्लेख हुआ था। इसमें महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी बताई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जिले में सीताफल पल्प के संरक्षण की व्यवस्था भी है।
हालांकि, नए अभियान से किसानों की आय कितनी बढ़ेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसका आकलन बाजार, उत्पादन और बिक्री के आंकड़ों से होगा। निर्यात शुरू होने के लिए जरूरी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होंगी।
जीआई टैग से क्या फायदा होगा?
जीआई टैग किसी क्षेत्र विशेष के उत्पाद की पहचान को सुरक्षित करता है। इससे उस उत्पाद की अलग पहचान बनाने में मदद मिल सकती है। सिवनी जंबो सीताफल को इसी पहचान के आधार पर बाजार में बढ़ावा दिया जा रहा है।
टैग मिलने से ब्रांडिंग और प्रचार के अवसर बढ़ सकते हैं। इससे खरीदारों के बीच उत्पाद की पहचान मजबूत हो सकती है। हालांकि, जीआई टैग अपने आप अधिक कीमत या निर्यात की गारंटी नहीं देता।
किसानों को वास्तविक लाभ बेहतर बाजार व्यवस्था और मांग पर निर्भर करेगा। इसके लिए गुणवत्ता, आपूर्ति और सही कीमत पर ध्यान देना जरूरी है। ‘सीताफल से समृद्धि’ अभियान इसी दिशा में काम कर रहा है।
किसानों के लिए आगे की राह
अभियान में पंजीयन कराने वाले किसानों का आंकड़ा तैयार किया जाएगा। इससे सीताफल उत्पादन की व्यापक योजना बनाने में मदद मिलेगी। प्रशासन उत्पादकों को बाजार और प्रसंस्करण व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी कर रहा है।
जिन किसानों का सर्वेक्षण या पंजीयन नहीं हुआ है, उन्हें जल्द संपर्क करना चाहिए। जिला प्रशासन ने जानकारी के लिए दो मोबाइल नंबर जारी किए हैं। किसान 9098431856 और 9713448994 पर संपर्क कर सकते हैं।
आने वाले समय में कार्यशाला और बाजार संबंधी गतिविधियां महत्वपूर्ण रहेंगी। इनके जरिए सीताफल की बिक्री और प्रसंस्करण को नई दिशा मिल सकती है। किसानों को इसका लाभ कितना मिलेगा, यह आगे की प्रगति से स्पष्ट होगा।
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