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जल्द सस्ता होगा प्याज, थोक भाव में 9% गिरावट; सरकार की ओर से आया बड़ा बयान

newz@gmail.com | Sep 16, 2026, 21:09 IST

प्याज के थोक भाव में नौ दिन में 9% गिरावट आई है। उपभोक्ता मामले सचिव निधि खरे ने कहा खुदरा कीमतें भी जल्द कम होंगी। सरकार 35 रुपए किलो प्याज बेच रही है और बफर स्टॉक से सप्लाई बढ़ा रही है।

प्याज

प्याज की बढ़ती कीमतों से परेशान लोगों को जल्द राहत मिल सकती है। उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे ने बुधवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा पिछले नौ दिनों में मंडियों में प्याज के थोक भाव में 9% गिरावट आई है। उनका कहना है कि इसका असर आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में भी दिखेगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव 53.92 रुपए प्रति किलो रहा। यह कीमत एक महीने पहले से 48% ज्यादा है। पिछले साल की समान अवधि से यह 94% अधिक है। ऐसे में थोक भाव में आई गिरावट राहत की उम्मीद जगाती है।

देश में प्याज की कमी नहीं: सचिव

निधि खरे ने उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआई (PHD Chamber of Commerce and Industry) के एक कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में प्याज की कीमतों पर जानकारी दी। उनका कहना था देश में प्याज की कोई कमी नहीं है। सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि प्याज सही दाम पर उपभोक्ताओं तक पहुंचे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसका असर खुदरा कीमतों पर भी दिखेगा। उनके मुताबिक आने वाले दिनों में खुदरा भाव और कम हो सकते हैं। सचिव का यह बयान बढ़ती महंगाई के बीच अहम माना जा रहा है।

सरकार बेच रही 35 रुपए किलो प्याज

बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने पिछले महीने कदम उठाया था। केंद्र सरकार ने 35 रुपए प्रति किलो की दर से प्याज बेचना शुरू किया। यह बाजार भाव से कम कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए एनसीसीएफ (National Cooperative Consumers Federation) के केंद्र काम कर रहे हैं। नाफेड (National Agricultural Cooperative Marketing Federation) और केंद्रीय भंडार के आउटलेट भी शामिल हैं। मोबाइल वैन के जरिए भी लोगों तक प्याज पहुंचाया जा रहा है। अब तक देश के करीब 48 शहरों में यह सुविधा पहुंच चुकी है। इसके लिए सड़क और अन्य परिवहन माध्यमों का इस्तेमाल हो रहा है।

रेल से भी पहुंच रहा प्याज

सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारना शुरू किया है। इसका मकसद उपलब्धता बनाए रखना और मौसमी कीमतें काबू में रखना है। इसके लिए रेलवे रैक और सड़क परिवहन दोनों का इस्तेमाल हो रहा है। रेल के जरिए प्याज भेजने की योजना को कांदा एक्सप्रेस नाम दिया गया है। मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत रखा गया स्टॉक 24 अगस्त से बेचा जा रहा है। यह काम नाफेड और एनसीसीएफ के जरिए हो रहा है। सरकार के मुताबिक इस कदम से बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ी है। इससे कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिली है।

1.21 लाख टन का भंडार

केंद्र सरकार ने चालू वर्ष के लिए बड़ा बफर स्टॉक तैयार रखा है। यह भंडार करीब 1.21 लाख टन प्याज का है। जरूरत पड़ने पर इसी स्टॉक से बाजार में सप्लाई बढ़ाई जाती है। इससे कीमतों में अचानक उछाल को रोकने में मदद मिलती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में प्याज उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है। पिछले साल 2024-25 में यह उत्पादन 307.67 लाख टन था। यानी उत्पादन में करीब 0.30 लाख टन की मामूली कमी आई है। यह कमी बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही।

अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ते हैं दाम

प्याज की कीमतों में अगस्त से सितंबर के बीच अक्सर तेजी आती है। इस दौरान त्योहारों की मांग बढ़ने से असर पड़ता है। मौसम में बदलाव और बारिश भी सप्लाई को प्रभावित करते हैं। परिवहन व्यवस्था में बदलाव भी कीमतों पर असर डालता है। इन्हीं वजहों से हर साल इस मौसम में प्याज महंगा होता है। हालांकि इस बार थोक भाव में आई गिरावट राहत का संकेत है। आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में भी नरमी की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार की कोशिशों का असर जल्द दिखने की संभावना है।

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