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IIWBR ने शुरू की गेहूं-जौ बीज की बुकिंग, ये है रजिस्ट्रेशन प्रोसेस, जरूरी किस्में और बीज पाने का तरीका

newz@gmail.com | Sep 17, 2026, 15:12 IST

भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR) ने 2026 के लिए गेहूं-जौ के उन्नत बीजों की ऑनलाइन बुकिंग शुरू की। किसान 15 सितंबर से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, हर किसान अधिकतम 10 किलो बीज बुक कर सकेगा। जानें रजिस्ट्रेशन प्रोसेस, जरूरी किस्में और बीज पाने का तरीका

बीजों की ऑनलाइन बुकिंग

रबी सीजन शुरू होने से पहले किसानों के लिए राहत भरी खबर आई है। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान यानी IIWBR (Indian Institute of Wheat and Barley Research) ने कदम उठाया है। संस्थान ने 2026 के लिए उन्नत किस्में बुकिंग के लिए जारी की हैं। किसान अब अपनी पसंद के प्रमाणित बीज सीधे संस्थान से बुक कर सकते हैं।

ऑनलाइन बुकिंग कैसे करें

संस्थान की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया है। यह प्रक्रिया 15 सितंबर 2026 से शुरू हुई है। किसान संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ही आवेदन कर सकते हैं। बुकिंग के लिए किसी दूसरी वेबसाइट या माध्यम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। संस्थान ने साफ कहा है कि सिर्फ अधिकृत पोर्टल पर ही आवेदन मान्य होगा। फर्जी वेबसाइटों से बचने की सलाह भी किसानों को दी गई है। कई बार नकली पोर्टल किसानों को गुमराह कर सकते हैं। इसलिए बुकिंग से पहले वेबसाइट की पुष्टि जरूर करें। सही जानकारी न होने पर बीज मिलने में दिक्कत हो सकती है।

बीज की कौन सी किस्में मिलेंगी

IIWBR की तरफ से गेहूं और जौ की कई उन्नत किस्में दी जा रही हैं। गेहूं की किस्मों में DBW 187, DBW 222 और DBW 327 शामिल हैं। इसके अलावा DBW 377 और DBW 303 भी उपलब्ध हैं। जौ में बिना छिलके वाली दो किस्में मिलेंगी। इनके नाम DWRB 223 और DWRB 244 हैं। ये सभी किस्में शोध के बाद तैयार की गई हैं। ये किस्में बेहतर उत्पादन क्षमता के लिए जानी जाती हैं। इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी मानी जाती है। अलग-अलग कृषि जलवायु में भी ये अच्छा प्रदर्शन करती हैं। यही वजह है कि किसानों के बीच इनकी मांग बढ़ रही है।

रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी बातें

ऑनलाइन आवेदन के दौरान किसानों को कुछ जरूरी जानकारी देनी होगी। इसमें किसान का पूरा नाम और पता शामिल है। इसके अलावा राज्य, जिला और मोबाइल नंबर भी भरना होगा। आधार संख्या देना भी जरूरी रहेगा। संस्थान ने साफ किया है कि सही जानकारी भरना बेहद जरूरी है। बीज आवंटन की पूरी प्रक्रिया मोबाइल नंबर पर ही आधारित रहेगी। अगर जानकारी गलत भरी गई, तो सूचना मिलने में दिक्कत आ सकती है। इसलिए फॉर्म भरते समय सावधानी बरतना जरूरी है।

कितना बीज मिलेगा

IIWBR के दिशा निर्देशों के अनुसार सीमा तय की गई है। हर किसान अपने क्षेत्र की अनुशंसित किस्मों में से बीज चुन सकता है। एक किसान अधिकतम 10 किलोग्राम बीज ही बुक कर सकेगा। बीजों का आवंटन उपलब्धता के आधार पर तय होगा। इसका मतलब है कि सभी किसानों को बराबर मौका मिलेगा। ज्यादा मांग वाली किस्मों में जल्दी बुकिंग फायदेमंद हो सकती है। इसलिए किसानों को समय पर आवेदन करने की सलाह दी गई है। देरी होने पर पसंदीदा किस्म न मिलने का खतरा रहता है।

चयन और वितरण प्रक्रिया

ऑनलाइन आवेदन मिलने के बाद किसानों का चयन तय प्रक्रिया से होगा। चयनित किसानों को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस भेजा जाएगा। मैसेज में बीज लेने की पूरी प्रक्रिया बताई जाएगी। इसमें बीज मिलने की जगह की जानकारी भी शामिल होगी। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मोबाइल नंबर हमेशा चालू रखें। एसएमएस मिलने के बाद तय समय पर ही बीज लेने जाना होगा। देर करने पर बीज किसी दूसरे किसान को भी मिल सकता है। इसलिए सूचना मिलते ही जरूरी कदम उठाना बेहतर रहेगा।

क्यों जरूरी हैं उन्नत बीज

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि प्रमाणित बीजों का बड़ा फायदा होता है। अच्छी क्वालिटी के बीज इस्तेमाल करने से पैदावार बढ़ने की संभावना रहती है। दानों की गुणवत्ता में भी सुधार देखा जाता है। साथ ही फसल में रोग लगने का खतरा भी कम होता है। रबी सीजन शुरू होने से पहले ऐसे बीजों का समय पर मिलना अहम है। बुवाई से ठीक पहले बीज मिलने से किसानों की तैयारी आसान हो जाती है। इससे उत्पादन पर भी सीधा असर पड़ सकता है। यही वजह है कि संस्थान हर साल यह सुविधा देता है।

किसानों के लिए यह मौका फायदेमंद साबित हो सकता है। समय रहते रजिस्ट्रेशन करने से मनचाही किस्म मिलने के आसार बढ़ जाते हैं। संस्थान ने सभी किसानों से जल्द आवेदन करने की अपील की है। इससे बुवाई के समय बीज की कमी नहीं होगी।

छोटे और मझोले किसानों के लिए यह योजना खास तौर पर मददगार है। प्रमाणित बीज महंगे बाजार से खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। सरकारी और शोध संस्थानों से सीधे बीज मिलने से भरोसा भी बढ़ता है। इस तरह की पहल किसानों की लागत भी कम कर सकती है।

हर साल रबी सीजन से पहले किसानों को अच्छे बीज की तलाश रहती है। बाजार में कई बार नकली या घटिया बीज भी बिक जाते हैं। ऐसे में सरकारी संस्थान से मिलने वाला बीज ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है। इससे फसल को नुकसान होने का खतरा भी कम रहता है।

IIWBR की यह पहल किसानों को सीधा फायदा पहुंचाने वाली मानी जा रही है। बिचौलियों के बिना बीज मिलने से किसानों का पैसा भी बचता है। संस्थान का मकसद ज्यादा से ज्यादा किसानों तक अच्छी किस्में पहुंचाना है। आने वाले समय में यह सुविधा और आसान बनाई जा सकती है।

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