मध्य प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है, यहां की अर्थव्यवस्था खेती पर टिकी है। राजनीति की दिशा भी यहीं से तय होती है। 1956 में पुनर्गठन के बाद अब तक 20 नेता मुख्यमंत्री बन चुके हैं। इनमें 8 मुख्यमंत्री सीधे किसान परिवार से आए हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी खेती से जुड़े हुए हैं।
67 में से 41 साल तक रहा किसान राज
राज्य बनने के बाद 16 बार विधानसभा का गठन हुआ है। इस दौरान कुछ नेता दो से चार बार तक मुख्यमंत्री रहे। कुल 67 साल में से 41 साल तक प्रदेश का मुखिया किसान रहा। इसी दौर में किसानों के लिए कई नई योजनाएं और नवाचार शुरू हुए। इनमें से कई योजनाओं को अब दूसरे राज्य भी अपना रहे हैं।
किसानों के सहारे पाया सत्ता का शिखर
अन्नदाता परिवार से निकले नेताओं ने प्रदेश की राजनीति बदल दी है। आज बजट से लेकर योजनाओं तक हर फैसले में किसान केंद्र में है। खेत से निकले ये नेता अब केंद्र की राजनीति में भी प्रभाव रखते हैं। इसी वजह से MP में किसान राजनीति का सबसे बड़ा आधार बन गया है।
खेत ही नहीं किसानों ने राजनीति को भी सींचा
जो किसान की सुध लेता है, वही आगे बढ़ता है। मध्य प्रदेश के किसानों ने न केवल खेतों को धनधान्य से भरा है। उन्होंने अपने बीच से ऐसे नेता भी दिए जो प्रदेश की पहचान बने। इसका सीधा संदेश है कि किसान को साथ रखने वाला ही सत्ता में टिकता है।
कौन-कौन रहे किसान मुख्यमंत्री
डॉ. मोहन यादव : वकील से खेती तक
वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन से आते हैं। वे वकालत और निजी व्यवसाय के साथ खेती भी कर रहे हैं। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी पूरी तरह कृषि से जुड़ी हुई है।
शिवराज सिंह चौहान : “किसान पुत्र” की ब्रांडिंग
शिवराज सिंह चौहान ने खुद को किसान पुत्र के रूप में स्थापित किया। किसानों के लिए उनकी योजनाएं इतनी लोकप्रिय हुईं कि पूरे देश में चर्चा हुई। आज वे केंद्र सरकार में कृषि मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं।
दिग्विजय सिंह : पानी और भूमि सुधार के पुरोधा

दिग्विजय सिंह राजपरिवार से थे, लेकिन परिवार खेती से जुड़ा रहा। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए भूमि सुधार और जल ग्रहण योजनाएं शुरू कीं।”पानी रोको” और “राजीव गांधी जल ग्रहण” जैसे कार्यक्रम आज भी याद किए जाते हैं।
कमलनाथ : 70 एकड़ के आधुनिक किसान

कमलनाथ छिंदवाड़ा में 70 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं। उनके खेतों में ड्रैगन फ्रूट, पपीता और अमरूद की बागवानी हो रही है। व्यवसाय के साथ-साथ खेती में उनकी गहरी रुचि आज भी बनी हुई है।
उमा भारती : बुंदेलखंड की किसान बेटी

टीकमगढ़ के किसान परिवार से आने वाली उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने अपने कार्यकाल में किसानों को पर्याप्त बिजली देने पर जोर दिया। वे आज भी किसानों की समस्याओं को बहुत नजदीक से समझती हैं।
सुंदरलाल पटवा : कर्ज माफी के जनक
सुंदरलाल पटवा का मुख्य व्यवसाय खेती था, जिसे अब परिवार संभाल रहा है। उन्होंने देश में पहली बार किसानों की कर्ज माफी योजना शुरू की थी। केंद्र में उर्वरक मंत्री रहते हुए उन्होंने खाद की उपलब्धता भी बढ़ाई।

अर्जुन सिंह : सीधी के किसान नेता

सीधी जिले से आने वाले अर्जुन सिंह का मुख्य पेशा कृषि था। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने किसानों की बुनियादी जरूरतों पर काम किया। उनके निधन के बाद बेटे अजय सिंह खेती और राजनीति दोनों संभाल रहे हैं।
कैलाश जोशी : देवास से निकले संघर्षशील नेता

देवास के कैलाश जोशी किसान परिवार से होकर मुख्यमंत्री बने। हालांकि उनका कार्यकाल छोटा था, लेकिन वे किसानों के बीच सक्रिय रहे। उन्हें BJP को मजबूत करने वाले नेताओं में गिना जाता है।
