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खेत से सत्ता तक: 67 साल में 41 साल किसान के हाथ रही एमपी की कमान

editor | Aug 14, 2026, 14:15 IST

मध्य प्रदेश के 20 मुख्यमंत्रियों में 8 नेता खेती-किसानी से जुड़े रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी कृषि से जुड़े हैं। नेताओं की खेती से जुड़ी जानकारी शपथ पत्रों में दर्ज है।

from farm power-farmers held 67 years

भोपाल.मध्य प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है, यहां की अर्थव्यवस्था खेती पर टिकी है। राजनीति की दिशा भी यहीं से तय होती है। 1956 में पुनर्गठन के बाद अब तक 20 नेता मुख्यमंत्री बन चुके हैं। इनमें 8 मुख्यमंत्री किसी न किसी तरह खेती किसानी से जुड़े रहे। वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी खेती से जुड़े हुए हैं। मध्य प्रदेश के वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्रियों के खेत और कृषि व्यवसाय की जानकारी विधानसभा की वेबसाइट और चुनाव आयोग को सौंपे गए शपथ पत्र में दर्ज है।

67 में से 41 साल तक रहा किसान राज

राज्य बनने के बाद 16 बार विधानसभा का गठन हुआ है। इस दौरान कुछ नेता दो से चार बार तक मुख्यमंत्री रहे। कुल 67 साल में से 41 साल तक प्रदेश के मुखिया किसान परिवार से सदस्य रहे हैं, या किसी दूसरे रूप में उनका जुड़ाव खेती से रहा है। इनके दौर में किसानों के लिए कई नई योजनाएं और नवाचार शुरू हुए। इनमें से कई योजनाओं को अब दूसरे राज्य भी अपना रहे हैं।

किसानों के सहारे पाया सत्ता का शिखर

अन्नदाता परिवार से निकले नेताओं ने प्रदेश की राजनीति बदल दी है। आज बजट से लेकर योजनाओं तक हर फैसले में किसान केंद्र में है। खेत से निकले ये नेता अब केंद्र की राजनीति में भी प्रभाव रखते हैं। इसी वजह से किसान मध्य प्रदेश में राजनीति का सबसे बड़ा आधार बन गया है।

खेत ही नहीं किसानों ने राजनीति को भी सींचा

जो किसान की सुध लेता है, वही आगे बढ़ता है। मध्य प्रदेश के किसानों ने केवल खेतों को ही फसलों से नहीं भरा है बल्कि ऐसे नेता भी दिए जो प्रदेश की पहचान बन गए। यानी किसानों को साधने वाला ही सत्ता में टिकता है।

कौन-कौन रहे किसान मुख्यमंत्री

डॉ. मोहन यादव : वकील से खेती तक

वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उज्जैन से आते हैं। वे वकालत और निजी व्यवसाय के साथ कृषि भूमि के भी मालिक हैं।
उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि भी पूरी तरह कृषि से जुड़ी हुई है। विधानसभा की वेबसाइट पर उनकी प्रोफाइल में भी इसका जिक्र है।

शिवराज सिंह चौहान : “किसान पुत्र” की ब्रांडिंग

शिवराज सिंह चौहान ने खुद को किसान पुत्र के रूप में स्थापित किया। किसानों के लिए उनकी योजनाएं इतनी लोकप्रिय हुईं कि पूरे देश में चर्चा हुई। आज वे केंद्र सरकार में कृषि मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं।

दिग्विजय सिंह : पानी और भूमि सुधार के पुरोधा

दिग्विजय सिंह राजपरिवार से हैं, लेकिन परिवार खेती से जुड़ा रहा। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए भूमि सुधार और जल ग्रहण योजनाएं शुरू कीं।”पानी रोको” और “राजीव गांधी जल ग्रहण” जैसे कार्यक्रम आज भी याद किए जाते हैं।

कमलनाथ : 70 एकड़ खेतों के मालिक

कमलनाथ के पास छिंदवाड़ा में 70 एकड़ के खेत हैं। उनके खेतों में ड्रैगन फ्रूट, पपीता और अमरूद जगवानी हो रही है। मूल रूप से कई व्यवसायों के मालिक कमलनाथ खुद खेती नहीं करते लेकिन खेती से जुड़े हैं।

उमा भारती : बुंदेलखंड की किसान बेटी

टीकमगढ़ के किसान परिवार से आने वाली उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने अपने कार्यकाल में किसानों को पर्याप्त बिजली देने पर जोर दिया। वे आज भी किसानों की समस्याओं को बहुत नजदीक से समझती हैं।

सुंदरलाल पटवा : कर्ज माफी के जनक

सुंदरलाल पटवा का मुख्य व्यवसाय खेती था, जिसे अब परिवार संभाल रहा है। उन्होंने देश में पहली बार किसानों की कर्ज माफी योजना शुरू की थी। केंद्र में उर्वरक मंत्री रहते हुए उन्होंने खाद की उपलब्धता पर जोर दिया था।

अर्जुन सिंह : सीधी के किसान नेता

सीधी से आने वाले अर्जुन सिंह का मुख्य पेशा कृषि था। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने किसानों की बुनियादी जरूरतों पर काम किया। उनके निधन के बाद बेटे अजय सिंह खेती और राजनीति दोनों संभाल रहे हैं।

कैलाश जोशी : देवास से निकले संघर्षशील नेता

देवास के कैलाश जोशी किसान परिवार से होकर मुख्यमंत्री बने। हालांकि उनका कार्यकाल छोटा था, लेकिन वे किसानों के बीच सक्रिय रहे। उन्हें BJP को मजबूत करने वाले नेताओं में गिना जाता है।

दिग्विजय सिंह राजपरिवार से थे, लेकिन परिवार खेती से जुड़ा रहा। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए भूमि सुधार और जल ग्रहण योजनाएं शुरू कीं।”पानी रोको” और “राजीव गांधी जल ग्रहण” जैसे कार्यक्रम आज भी याद किए जाते हैं।

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