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MP की इस मंडी में लगती है फूल-पत्ती, छाल, कांटे और जड़ों की बोली…कीमत जानकर चौंक जाएंगे आप

Suraj | Aug 14, 2026, 17:01 IST
MP की इस मंडी में लगती है फूल-पत्ती, छाल, कांटे और जड़ों की बोली

BHOPAL. सुबह का समय है। मंडी में ट्रैक्टर, पिकअप, बाइक और कुछेक बैलगाड़ी एक-एक करके पहुंच रहे हैं। कहीं बोरियों में बीज हैं, कहीं सूखी पत्तियां। किसी किसान ने पेड़ों की छाल उतारी है तो कोई कांटे लेकर आया है। कुछ के पास फूल हैं तो कुछ के पास जड़ें।

पहली नजर में यह नजारा किसी मंडी जैसा तो बिल्कुल नहीं लगता है। क्योंकि यहां ना तो गेहूं नहीं तौला जा रहा है और ना ही सोयाबीन की बोली नहीं लग रही। चना या मसूर भी कोई नहीं खरीद रहा है।

यह दृश्य मध्यप्रदेश के नीमच की हर्बल मंडी का है। यह देश की इकलौती ऐसी मंडी है, जहां फूल, पत्तियां, कांटे, छिलके, बीज, छाल और जड़ तक बिक जाती है। यहां किसान अपनी औषधीय फसल लेकर आते हैं और कई बार उनकी उपज की कीमत 500 रुपए से लेकर 2 लाख रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच जाती है।

यही वजह है कि नीमच की यह हर्बल मंडी अब केवल मध्यप्रदेश की नहीं रही। इसकी पहचान पूरे देश में बन चुकी है। गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान भी लंबी दूरी तय करके अपनी उपज लेकर यहीं पहुंचते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि यहां हर उपज को खरीदा जाता है और वो भी अच्छी कीमत पर।

किसानों को खरीदार ढूंढने की जरूरत नहीं

नीमच की हर्बल मंडी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां किसान को अपनी फसल का खरीदार ढूंढने की चिंता नहीं करनी पड़ती। अप्रैल के महीने तक मंडी में भरपूर आवक रहती है। फिर मई के अंतिम सप्ताह में आवक कुछ कम हो जाती है। फिर यही सिलसिला चलता रहता है। करीब करीब हर तरह की जड़ी-बूटी यहां बिक जाती है।

करीब 10.9 हेक्टेयर में फैले इस विशाल मंडी परिसर में 16 शेड बने हैं। यहीं 40 से 50 प्रकार के औषधीय पौधों की खुली बोली लगती है। मसाला फसलों की खरीदी के लिहाज से भी यह देश की सबसे बड़ी और इकलौती मंडी मानी जाती है।

पढ़िए क्या कहते हैं यहां आने वाले किसान

नीमच के किसान नीलेश पाटीदार इस बदलाव को अपनी खेती में महसूस कर रहे हैं। 45 एकड़ जमीन और 12 सदस्यीय परिवार के साथ वे पिछले दो-तीन साल से मसाला फसलों की खेती कर रहे हैं। वे बताते हैं कि इसबगोल, इरानी अकरकारा, चिरायता, आजवाइन, किनोवा, चियासीड और तुलसी बीज जैसी फसलों के नीमच मंडी में अच्छे दाम मिल जाते हैं। लहसुन की फसल भी अच्छा मुनाफा दे रही है।

रतलाम जिले के आजमपुर डोडिया गांव के किसान प्रहलाद सिंह कहते हैं, मैंने अश्वगंधा और अकरकारा बीज बेचे और उम्मीद से बेहतर दाम मिले थे। सबसे बड़ी बात यह रही कि बोली समय पर लगी, फसल आसानी से बिक गई और मुझे किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।

इसी गांव के किसान पंचम सिंह भी नियमित रूप से आजवाइन और अश्वगंधा लेकर आते हैं। वे बताते हैं कि अच्छी तुलाई, तत्काल भुगतान और बेहतर व्यवस्था के कारण अब दूसरे राज्यों के किसान भी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं। इसबगोल, अश्वगंधा, कलौंजी, सतावरी, सफेद मूसली, केसर, सर्पगंधा और अकलकारा जड़ जैसी फसलों की मांग पूरे साल बनी रहती है।

मंडी में हर साल बढ़ रही किसानों की उपज

इस हर्बल मंडी की बढ़ती लोकप्रियता का असर इसके आंकड़ों में भी दिखाई देता है। वर्ष 2024-25 में यहां 64.16 लाख क्विंटल कृषि उपज की आवक दर्ज हुई थी, जो 2025-26 में बढ़कर 72.40 लाख क्विंटल हो गई है। अधोसंरचना को मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय पादप बोर्ड ने साढ़े पांच करोड़ रुपये का अनुदान दिया है। अब यहां इलेक्ट्रॉनिक नाप-तौल की व्यवस्था है और उपज सीधे व्यापारियों के गोदाम तक पहुंचाई जाती है। करीब 1100 लाइसेंसधारी व्यापारी इस मंडी से जुड़े हैं और किसानों की सुविधा के लिए 150 से अधिक तुलावटी उपलब्ध रहते हैं।

देश में सबसे आगे है अपना मध्यप्रदेश

नीमच की मंडी की यह कहानी असल में मध्यप्रदेश की बदलती खेती की भी दास्तां है। आज प्रदेश औषधीय फसलों के उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य है। प्रदेश में 46 हजार 837 हेक्टेयर क्षेत्र में इसबगोल, सफेद मूसली, कोलियस सहित अनेक औषधीय फसलों की खेती हो रही है। वर्ष 2024-25 में यहां करीब सवा लाख मीट्रिक टन औषधीय फसलों का उत्पादन हुआ है।

देश में उत्पादित कुल औषधीय फसलों का 44 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्यप्रदेश से आता है। राज्य सरकार किसानों को 20 से 50 प्रतिशत तक अनुदान भी दे रही है।

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