बकरी पालन से जुड़े किसानों के लिए एक जरूरी सलाह सामने आई है। यह जानकारी 22 सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें पशु चारा एक्सपर्ट के हवाले से बात कही गई है। पशु चाहे छोटा हो या बड़ा, उत्पादन के लिए उसे अच्छी खुराक चाहिए। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और दूसरे मिनरल्स शामिल होने चाहिए।
यह बात खासतौर पर उन पशुओं के लिए अहम है जो दूध के साथ मांस उत्पादन भी करते हैं। बकरे-बकरी भी इसी श्रेणी में आते हैं। एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक बकरियों को संतुलित आहार मिले तो दूध की क्वालिटी सुधरती है। साथ ही मांस उत्पादन भी बढ़ता है। इतना ही नहीं, बकरियों की प्रजनन क्षमता भी मजबूत होती है।
किसान अक्सर करते हैं यह गलती
रिपोर्ट के मुताबिक बकरी पालक अक्सर एक ही तरह की गलती दोहराते हैं। जिस मौसम में जो हरा चारा ज्यादा मात्रा में मिलता है, उसे ही पशुओं को अधिक खिलाया जाता है। जबकि खुराक हमेशा संतुलित होनी चाहिए।
एक्सपर्ट की सलाह है कि दूध और मांस उत्पादन करने वाले पशुओं को खिलाते समय एक बात का ध्यान रखें। यह जानना जरूरी है कि जो चारा खिलाया जा रहा है, उसमें जरूरी पोषक तत्व हैं या नहीं। साथ ही यह भी देखना चाहिए कि किस चारे से किस पोषक तत्व की कमी पूरी होगी।
दलहनी चारा क्यों जरूरी
चारा एक्सपर्ट के मुताबिक हरे चारे की कम से कम एक फसल ऐसी होनी चाहिए जो एक बार लगाने के बाद कई साल तक उपज दे। नेपियर घास को बहुवर्षीय चारा कहा जाता है। बहुवर्षीय चारा वह होता है जो एक बार बोने के बाद लंबे समय तक उपज देता रहता है।
एक बार नेपियर घास लगाने के बाद करीब पांच साल तक हरा चारा लिया जा सकता है। हालांकि सिर्फ नेपियर घास ही खिलाते रहना सही तरीका नहीं है। एक्सपर्ट के मुताबिक अगर पशु को नेपियर घास दी जा रही है, तो उसके साथ दलहनी चारा भी जरूर खिलाना चाहिए। दलहनी यानी फलीदार फसल, जैसे लोबिया।
सितंबर में करें लोबिया की बुवाई
एक्सपर्ट के मुताबिक सितंबर में नेपियर घास के साथ लोबिया लगाया जा सकता है। हर मौसम के हिसाब से नेपियर के साथ अलग-अलग दलहनी चारा भी लगाया जा सकता है। यह तरीका सिर्फ सितंबर तक सीमित नहीं है।
ऐसा करने से पशु को नेपियर घास से कार्बोहाइड्रेट मिलता है। वहीं लोबिया से उसे प्रोटीन और दूसरे मिनरल्स मिलते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार इसी तरह की संतुलित खुराक से भेड़-बकरी में मांस की ग्रोथ होती है। साथ ही गाय-भैंस में दूध का उत्पादन भी बढ़ता है।
नेपियर घास के बारे में जानें
नेपियर घास एक लोकप्रिय चारा फसल है। यह एक बार बोने के बाद बार-बार कटाई देती है। इससे किसान को हर बार नई बुवाई का खर्च और मेहनत नहीं करनी पड़ती। यह पशुओं को ऊर्जा देने वाला मुख्य चारा माना जाता है। पर सिर्फ इसी पर निर्भर रहने से पशु को प्रोटीन और मिनरल्स की कमी हो सकती है। इसीलिए इसे दलहनी चारे के साथ मिलाकर खिलाने की सलाह दी जाती है।
लोबिया के बारे में जानें
लोबिया एक दलहनी यानी फलीदार फसल है। यह प्रोटीन से भरपूर मानी जाती है। पशु चारे के साथ-साथ इसका इस्तेमाल हरी खाद के रूप में भी होता है। यह जानकारी सामान्य है, रिपोर्ट में इसका विस्तार नहीं दिया गया है।
संतुलित आहार के फायदे
एक्सपर्ट के मुताबिक संतुलित आहार से कई फायदे मिलते हैं। पहला फायदा दूध की क्वालिटी बेहतर होना है। दूसरा फायदा मांस उत्पादन बढ़ना है। तीसरा फायदा बकरियों की प्रजनन क्षमता मजबूत होना है।
सर्दियों में अक्सर संतुलित हरे चारे की कमी होती है। इसी वजह से समय रहते नेपियर और लोबिया जैसी फसलें लगाना फायदेमंद हो सकता है। इससे सर्दियों में भी पशुओं को जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं।
किसान क्या ध्यान रखें
पहली बात, पशु को हमेशा एक जैसा चारा न खिलाएं। दूसरी बात, नेपियर घास के साथ दलहनी चारा जरूर मिलाएं। तीसरी बात, चारे की बुवाई मौसम के हिसाब से समय पर करें। चौथी बात, सर्दी से पहले ही चारे का इंतजाम कर लें, ताकि बाद में कमी न हो।
अपने इलाके की मिट्टी और पानी की उपलब्धता देखकर ही फसल चुनें। जरूरत हो तो नजदीकी पशुपालन विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से भी सलाह ली जा सकती है।
छोटे बकरी पालकों के लिए मौका
बकरी पालन छोटे और सीमित जमीन वाले किसानों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। ऐसे किसानों के लिए संतुलित चारे की जानकारी खास काम की है। सही चारा मिलने से बकरियों का स्वास्थ्य और उत्पादन दोनों बेहतर हो सकते हैं। इससे किसान की आमदनी में भी फर्क पड़ सकता है।
आगे क्या ध्यान रखना होगा
सर्दियों का मौसम नजदीक आ रहा है। ऐसे में अभी से चारे की तैयारी जरूरी है। सितंबर में लगाई गई लोबिया आने वाले महीनों में तैयार हो सकती है। किसान अपने इलाके के मौसम और पशुपालन विभाग की सलाह के हिसाब से आगे की बुवाई की योजना बनाएं।
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