किसान की बात,सूत्र के साथ

कमजोर बारिश के बीच सरकार ने रबी उत्पादन लक्ष्य 17.77 करोड़ टन तय किया, किसानों की चिंता बढ़ी

newz@gmail.com | Sep 25, 2026, 12:57 IST

केंद्र सरकार ने रबी सीजन 2026-27 के लिए 17.77 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। गेहूं का लक्ष्य 12.10 करोड़ टन रखा गया है। सितंबर में बारिश सामान्य से 21 प्रतिशत कम रहने से किसानों की चिंता बढ़ी है।

रबी सीजन

केंद्र सरकार ने रबी सीजन 2026-27 का खाद्यान्न लक्ष्य तय कर दिया है। इस बार कुल 17.77 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। यह आंकड़ा पिछले हफ्ते कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट में सामने आया। रबी बुवाई शुरू होने से ठीक पहले यह लक्ष्य जारी किया गया है। लेकिन लक्ष्य के साथ ही किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। वजह है सितंबर महीने में हुई कमजोर बारिश।

गेहूं और दलहन पर जोर

रबी सीजन की सबसे बड़ी फसल गेहूं है। इस बार गेहूं का लक्ष्य 12.10 करोड़ टन रखा गया है। गेहूं का उत्पादन खाद्य सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी माना जाता है। सरकारी खरीद और महंगाई नियंत्रण भी इसी पर निर्भर करते हैं। हर साल सरकार गेहूं की बड़ी खरीद एमएसपी (Minimum Support Price) पर करती है।

यह खरीद गोदामों और राशन दुकानों तक अनाज पहुंचाने में मदद करती है। इसलिए यह लक्ष्य हासिल करना सरकार के लिए अहम है। दलहन फसलों का लक्ष्य 1.72 करोड़ टन रखा गया है। इसमें अकेले चना 1.233 करोड़ टन उत्पादन देगा। मसूर का लक्ष्य 21 लाख टन रखा गया है। भारत को अभी भी बड़ी मात्रा में दाल आयात करनी पड़ती है। इसलिए दलहन में आत्मनिर्भरता सरकार की पुरानी प्राथमिकता रही है।

मोटे अनाज और तिलहन लक्ष्य

पोषक अनाज यानी मोटे अनाज का लक्ष्य 2.23 करोड़ टन रखा गया है। इसमें जौ का लक्ष्य 24.2 लाख टन है। ज्वार का लक्ष्य 31.9 लाख टन तय किया गया है। तिलहन फसलों में सरसों का लक्ष्य सबसे बड़ा है। सरसों का लक्ष्य 1.43 करोड़ टन रखा गया है। यह खाद्य तेल आयात घटाने में मदद करेगा। इसके अलावा रबी चावल का लक्ष्य 1.672 करोड़ टन है। मक्के का लक्ष्य 1.669 करोड़ टन रखा गया है। ये सभी आंकड़े रबी बुवाई से ठीक पहले सामने आए हैं।

देशभर के किसान अभी अपनी बुवाई योजना बना रहे हैं। ऐसे लक्ष्य राज्यों को भी दिशा देने का काम करते हैं। राज्य इसी आधार पर बीज, उर्वरक और सिंचाई संसाधन तय करते हैं। हर राज्य को अपने हिस्से का उत्पादन लक्ष्य भी बांटा जाता है। इससे राज्य सरकारें अपने संसाधनों की योजना पहले से बना पाती हैं। मकसद है तय उत्पादन स्तर हासिल करना।

बारिश की कमी से चिंता

लेकिन इस बार लक्ष्य के साथ मौसम की चुनौती भी सामने है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सितंबर में देशभर में बारिश सामान्य से 21 प्रतिशत कम रही। पंजाब में बारिश की कमी करीब 56 प्रतिशत दर्ज हुई। हरियाणा में यह कमी करीब 42 प्रतिशत तक बताई गई है। ये दोनों राज्य गेहूं उत्पादन में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक अल नीनो (El Nino) प्रभाव मजबूत होने की आशंका है। इससे आने वाले हफ्तों में मिट्टी की नमी घट सकती है। तापमान में बदलाव भी रबी बुवाई को प्रभावित कर सकता है। अक्टूबर-नवंबर की बुवाई के लिए खेतों में नमी जरूरी होती है। नमी की कमी उत्पादन लक्ष्य के लिए रुकावट बन सकती है। इसलिए मौसम पर करीबी नजर रखने की सलाह दी जा रही है।

किसानों के लिए क्या मायने

किसानों के लिहाज से यह लक्ष्य एक अहम संकेत है। यह आने वाले महीनों की बुवाई योजना तय करने में मदद करेगा। बीज और उर्वरक की जरूरत का अंदाजा भी इससे मिलेगा। संभावित एमएसपी नीति को समझने में भी यह मददगार है। पंजाब और हरियाणा के किसानों को खास सतर्कता बरतनी होगी। बारिश की कमी को देखते हुए सिंचाई के वैकल्पिक इंतजाम जरूरी हैं। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के किसानों पर भी असर पड़ सकता है। एमएसपी और मंडी भाव सीधे उत्पादन के आंकड़ों से जुड़े रहते हैं।

बीज-खाद कारोबार पर असर

बीज, उर्वरक और कृषि यंत्र कारोबार के लिए भी यह आंकड़ा अहम है। गेहूं और सरसों के लक्ष्य से बीज की मांग बढ़ सकती है। डीएपी और यूरिया जैसी खादों की मांग में भी तेजी संभव है। कारोबारियों को समय रहते स्टॉक तैयार रखने की जरूरत होगी। अगर बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो असर बढ़ेगा। ऐसे में सिंचाई उपकरण और ड्रिप-स्प्रिंकलर सिस्टम की मांग बढ़ सकती है। जल-संरक्षण तकनीकों से जुड़े कारोबार के लिए भी यह सीजन अवसर ला सकता है। ग्रामीण बाजार में इन उपकरणों की बिक्री आने वाले हफ्तों में बढ़ सकती है।

कुल मिलाकर सरकार का 17.77 करोड़ टन का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है। लेकिन इसे हासिल करना बारिश और मौसम पर काफी हद तक निर्भर करेगा। आने वाले हफ्तों की बारिश ही अहम भूमिका निभाएगी। इसी से तय होगा कि बुवाई समय पर हो पाती है या नहीं।

किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में बुवाई न करें। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र (Krishi Vigyan Kendra) और मौसम विभाग की सलाह जरूर लें। मिट्टी में नमी की सही जांच के बाद ही बुवाई शुरू करें। समय पर सही फैसला ही अच्छी पैदावार सुनिश्चित कर सकता है।

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