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चीनी MSP पर बोले गडकरी: सरकार दाम तय नहीं कर सकती, कीमत बाजार तय करेगा

newz@gmail.com | Sep 23, 2026, 16:48 IST

नितिन गडकरी ने कहा, सरकार चीनी और कृषि उत्पादों के दाम खुद तय नहीं कर सकती। मक्के से इथेनॉल बनाने से यूपी-बिहार के किसानों को 45 हजार करोड़ रुपए मिले हैं। उन्होंने किसानों को इथेनॉल और बायोमास अपनाने की सलाह दी।

चीनी एमएसपी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने चीनी की कीमत को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि सरकार खेती की उपज के दाम खुद तय नहीं कर सकती। यह बयान चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) (Minimum Selling Price) बढ़ाने की मांग पर आया। गडकरी यह बात नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) (National Federation of Cooperative Sugar Factories) के कार्यक्रम में बोले। उन्होंने किसानों को इथेनॉल और बायोमास जैसे विकल्पों से जोड़ने की सलाह भी दी।

गडकरी ने बताया कि आज पूरी दुनिया एक ग्लोबल इकॉनमी से जुड़ी है। ऐसे में चीनी जैसे कृषि उत्पादों की कीमत बाजार से तय होती है। यह मांग और आपूर्ति दोनों पर निर्भर करती है। कोई भी सरकार चाहकर भी इन दामों को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकती। गडकरी ने कहा, “अब हम ग्लोबल इकॉनमी में हैं।” उन्होंने आगे कहा, “कोई सरकार उपज के दाम तय नहीं कर सकती।” उनका यह बयान चीनी उद्योग और किसान संगठनों के लिए अहम है।

सरकार क्यों बेबस है

गडकरी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई और डिमांड का सीधा असर कीमतों पर पड़ता है। अगर किसी देश में उत्पादन ज्यादा होता है तो वैश्विक दाम गिर जाते हैं। इसका असर भारत जैसे बड़े उत्पादक देश पर भी पड़ता है। गडकरी ने कहा कि सरकार नीतियां बना सकती है। लेकिन बाजार के दामों को पूरी तरह नहीं रोक सकती। इसी वजह से उन्होंने किसानों को नए रास्ते तलाशने की सलाह दी। चीनी मिलों को भी अतिरिक्त आमदनी के विकल्प खोजने चाहिए।

ब्राजील बनाम भारत की लागत

गडकरी ने चीनी उत्पादन की लागत में भारत और ब्राजील का फर्क भी समझाया। उन्होंने बताया कि ब्राजील में बड़े पैमाने पर मशीनी खेती होती है। इस वजह से वहां उत्पादन लागत भारत से काफी कम है। गडकरी के मुताबिक ब्राजील में चीनी बनाने की लागत करीब 23 रुपए किलो है। वहीं भारत में यह लागत 33 से 34 रुपए किलो के करीब है। जब ब्राजील में चीनी ज्यादा बनती है तो वैश्विक दाम गिर जाते हैं। इसका सीधा दबाव भारतीय बाजार पर भी पड़ता है।

किसानों के सामने असली मुश्किल

गडकरी ने माना कि कई किसानों के लिए आज खेती फायदे का सौदा नहीं रह गई है। उनके मुताबिक सिर्फ फसल की कीमत बढ़ाने से समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी। किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए नए और टिकाऊ रास्ते खोजने होंगे। इसीलिए उन्होंने खेती और चीनी उद्योग में इनोवेशन पर जोर दिया। गडकरी ने कहा कि चीनी मिलों को सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बायोमास, कृषि अवशेष और जैविक खाद जैसे प्रोडक्ट भी बड़ा मौका बन सकते हैं। इनसे किसानों और मिलों दोनों को अतिरिक्त कमाई मिल सकती है।

इथेनॉल बनेगा नई ताकत

गडकरी ने इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ाने की जोरदार वकालत की। उन्होंने बताया कि दुनिया के 19 देशों में इथेनॉल का इस्तेमाल हो रहा है। भारत में भी इसका उपयोग लगातार बढ़ रहा है। उनके मुताबिक इथेनॉल किसानों की आमदनी बढ़ाने का बड़ा जरिया बन सकता है। यह गन्ने और मक्के जैसी फसलों से बनने वाला जैव ईंधन है। सरकार पहले से पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति पर काम कर रही है।

फ्लेक्स-फ्यूल कार का जिक्र

गडकरी ने एक दिलचस्प जानकारी भी साझा की। उन्हें अक्टूबर में टोयोटा की खास इनोवा कार के लॉन्च का न्योता मिला है। यह कार पूरी तरह फ्लेक्स-फ्यूल इंजन पर चलेगी। उनके मुताबिक यह गाड़ी 100 प्रतिशत इथेनॉल से चल सकेगी। खास बात यह है कि यह चलते समय बिजली भी बनाएगी। गडकरी का दावा है कि इससे ईंधन का खर्च पेट्रोल से काफी कम होगा। साथ ही इससे प्रदूषण घटाने में भी मदद मिलेगी।

यूपी-बिहार किसानों को फायदा

गडकरी ने मक्के से इथेनॉल बनाने की योजना को किसानों के लिए फायदेमंद बताया। इस फैसले से उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों को सीधा लाभ मिला। उन्होंने दावा किया कि किसानों को अब तक 45 हजार करोड़ रुपए मिले हैं। यह रकम मक्के की खेती और इथेनॉल उत्पादन से जुड़ी है। सरकार वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के लिए नीतियां बना रही है। उन्होंने उद्योग जगत से इन नीतियों का साथ देने की अपील की।

बदलाव का विरोध भी होगा

गडकरी ने साफ कहा कि हर बड़े बदलाव का असर पुराने कारोबार पर पड़ता है। पारंपरिक ईंधन कारोबार से जुड़े लोग इस बदलाव का विरोध कर सकते हैं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसानों का हित होना चाहिए। उनके मुताबिक बदलाव कई बार मुश्किल होता है, लेकिन जरूरी भी होता है। गडकरी ने इसे किसानों के भविष्य के लिए अहम कदम बताया।

आगे की राह क्या हो

गडकरी ने कहा कि खेती और चीनी उद्योग को टिकाऊ बनाना जरूरी है। इसके लिए किसानों को सिर्फ फसल बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें इथेनॉल, बायोमास और दूसरे वैल्यू एडेड उत्पादों से भी जोड़ना होगा। इससे किसानों की आमदनी में स्थायी बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही चीनी मिलों को भी नया मुनाफा मिल सकता है। गडकरी का यह बयान आगे की नीतियों की दिशा तय कर सकता है। किसान संगठन अब सरकार की अगली रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं।

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