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IIIT-दिल्ली-एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन ने तैयार किया SICKLE डेटासेट, अब AI लगाएगा फसल का अनुमान

newz@gmail.com | Sep 26, 2026, 22:15 IST

AI और सैटेलाइट तकनीक खेती की निगरानी का तरीका बदल सकती है। IIIT-दिल्ली और एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन ने SICKLE डेटासेट तैयार किया है। इससे AI फसल पहचान, बुवाई-कटाई समय और संभावित पैदावार का अनुमान लगाने में मदद कर सकता है।

एआई से खेती

खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सैटेलाइट तकनीक बड़ा बदलाव ला सकती है। अब AI सिस्टम बड़े कृषि क्षेत्रों की निगरानी कर सकेंगे। यह तकनीक यह पहचानने में मदद कर सकती है कि किसी खेत में कौन सी फसल उगाई गई है। इसके साथ फसल की स्थिति और विकास की जानकारी भी मिल सकेगी। भविष्य में AI की मदद से बुवाई और कटाई का समय पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा फसल की संभावित पैदावार का अनुमान भी लगाया जा सकेगा।

SICKLE डेटासेट क्या है

इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी दिल्ली (IIIT-Delhi) और एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन ने मिलकर नया डेटासेट तैयार किया है। इसका नाम SICKLE यानी Satellite Imagery for Cropping annotated with Key parameter Labels रखा गया है।

इस डेटासेट में सैटेलाइट तस्वीरों को खेतों से जुटाई गई वास्तविक जानकारी से जोड़ा गया है। इससे AI मॉडल को खेती की बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिल सकती है। आमतौर पर सैटेलाइट तस्वीरों से खेतों में हरियाली की जानकारी मिलती है। SICKLE के जरिए फसल से जुड़ी ज्यादा गहराई वाली जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया है।

तीन सैटेलाइट का डेटा

SICKLE डेटासेट तैयार करने में Landsat-8, Sentinel-1 और Sentinel-2 सैटेलाइट का इस्तेमाल किया गया है। इन सैटेलाइट से मिली जानकारी के साथ खेतों में उगाई गई फसल और खेती के तरीकों को जोड़ा गया है।

डेटासेट में 388 कृषि प्लॉट से जुड़े करीब 2,370 सीजन आधारित सैंपल शामिल हैं। इसमें लगभग 2.09 लाख सैटेलाइट इमेज जोड़ी गई हैं। इसमें 3 मीटर, 10 मीटर और 30 मीटर रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरें शामिल हैं। इससे खेतों का अलग-अलग स्तर पर अध्ययन किया जा सकता है।

बुवाई और कटाई का अनुमान

इस डेटासेट की खास बात फसल के जीवन चक्र से जुड़ी जानकारी है। शोधकर्ताओं ने क्रॉप फेनोलॉजी (Crop Phenology) का अनुमान लगाने पर भी काम किया है। इसमें फसल की बुवाई, रोपाई और कटाई जैसी अवस्थाएं शामिल होती हैं।

AI मॉडल इन जानकारियों से सीख सकते हैं कि फसल समय के साथ कैसे बदलती है। इससे फसल की निगरानी ज्यादा सटीक हो सकती है। शोधकर्ताओं ने तीन प्रमुख क्षेत्रों में मशीन लर्निंग मॉडल का परीक्षण किया है। इसमें फसल पहचान, फसल विकास अवस्था और पैदावार अनुमान शामिल हैं।

बादलों में भी मिलेगी जानकारी

अलग-अलग सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल खेती की निगरानी को बेहतर बना सकता है। ऑप्टिकल सैटेलाइट बादलों के कारण प्रभावित हो सकते हैं। वहीं रडार आधारित तकनीक बादलों से कम प्रभावित होती है।

तीनों सैटेलाइट से मिलने वाले डेटा को जोड़ने से मौसम की चुनौती के बावजूद खेती की जानकारी जुटाई जा सकती है। इससे बड़े कृषि क्षेत्रों की निगरानी आसान हो सकती है।

किसानों को मिल सकता फायदा

AI आधारित कृषि तकनीक किसानों और नीति निर्माताओं के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। परंपरागत तरीके से बड़े क्षेत्रों का सर्वे करने में समय और संसाधन ज्यादा लगते हैं। सैटेलाइट और AI तकनीक इस काम को तेज कर सकती है।

सरकार बड़े स्तर पर फसल पैटर्न और उत्पादन की जानकारी जुटा सकती है। वैज्ञानिक भी फसलों में होने वाले बदलावों का अध्ययन कर सकेंगे। भविष्य में इस तकनीक से खेत स्तर पर क्रॉप मैपिंग और उत्पादन अनुमान वाली प्रणालियां विकसित हो सकती हैं।

कावेरी डेल्टा से जुटा डेटा

SICKLE डेटासेट तैयार करने के लिए तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा क्षेत्र के खेतों का इस्तेमाल किया गया। यह क्षेत्र धान उत्पादन के लिए जाना जाता है। इसमें चार जिलों की 21 प्रकार की फसलों की जानकारी शामिल की गई है। डेटासेट में जनवरी 2018 से मार्च 2021 तक का डेटा मौजूद है। इसमें 145 कृषि प्लॉट के 351 धान सैंपल भी शामिल हैं।

इन सैंपल में धान की किस्म, सीजन, विकास अवस्था और उत्पादन से जुड़ी जानकारी दर्ज है। हालांकि शोधकर्ताओं ने कुछ चुनौतियों का भी जिक्र किया है। इनमें खेतों से सीमित डेटा मिलना, किसानों की जानकारी में अनिश्चितता और छोटे खेतों की पहचान जैसी समस्याएं शामिल हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार SICKLE कृषि, रिमोट सेंसिंग और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में आगे के शोध के लिए उपयोगी हो सकता है।

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