महाराष्ट्र के कई जिलों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। बारिश न होने से किसानों की फसलें सूख रही हैं। कई किसान अपनी फसल पर मजबूरन ट्रैक्टर चला रहे हैं। बीड, छत्रपति संभाजीनगर समेत 20 जिलों में स्थिति गंभीर है। खेतों से जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे डराने वाली हैं।
सोयाबीन की फसल पर चला ट्रैक्टर
बीड जिले के सांडस चिंचोली इलाके में किसान मौली कदम रहते हैं। उनकी 3 एकड़ जमीन में सोयाबीन की फसल लगी थी। बारिश न होने से फसल में एक भी फली नहीं आई। 13 सितंबर को मौली कदम ने खेत पर ट्रैक्टर चला दिया। उन्होंने कहा, “बारिश नहीं होने से हमारी पूरी सोयाबीन की फसल सूख गई है।” उन्होंने आगे कहा, “अब फली आने की भी कोई उम्मीद नहीं बची है।”
छत्रपति संभाजीनगर जिले में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। पैठण तालुका के राहतगांव में किसान लक्ष्मण गोरे से मुलाकात हुई। वे अपने कपास के खेत में खड़े थे। वहीं उन्होंने कहा, “जून में थोड़ी बारिश हुई थी।” उन्होंने कहा, “उसी भरोसे हमने बुआई कर दी, लेकिन कुछ नहीं मिला।” लक्ष्मण के मुताबिक पीने के लिए भी पानी नहीं बचा है। उनका पूरा खेत अब घास-फूस से भर चुका है।
कपास-मूंग भी सूखे की चपेट में
लक्ष्मण कहते हैं, “मूंग चली गई, कपास चली गई, सोयाबीन भी चली गई।” वे आगे कहते हैं, “अब मजदूरी करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा।” लक्ष्मण के खेतों में अरहर, मूंग और कपास की फसलें भी सूखती दिखीं। फसलों की हालत देखकर अब उनका खेत में जाने का भी मन नहीं करता। छत्रपति संभाजीनगर जिले के एक और खेत में पशु चरते दिखे। पता चला कि यहां मूंग की बुवाई हुई थी। लेकिन एक महीने से बारिश न होने से फली ही नहीं बनी।
फसल पशुओं के हवाले

किसान ने बताया कि फसल अब बेकार हो चुकी है। इसे पशुओं के चारे के लिए छोड़ दिया गया है। पैठण तालुका के डावरवाड़ी गांव में किसान वसंत जाधव से भी बात हुई। उनके पास संतरे के कुछ पेड़ हैं। वसंत ने कहा, “इस साल संतरे के लिए पानी ही नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “संतरे पेड़ों से गिर रहे हैं।” उनका कुआं भी अब पूरी तरह सूख चुका है।
संतरे-सोयाबीन की फसल बर्बाद
पाचोद के किसान अंकुश नेमाने की 9 एकड़ सोयाबीन फसल पीली पड़ने लगी है। अंकुश ने कहा, “यह सोयाबीन अब खाने लायक भी नहीं बचेगी।” उन्होंने बताया, “इसे अब सीधे चारे में बदलना पड़ेगा।” पैठण के कपास किसानों से भी बातचीत हुई। एक युवा किसान ने लागत के बारे में बताया। एक एकड़ कपास की लागत 20 से 25 हजार रुपए आती है।
खेती की लागत, मदद की आस
उसने कहा, “सरकार जल्द सूखा घोषित करे।” उसने आगे कहा, “प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपए की मदद मिलनी चाहिए।” इस सीजन में 1 जून से 16 सितंबर तक बारिश का औसत देखा गया। मराठवाड़ा में यह औसत सिर्फ 67% रहा। यानी यहां सामान्य से 33% कम बारिश हुई है।
33% बारिश की कमी दर्ज

मराठवाड़ा में लातूर जिले में सबसे ज्यादा 49% कमी दर्ज हुई। परभणी जिले में भी 45% बारिश की कमी बताई गई है। कृषि विभाग (Department Of Agriculture) के संयुक्त निदेशक सुनील वानखेड़े ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, “बारिश के बीच 30 से 37 दिनों तक का अंतर रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “इतने लंबे अंतराल से फसलों पर बुरा असर पड़ा है।” उन्होंने बताया, “सोयाबीन, मक्का और कपास जैसी फसलें प्रभावित हुई हैं।”
20 जिलों में सूखे का खतरा
राज्य के 20 जिलों में सूखे जैसी स्थिति बन गई है। इनमें सिंधुदुर्ग, सांगली, सोलापुर, अहिल्यानगर और धाराशिव जिले शामिल हैं। लातूर, बीड, जालना, परभणी और हिंगोली भी इस सूची में हैं। नांदेड़, अकोला, वाशीम, अमरावती और यवतमाल भी प्रभावित हैं। वर्धा, नागपुर, चंद्रपुर, गढ़चिरौली और नंदुरबार में भी यही हाल है। इन 20 जिलों के 86 तालुकों में 30 दिन से बारिश नहीं हुई। इनमें उत्तर महाराष्ट्र के 31, पश्चिम महाराष्ट्र के 17 तालुके शामिल हैं। मराठवाड़ा के 16 और विदर्भ के 22 तालुके भी इसमें आते हैं।
सरकार का सर्वे और तैयारी
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कुछ दिन पहले अहम जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने फसल नुकसान के सर्वे का आदेश दिया है। राज्य में सूखे की स्थिति का सर्वे 5 अक्टूबर से शुरू होगा। हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। इसमें बारिश और फसल की स्थिति की समीक्षा की गई।
बैठक के बाद फडणवीस ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा, “हमने हर तालुके की स्थिति की जानकारी ली है।” उन्होंने आगे कहा, “कमी से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है।” उन्होंने कहा, “सूखे से निपटने के कदम भी उठाए जा रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा, “राज्य सरकार तैयार है।” उन्होंने जोड़ा, “किसानों को हर संभव मदद दी जाएगी।”
पानी के लिए टैंकर सहारा
जल आपूर्ति और स्वच्छता विभाग के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। मानसून के दौरान सितंबर के पहले हफ्ते में हालात गंभीर रहे। इस दौरान राज्य के 286 गांवों में पानी की किल्लत रही। 1182 घरों तक 307 टैंकरों से पीने का पानी पहुंचाया गया। अगर आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई तो हालात और बिगड़ सकते हैं। राज्य में सूखे का संकट और गहरा सकता है।
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