देश में कृषि और जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नई पहल शुरू हुई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (IWMI) ने मिलकर काम करने का फैसला किया है।
दोनों संस्थानों ने 24 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के NASC कॉम्प्लेक्स में वर्क प्लान पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य टिकाऊ जल भविष्य तैयार करना है। इसके तहत पानी के बेहतर उपयोग और कृषि उत्पादन बढ़ाने पर काम किया जाएगा। समझौते पर ICAR के सचिव और महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट तथा IWMI के महानिदेशक मार्क स्मिथ ने हस्ताक्षर किए।
पांच क्षेत्रों में होगा काम
ICAR और IWMI की साझेदारी पांच प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगी। पहला क्षेत्र जल उत्पादकता बढ़ाना है। इसमें कम पानी में बेहतर कृषि उत्पादन के तरीकों पर काम किया जाएगा। दूसरा क्षेत्र जल जोखिम और उससे निपटने की क्षमता बढ़ाना है। इसमें बदलते मौसम और पानी की कमी जैसी चुनौतियों पर ध्यान दिया जाएगा। तीसरा क्षेत्र सिंचाई व्यवस्था का आधुनिकीकरण है। इसमें नई तकनीक और बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाएगा।
पानी बचाने पर रहेगा जोर
खेती में पानी की बढ़ती जरूरत को देखते हुए जल प्रबंधन जरूरी हो गया है। इस साझेदारी के तहत पानी के बेहतर इस्तेमाल की तकनीकों पर शोध किया जाएगा। किसानों तक नई जानकारी पहुंचाने और खेत स्तर पर तकनीकों की जांच करने पर भी काम होगा। इससे सिंचाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल तकनीक का उपयोग
इस सहयोग में डिजिटल तकनीकों को भी शामिल किया गया है। डिजिटल माध्यमों से पानी की उपलब्धता, उपयोग और प्रबंधन से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। इन तकनीकों की मदद से कृषि क्षेत्र में बेहतर फैसले लेने में सहायता मिल सकती है। फील्ड स्तर पर इन तकनीकों का परीक्षण भी किया जाएगा।
गंदे पानी के दोबारा उपयोग पर काम
साझेदारी में अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत पानी को दोबारा उपयोग योग्य बनाने और जल चक्र को बेहतर करने की दिशा में काम होगा। इससे जल संसाधनों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। सर्कुलर वाटर इकोनॉमी यानी पानी के दोबारा उपयोग की व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा।
जल सुरक्षा और कृषि उत्पादन
इस पहल का लक्ष्य जल सुरक्षा के साथ कृषि उत्पादकता बढ़ाना है। कृषि क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनी हुई है। बेहतर जल प्रबंधन से किसानों को सिंचाई सुविधाओं का बेहतर लाभ मिल सकता है। साथ ही मौसम बदलाव के प्रभावों से निपटने में भी मदद मिल सकती है।
नीतियों को मिलेगा वैज्ञानिक आधार
ICAR और IWMI मिलकर शोध और नीति समर्थन के क्षेत्र में काम करेंगे। इससे जल और कृषि से जुड़ी योजनाओं को वैज्ञानिक जानकारी मिल सकेगी। दोनों संस्थान खेत स्तर पर किए गए प्रयोगों के आधार पर बेहतर समाधान तैयार करेंगे। इससे किसानों, नीति निर्माताओं और कृषि क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है।
संस्थागत क्षमता होगी मजबूत
साझेदारी में जल प्रबंधन से जुड़े संस्थानों को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए प्रशिक्षण, शोध और तकनीकी सहयोग बढ़ाया जाएगा। ICAR और IWMI का यह सहयोग भारत में टिकाऊ कृषि और जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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