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पर्पल लहसुन की खेती से लें अच्छी उपज: अक्टूबर-नवंबर में रोपाई, 120-135 दिन में फसल तैयार, जानें पूरा तरीका

newz@gmail.com | Sep 28, 2026, 18:20 IST

कृषि विभाग ने किसानों को भीमा पर्पल लहसुन की खेती की सलाह दी है। इसकी रोपाई अक्टूबर-नवंबर में होती है। फसल 120-135 दिन में तैयार होती है। सही दूरी, बीज और जल निकासी से बेहतर उत्पादन मिल सकता है।

पर्पल लहसून

लहसुन की खेती रबी मौसम में किसानों के लिए अहम फसल है। इसकी मांग बाजार में सालभर बनी रहती है। सही किस्म चुनने से उत्पादन और गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। कृषि विभाग ने भीमा पर्पल किस्म अपनाने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार यह किस्म बेहतर उत्पादन में मदद कर सकती है। इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी का विकल्प मिल सकता है। हालांकि वास्तविक आमदनी बाजार भाव और खेती लागत पर निर्भर करेगी।

भीमा पर्पल किस्म की खासियत

भीमा पर्पल आकर्षक बैंगनी छिलके वाली लहसुन किस्म है। इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR, Indian Council of Agricultural Research) से जुड़े संस्थान ने विकसित किया। आधिकारिक जानकारी में इसकी औसत उपज 6 से 7 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है। यह किस्म 120 से 135 दिन में पकती है। इसे कई राज्यों में रबी मौसम के लिए सुझाया गया है। इनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र शामिल हैं। कर्नाटक, हरियाणा, दिल्ली और आंध्र प्रदेश भी सूची में हैं।

अक्टूबर में ऐसे करें रोपाई

कृषि विभाग के अनुसार इसकी रोपाई अक्टूबर से नवंबर के बीच होती है। रोपाई से पहले खेत की अच्छी तैयारी जरूरी है। मिट्टी भुरभुरी और खेत साफ होना चाहिए। खेत में जल निकासी की व्यवस्था भी अच्छी रखें। पानी रुकने से फसल पर असर पड़ सकता है। इसलिए खेत का ढलान और निकास पहले जांचें। स्वस्थ और अच्छी गुणवत्ता वाली कलियों का चयन करें। कमजोर कलियों से पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।

पौधों की दूरी कितनी रखें

भीमा पर्पल की रोपाई में दूरी का खास ध्यान रखें। पौधों के बीच 15 सेंटीमीटर दूरी रखें। कतारों के बीच 10 सेंटीमीटर दूरी रखने की सलाह है। इससे पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। इससे खेत में निराई-गुड़ाई भी आसान रहती है। फसल की निगरानी और देखभाल में भी सुविधा होती है।

एक हेक्टेयर में कितना बीज

एक हेक्टेयर खेत के लिए 400 से 500 किलो बीज चाहिए। बीज के रूप में स्वस्थ कलियों का इस्तेमाल करना चाहिए। रोपण सामग्री साफ और अच्छी गुणवत्ता वाली होनी चाहिए। स्थानीय मौसम के अनुसार बीज की जरूरत बदल सकती है। इसलिए किसान स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से मात्रा जरूर जांचें।

फसल कब तैयार होगी

भीमा पर्पल की फसल करीब 120 से 135 दिन में तैयार होती है। अनुकूल मौसम में अवधि लगभग चार से साढ़े चार महीने रहती है। खुदाई का समय पौधों की अवस्था देखकर तय करना चाहिए। पत्तियां सूखने और पीली पड़ने लगें तो खुदाई करें। बहुत जल्दी खुदाई करने से कंद पूरी तरह विकसित नहीं होते। देर करने पर भी फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

सिंचाई और जल निकासी जरूरी

लहसुन की अच्छी फसल में सिंचाई का संतुलन जरूरी है। जरूरत के अनुसार खेत में नमी बनाए रखें। खेत में लंबे समय तक पानी जमा नहीं होना चाहिए। जल निकासी कमजोर होने पर जड़ों को नुकसान हो सकता है। सिंचाई की मात्रा मिट्टी और मौसम के अनुसार रखें। लगातार ज्यादा पानी देने से भी बचना चाहिए।

उपज और गुणवत्ता पर ध्यान

किस्म का चुनाव लहसुन की खेती में अहम भूमिका निभाता है। भीमा पर्पल की औसत उपज 6 से 7 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है। यह आंकड़ा आधिकारिक किस्म संबंधी जानकारी में दिया गया है। वास्तविक उपज खेत और मौसम पर निर्भर करेगी। मिट्टी, सिंचाई और पोषण भी उत्पादन बदल सकते हैं। कीट और रोग प्रबंधन भी समय पर करना जरूरी है। इसलिए केवल किस्म बदलने से उत्पादन की गारंटी नहीं होती।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

किसान अपने क्षेत्र की मिट्टी और मौसम जरूर जांचें। बीज खरीदते समय किस्म की पहचान भी पक्की करें। खेती की स्थानीय सिफारिशों को प्राथमिकता देना जरूरी है। बिहार कृषि विभाग ने भी स्थानीय विशेषज्ञों से सलाह की बात कही है। नए किसान पहले छोटे क्षेत्र में किस्म आजमा सकते हैं। इससे स्थानीय परिस्थितियों में प्रदर्शन समझने में मदद मिल सकती है।

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