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फसल नुकसान से सीखा सबक, खेती में टेक्नोलॉजी से लाया बदलाव, किसान ने बनाया करोड़ों वाला मॉडल

newz@gmail.com | Sep 28, 2026, 19:00 IST

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के किसान अरविंद कुमार सिंह ने आधुनिक खेती से अपनी पहचान बनाई है। 20 साल पहले नुकसान झेलने के बाद उन्होंने नकदी फसल, बागवानी, मछली पालन और मशीनों को अपनाया। आज वह सालाना 20 से 25 लाख रुपए कमा रहे हैं।

खेती में तकनीक

खेती को घाटे का काम मानने की सोच उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के किसान अरविंद कुमार सिंह ने बदल दी है। भेलवल गांव के रहने वाले 50 वर्षीय अरविंद आज सफल किसान के तौर पर पहचान बना चुके हैं। करीब 20 साल पहले उन्होंने पारंपरिक खेती से अलग प्रयोग शुरू किया था। शुरुआत में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। केले की खेती में उन्हें पहले ही साल भारी नुकसान उठाना पड़ा।

इसके बाद 12 एकड़ में गेहूं की मड़ाई मजदूरों की कमी के कारण प्रभावित हुई। खराब मौसम ने पूरी फसल को नुकसान पहुंचाया। लगातार असफलताओं के बाद भी अरविंद ने खेती छोड़ने के बजाय तरीका बदलने का फैसला किया।

नकदी फसलों से बढ़ी कमाई

अरविंद ने खेती में बदलाव करते हुए ऐसी फसलों पर ध्यान दिया जिनकी बाजार में मांग बनी रहती है। उन्होंने करीब चार एकड़ सिंचित जमीन पर कई तरह की फसलें उगानी शुरू कीं। इनमें अरहर, तिल, सरसों, चना, गन्ना, आलू, सावां, मडुआ और कोदो जैसी फसलें शामिल हैं। इससे उन्हें एक ही फसल पर निर्भर नहीं रहना पड़ा।

उन्होंने आठ एकड़ जमीन में बागवानी को भी शामिल किया। इसमें आम, स्ट्रॉबेरी, करेला और केला जैसी फसलें लगाईं। इसके अलावा दो एकड़ में तालाब लीज पर लेकर मछली पालन शुरू किया। इस तरह उन्होंने खेती को कई आय स्रोतों से जोड़ दिया। इससे मौसम या बाजार में बदलाव का असर कम हुआ।

मशीनों से आसान हुई खेती

अरविंद ने खेती में मजदूरों की कमी को देखते हुए मशीनीकरण पर जोर दिया। उन्होंने शुरुआत ट्रैक्टर, रोटावेटर और जीरो टिल सीड ड्रिल मशीन से की। समय के साथ उन्होंने सुपर सीडर, पावर टिलर, थ्रेसर और पैडी स्ट्रॉ चॉपर जैसे आधुनिक उपकरण भी खरीदे। इन मशीनों से खेती के कई काम कम समय में पूरे होने लगे।

पांच साल के अंदर उनकी सालाना आमदनी करीब 15 लाख रुपए तक पहुंच गई। इसके बाद उन्होंने खेती का विस्तार किया और लीज पर जमीन लेकर उत्पादन बढ़ाना शुरू किया। आज उनके पास कृषि ड्रोन, लेजर लैंड लेवलर, ड्रिप इरिगेशन सिस्टम और डीएसआर मशीन जैसी तकनीक उपलब्ध हैं। इनसे जुताई, बुवाई, सिंचाई और फसल प्रबंधन आसान हुआ है।

पानी बचाने की नई पहल

अरविंद ने खेती में पानी की बचत के लिए आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाया। उन्होंने सोलर पंप, ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर और रेनगन का इस्तेमाल शुरू किया। इन तकनीकों से उन्होंने करीब 70 प्रतिशत तक पानी बचाने का दावा किया है। इससे खेती की लागत कम हुई और श्रम की जरूरत भी घटी।

फसल अवशेष प्रबंधन में भी उन्होंने नई पहल की। वह पैडी स्ट्रॉ चॉपर, मल्चर और वेस्ट डी-कम्पोजर की मदद से पराली को खेत में ही खाद में बदलते हैं। इससे उन्हें पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ती। साथ ही खेत की मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है।

400 किसानों को मिला फायदा

अरविंद सिंह ने अपनी सफलता को दूसरे किसानों तक पहुंचाने के लिए भेलवल एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर कंपनी की स्थापना की। इस एफपीओ (Farmer Producer Organization) से करीब 400 किसान जुड़े हुए हैं। इसके माध्यम से किसानों को नई तकनीक और बेहतर खेती के तरीकों की जानकारी मिलती है।

एफपीओ के जरिए 100 किसानों को कालानमक धान की खेती से जोड़ा गया है। जैविक तरीके से खेती करने वाले किसानों की आय करीब तीन गुना तक बढ़ने की जानकारी दी गई है। खेती में नए प्रयोगों के लिए अरविंद सिंह को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों 51 हजार रुपए का पुरस्कार मिला था। इसके अलावा उन्हें दो बार उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने भी सम्मानित किया है। अरविंद की कहानी बताती है कि खेती में बदलाव, तकनीक और सही योजना से किसानों के लिए नए अवसर तैयार हो सकते हैं।

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