मध्य प्रदेश में उन्नत पशुपालन को बढ़ावा देने की तैयारी है। सरकार वृंदावन ग्रामों में पशुओं की प्रतियोगिता आयोजित कराएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसकी घोषणा रतलाम के कार्यक्रम में की। उन्होंने उज्जैन से कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। कार्यक्रम बुधवार को रतलाम में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव का हिस्सा था। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कई किसानों से सीधे संवाद किया।
किसे कितना पुरस्कार मिलेगा
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाले पशुपालक को एक लाख रुपए मिलेंगे। दूसरे स्थान वाले पशुपालक को 50 हजार रुपए दिए जाएंगे। तीसरा स्थान पाने वाले पशुपालक को 25 हजार रुपए मिलेंगे। पुरस्कार वितरण दिवाली पर गोवर्धन पूजा के दौरान होगा। सरकार ने सभी विकासखंडों में वृंदावन ग्राम विकसित करने की बात कही है। यहां उन्नत पशुपालन और दूध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
हालिया सरकारी घोषणा में 313 विकासखंडों का उल्लेख किया गया था। प्रतियोगिता इन्हीं विकासखंडों के वृंदावन ग्रामों में प्रस्तावित है। जारी जानकारी में चयन प्रक्रिया का विस्तृत प्रारूप नहीं बताया गया। पशुओं के मूल्यांकन संबंधी नियम भी बाद में सामने आ सकते हैं।
दूध उत्पादन पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। इसके लिए उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्नत नस्ल के पशु सामान्यतः बेहतर दूध उत्पादन क्षमता रखते हैं। सही पोषण और स्वास्थ्य देखभाल भी इसके लिए जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने पशुपालकों को प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई। प्रतियोगिता के जरिए बेहतर पशुपालन को पहचान मिलने की उम्मीद है। इस पहल से किसानों को अच्छे पशुओं की जानकारी मिल सकती है। दूसरे पशुपालक भी बेहतर प्रबंधन तकनीक सीख सकते हैं।प्रतियोगिता केवल पुरस्कार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पशु स्वास्थ्य और नस्ल सुधार पर प्रशिक्षण भी जरूरी रहेगा।
खेती के साथ पशुपालन
मुख्यमंत्री ने किसानों को आय के कई स्रोत अपनाने की सलाह दी। उन्होंने खेती के साथ पशुपालन और उद्यानिकी का उल्लेख किया। उनके अनुसार किसान केवल फसल उत्पादन पर निर्भर नहीं रहें। प्रोसेसिंग से भी अपनी उपज का मूल्य बढ़ाया जा सकता है। पशुपालन किसानों को नियमित आय का विकल्प देता है। दूध की बिक्री से रोजाना नकदी मिलने की संभावना रहती है।
उद्यानिकी से किसानों को बाजार आधारित फसलें उगाने का मौका मिलता है। प्रोसेसिंग अपनाने से खराब होने वाली उपज बच सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी योजनाओं से किसानों को सशक्त बनाया जा रहा है। विभिन्न कार्यक्रमों से तकनीकी और आर्थिक सहायता दी जा रही है।
खेतों में लगेंगे सोलर सिस्टम
मुख्यमंत्री ने खेतों पर सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य भी बताया। सरकार 30 लाख किसानों को इससे जोड़ना चाहती है। सोलर सिस्टम से सिंचाई के लिए बिजली उपलब्ध हो सकती है। इससे बिजली की अनिश्चित आपूर्ति पर निर्भरता कम होगी। किसानों के लिए सोलर पंप उपयोगी विकल्प बन सकते हैं। धूप वाले समय में सिंचाई करना आसान हो सकता है।
सरकार ने तीन वर्षों में लक्ष्य पूरा करने की बात पहले कही थी। हर वर्ष करीब 10 लाख किसानों को जोड़ने की योजना है। योजना लागू होने पर रखरखाव और तकनीकी सहायता भी जरूरी होगी। किसान को लागत और अनुदान की साफ जानकारी मिलनी चाहिए।
रबी में दिन की बिजली
मुख्यमंत्री ने रबी सीजन के लिए बिजली आपूर्ति का दावा किया। किसानों को दिन में दस घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। दिन में बिजली मिलने से सिंचाई का काम आसान हो सकता है। किसानों को रात में खेत जाने की जरूरत घट सकती है।
रात में सिंचाई करते समय कई तरह के जोखिम रहते हैं। इनमें जंगली जानवर और विद्युत हादसे शामिल हो सकते हैं। समय पर बिजली मिलने से रबी फसलों की सिंचाई बेहतर होगी। इसका असर उत्पादन और गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।
रतलाम में सिंचाई का विस्तार
मुख्यमंत्री ने रतलाम में चंबल के पानी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को सिंचाई सुविधा मिल रही है। नदी जोड़ो अभियान से रतलाम की खेती बदलने की उम्मीद है। अधिक सिंचित क्षेत्र किसानों को नई फसलें चुनने का अवसर देगा।
सिंचाई उपलब्ध होने से बागवानी का विस्तार भी संभव होगा। फल और सब्जियों के लिए नियमित पानी महत्वपूर्ण रहता है। मुख्यमंत्री ने एक्सप्रेस-वे से मिली बाजार सुविधा का भी उल्लेख किया। बेहतर सड़क संपर्क से कृषि उपज जल्दी बाजार पहुंच सकती है। कम परिवहन समय से खराब होने वाली उपज बच सकती है। इससे किसानों को दूर के खरीदारों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
रतलाम की खेती की तारीफ
मुख्यमंत्री ने रतलाम के किसानों की विविध खेती की सराहना की। यहां किसान कई प्रकार की फसलें उगा रहे हैं। रतलाम में अंगूर की खेती और प्रोसेसिंग भी की जा रही है। अंगूर से जुड़े कारोबार में बाजार विस्तार की संभावना है।
प्रोसेसिंग के जरिए कच्ची उपज का मूल्य बढ़ाया जा सकता है। इससे किसान को सामान्य बिक्री से बेहतर दाम मिल सकता है। मुख्यमंत्री ने रतलाम स्वर्ण और सेव का भी उल्लेख किया। उन्होंने शहर की तेल वाली कचौरी की भी तारीफ की।
घी का कारोबार विदेश पहुंचा
किसान दिलीप पाटीदार ने मुख्यमंत्री से अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने सरकारी योजना से घी का कारोबार बढ़ाया है। उन्हें पीएम-एफएमई (PM Formalisation of Micro Food Processing Enterprises) योजना का लाभ मिला। उन्होंने 30 लाख 10 हजार रुपए की सब्सिडी मिलने की जानकारी दी।
दिलीप पाटीदार बिलोना पद्धति से घी तैयार करते हैं। उनके अनुसार इससे घी का स्वाद और शुद्धता बेहतर रहती है। उनका घी अमेरिका और श्रीलंका के बाजार तक पहुंचा है। उन्होंने योजना के लिए केंद्र और राज्य सरकार का आभार जताया। यह उदाहरण कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन की संभावना दिखाता है। किसान स्थानीय उत्पाद को बड़ा कारोबार बना सकते हैं।
अमरूद पहुंचा बड़े बाजार
किसान कन्हैयालाल पाटीदार अमरूद का उत्पादन करते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को अपनी खेती की जानकारी दी। वह कम शुगर वाली अमरूद किस्मों की खेती करते हैं। इनमें वीएनआर और पिंक किस्म शामिल हैं। वह रेड डायमंड किस्म का अमरूद भी उगाते हैं। उत्पाद मांग के अनुसार अलग-अलग बाजारों में भेजे जाते हैं।
उनका अमरूद मुंबई और दिल्ली तक पहुंचता है। इसे असम के बाजारों में भी भेजा जाता है। अलग बाजार मिलने से किसान की बिक्री का दायरा बढ़ता है। गुणवत्ता और मांग के अनुसार बेहतर दाम मिल सकते हैं।
दूसरे किसानों ने बताए अनुभव
गुलाब उत्पादक प्रवीण पाटीदार ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने फूलों की खेती से जुड़ी जानकारी दी। रेखा व्यास जैविक उर्वरक का रिसर्च सेंटर चलाती हैं। उन्होंने अपने जैविक खाद और उसके उपयोग की जानकारी दी।
धर्मेंद्र जाट लहसुन और प्याज का उत्पादन करते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से स्थानीय मालवी भाषा में बातचीत की। कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक खेती की जानकारी दी गई। उन्नत कृषि तकनीकों के उपयोग पर भी जोर रहा। किसानों को पशुपालन और उद्यानिकी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इससे आय के अतिरिक्त साधन विकसित हो सकते हैं।
कार्यक्रम में कौन शामिल हुआ
कार्यक्रम में सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप उपस्थित रहे। जावरा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय भी कार्यक्रम में शामिल हुए। रतलाम ग्रामीण विधायक मथुरालाल डामर ने भी किसानों को संबोधित किया। जिलेभर से किसान कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों से सीधा संवाद करना था। इसमें योजनाओं और खेती के नए तरीकों की जानकारी दी गई।
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