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एमपी और सीजी में कहीं-कहीं बौछार के आसार, राजस्थान 40 किमी की रफ्तार वाली हवा के साथ हल्की बारिश की संभावना

newz@gmail.com | Oct 10, 2026, 09:58 IST

10 अक्टूबर का मौसम तीनों राज्यों में अलग रहेगा। पूर्वी मध्य प्रदेश में गरज-चमक के साथ बौछार संभव है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान के पूर्वानुमान जानें। कटाई के दौर में किसान कटी फसल ढककर रखें।

आज का मौसम

मानसून की विदाई के बाद भी मौसम पूरी तरह सूखा नहीं हुआ है। 10 अक्टूबर को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में अलग-अलग तस्वीर दिखेगी। मौसम विभाग यानी IMD (India Meteorological Department) के बुलेटिन में बौछार का अनुमान है। कहीं तेज हवा चल सकती है। कटाई के सीजन में किसानों को सतर्क रहना होगा।

पूर्वी मध्य प्रदेश में छिटपुट बारिश

मौसम विभाग के 9 अक्टूबर के बुलेटिन में पूर्वी मध्य प्रदेश का जिक्र है। वहां 9 और 10 अक्टूबर को छिटपुट बारिश हो सकती है। कहीं-कहीं गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना भी है। निजी मौसम एजेंसी स्काइमेट वेदर का आकलन भी मिलता-जुलता है। इसमें पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछार है। वहां 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा चल सकती है।

पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए तस्वीर अलग है। स्काइमेट के मुताबिक वहां मौसम ज्यादातर शुष्क रहेगा। यानी बारिश का असर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में ज्यादा दिखेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदेश से मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है। इस बार मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा। अब दिन में गर्मी और रात में हल्की गुलाबी ठंड महसूस हो रही है।

छत्तीसगढ़ में बारिश के आसार

छत्तीसगढ़ में 10 अक्टूबर को कुछ जगह बारिश का अनुमान है। साथ में गरज के साथ बौछार भी पड़ सकती है। स्काइमेट के मुताबिक एक ट्रफ बनी हुई है। यह झारखंड और ओडिशा से छत्तीसगढ़ होकर तेलंगाना तक फैली है। ट्रफ यानी कम दबाव की लंबी पट्टी।

राहत की बात यह है कि 10-11 अक्टूबर के बीच बारिश घट सकती है। लेकिन यह दौर पूरी तरह खत्म नहीं होगा। मौसम विभाग के बुलेटिन में 12 से 15 अक्टूबर का अनुमान दिया गया है। उस दौरान कुछ स्थानों पर फिर छिटपुट बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार 8 अक्टूबर तक मानसून कई हिस्सों से जा चुका था। इनमें छत्तीसगढ़ के कुछ इलाके भी शामिल थे। अब मानसून की विदाई की रेखा और आगे बढ़ रही है।

राजस्थान में हवा और बौछार

राजस्थान को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। मौसम विभाग के बुलेटिन में पश्चिमी राजस्थान का जिक्र है। वहां 10 और 11 अक्टूबर को छिटपुट बारिश हो सकती है। पूर्वी राजस्थान में भी इन्हीं दो दिन बारिश के आसार हैं।

पूर्वी राजस्थान में 10 अक्टूबर को तेज हवा का अनुमान है। हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है। झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। पश्चिमी राजस्थान में 13 और 14 अक्टूबर को भी बारिश संभव है।

स्काइमेट का आकलन इससे अलग है। उसके मुताबिक 10 अक्टूबर को राजस्थान में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा। 8 अक्टूबर की एक रिपोर्ट में अलग बात कही गई थी। उसमें मौसम विभाग के हवाले से पारा गिरने की बात थी। 10 अक्टूबर के बाद 2 से 3 डिग्री गिरावट बताई गई थी।

तापमान और मानसून की स्थिति

बुलेटिन में इन तीनों राज्यों के तापमान का अलग अनुमान नहीं है। स्काइमेट के मुताबिक 8 अक्टूबर को राजस्थान के पिलानी में सबसे ज्यादा पारा रहा। वह पूरे देश में सबसे ज्यादा था। वहां तापमान 39.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ।

मानसून की विदाई अभी जारी है। विभाग के अनुसार 3 से 4 दिन में कुछ और हिस्सों से मानसून लौटेगा। इनमें पूर्वी भारत और उत्तरी प्रायद्वीपीय भारत शामिल हैं। पूर्वोत्तर के कुछ हिस्से भी इसमें हैं। मानसून की वापसी का मतलब बारिश का रुकना नहीं है।

किसान क्या सावधानी रखें

अक्टूबर में खरीफ फसलों की कटाई और मड़ाई का काम चलता है। ऐसे में हल्की बारिश भी नुकसान कर सकती है। कटी फसल भीगे, तो दाने की क्वालिटी बिगड़ती है। मंडी में दाम पर भी असर पड़ सकता है। ये सामान्य सावधानियां हैं।

पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसान कटी फसल को तिरपाल से ढककर रखें। उसे ऊंची और सूखी जगह पर रखना बेहतर होगा। गरज-चमक के दौरान मड़ाई का काम टाल दें। उपज मंडी ले जाने से पहले ताजा मौसम देख लें।

पूर्वी राजस्थान में तेज हवा चल सकती है। ऐसे में पकी खड़ी फसल के गिरने का खतरा रहता है। हवा चलते समय कीटनाशक का छिड़काव न करें। इससे दवा बेकार जाती है और सेहत पर भी असर पड़ सकता है।

गरज-चमक के समय खुले खेत में न रुकें। पेड़ के नीचे भी खड़े न हों। आकाशीय बिजली से जान का खतरा रहता है। रबी की बुवाई से पहले कृषि विज्ञान केंद्र (Krishi Vigyan Kendra) से सलाह लें।

आने वाले दिनों का अनुमान

मौसम विभाग के अनुसार थाईलैंड की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती घेरा बना है। यह करीब 11 अक्टूबर तक अंडमान सागर पहुंच सकता है। फिर 13 अक्टूबर के आसपास कम दबाव का क्षेत्र बन सकता है। यह क्षेत्र दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में बनने का अनुमान है।

इसका असर इन तीनों राज्यों पर कितना होगा, यह नहीं बताया गया। इसलिए किसान रोज का ताजा पूर्वानुमान देखते रहें। जिले के मौसम केंद्र और कृषि विभाग की सलाह पर भरोसा करें।

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