रविवार, चार अक्टूबर को तीनों राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मौसम ज्यादातर शुष्क रहने का अनुमान है। मानसून की विदाई जारी है। दिन में धूप तेज है और रातें ठंडी होने लगी हैं। यह बदलाव किसानों के लिए अहम है। खरीफ फसलों की कटाई और सुखाई का काम खुले मौसम में आसान होता है। साथ ही रबी की तैयारी भी शुरू होने वाली है।
चार अक्टूबर को कैसा रहेगा मौसम
भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) के मुताबिक बारिश थम चुकी है। उत्तर, मध्य और पूर्व भारत के बड़े हिस्से में ऐसा है। मौसम काफी हद तक सूखा है। उत्तर भारत में सूखी पश्चिमी हवाओं से तापमान बढ़ रहा है।
तीनों राज्यों में बारिश की कोई बड़ी चेतावनी नहीं बताई गई है। कुछ राष्ट्रीय पोर्टल मध्यप्रदेश के लिए येलो अलर्ट की बात कर रहे हैं। हालांकि भोपाल के मौसम विशेषज्ञ बारिश के आसार नहीं बता रहे।
एमपी में धूप, रातें ठंडी
विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक चार और पांच अक्टूबर को बारिश नहीं होगी। ज्यादातर हिस्सों में धूप खिली रहेगी। रात का तापमान 20 डिग्री से नीचे आ चुका है।
बीती रात अमरकंटक में पारा 17.1 डिग्री रहा। शाजापुर में 17.3 और धार में 17.5 डिग्री दर्ज हुआ। इंदौर और पचमढ़ी में 17.6 डिग्री रहा। भोपाल और उज्जैन में रात का तापमान 18 डिग्री रहा।
दिन में तस्वीर अलग है। बड़वानी, धार, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम में पारा 35 डिग्री पार है। यानी सुबह-रात ठंडक और दोपहर में गर्मी का असर दिख रहा है।
पूर्वी एमपी में बूंदाबांदी
विशेषज्ञ के मुताबिक 6 अक्टूबर से पूर्वी मध्यप्रदेश में हल्की बारिश हो सकती है। इन जिलों में टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा शामिल हैं। मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और मैहर में भी बूंदाबांदी का अनुमान है। उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर के नाम भी इस सूची में हैं।
मानसून की विदाई कहां तक पहुंची
विभाग के मुताबिक मानसून की वापसी रेखा कई राज्यों से गुजर रही है। इनमें गुजरात, राजस्थान और उत्तर भारत के हिस्से शामिल हैं। यह रेखा धौलपुर, उदयपुर, डीसा और नलिया से होकर जाती है। विभाग के मुताबिक राजस्थान के बाकी हिस्सों से विदाई के हालात अनुकूल हैं।
भोपाल केंद्र के अनुसार प्रदेश में यह रेखा ग्वालियर-चंबल और उज्जैन पर है। अगले दो से तीन दिन में प्रदेश से वापसी शुरू होने के संकेत हैं। सबसे पहले उज्जैन और ग्वालियर-चंबल से मानसून जा सकता है।
उसके बाद इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम और सागर संभाग का नंबर आ सकता है। फिर जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग से मानसून जा सकता है। 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून की विदाई संभव बताई गई है।
राजस्थान में भी दिन गर्म, रातें ठंडी
राजस्थान में तापमान का उतार-चढ़ाव दिख रहा है। यह मानसून की विदाई के साथ हो रहा है। दो अक्टूबर को पिलानी में अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री सेल्सियस रहा। यह देश में सबसे ज्यादा रहा।
पूर्वी और दक्षिणी जिलों में रातें ठंडी हुई हैं। उदयपुर, भीलवाड़ा, सीकर, अजमेर और कोटा में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम है। उदयपुर में शुक्रवार को अधिकतम तापमान 35.4 और न्यूनतम 18.6 डिग्री रहा।
मौसम विभाग ने तीन अक्टूबर से राजस्थान में साफ और शुष्क मौसम बताया है। बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर और नागौर में पारा 36 से 38 डिग्री हो सकता है। बाड़मेर, सिरोही, पाली और गंगानगर में भी ऐसा ही अनुमान है। यह पारा धीरे-धीरे 40 डिग्री के करीब पहुंच सकता है। बाकी इलाकों में तापमान 34 से 35 डिग्री के आसपास रह सकता है।
छत्तीसगढ़ में शुष्क मौसम
छत्तीसगढ़ में चारअक्टूबर को मौसम शुष्क रहेगा। विभाग की ओर से कोई चेतावनी नहीं दी गई है। चार दिन सूखे के बाद बारिश के आसार भी बताए गए हैं। अगले 48 घंटे में मानसून वापसी के हालात अनुकूल हैं। यह प्रदेश के कुछ हिस्सों के लिए है।
राष्ट्रीय अनुमान में भी छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों से मानसून जाने की बात है। पड़ोसी ओडिशा-झारखंड में पांच से आठ अक्टूबर तक हल्की बारिश संभव है। छत्तीसगढ़ के जिलावार तापमान के आंकड़े इस रिपोर्ट में नहीं मिले।
मानसून की कमी और किसान
मध्यप्रदेश में इस सीजन 908.4 मिमी बारिश हुई। सामान्य बारिश 949.5 मिमी है। यानी करीब 4 फीसदी कम बारिश हुई। पूर्वी हिस्से में सामान्य से चार फीसदी ज्यादा बारिश दर्ज हुई। पश्चिमी हिस्से में 12 फीसदी कम बारिश रही। जून में 14 फीसदी कम बारिश इसका बड़ा कारण रही। इसलिए पश्चिमी मध्यप्रदेश के किसानों को रबी में नमी का ध्यान रखना होगा। एक राष्ट्रीय रिपोर्ट के शीर्षक में मानसून 13 फीसदी कम बताया गया है।
किसान इन बातों का रखें ध्यान
साफ मौसम में कटी हुई फसल को खुले में सुखाना आसान है। उपज को नमी से बचाकर रखना जरूरी है। छह अक्टूबर के आसपास पूर्वी मध्यप्रदेश के किसान तिरपाल पास रखें। हल्की बारिश भी खुले में रखी उपज को भिगो सकती है। रबी की बुवाई से पहले खेत में नमी जरूर जांचें।
दिन में तेज धूप से मिट्टी की नमी जल्दी घट सकती है। इसलिए राजस्थान और पश्चिमी मध्यप्रदेश के किसान सिंचाई की योजना पहले बना लें। अपने जिले के कृषि विभाग की सलाह भी देखते रहें।
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