सैलाना के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने सीहोर के कोसमी गांव का मामला उठाया है। बुधनी क्षेत्र में मकान टूटने के बाद वे पीड़ित परिवारों के पास पहुंचे। यहां वे धरना प्रदर्शन में भी शामिल हुए। डोडियार भारत आदिवासी पार्टी के विधायक हैं। उन्होंने मोहन यादव सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने साफ कहा कि आदिवासियों की जमीन छीनने नहीं देंगे।
डोडियार धरनास्थल पहुंचे
डोडियार कोसमी गांव में उन परिवारों से मिले, जिनके मकान तोड़े गए। इसके बाद वे धरने में बैठे। उनका कहना है कि ये आदिवासी कई दशकों से यहां खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी की खेती की जमीन ऐसे नहीं छीनी जा सकती। उनके मुताबिक आदिवासियों को हटाना गलत है। पहले उन्हें उनका हक मिलना चाहिए।

डोडियार ने लगाए ये आरोप
डोडियार का आरोप है कि मोहन सरकार में आदिवासियों के साथ ज्यादती हुई। उनका दावा है कि खेतों में खड़ी फसल नष्ट कर दी गई। पीने के पानी के स्रोत भी नष्ट किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि मकान और घर का खाने का सामान भी नष्ट हुआ। उनके मुताबिक लोगों के मोबाइल छीन लिए गए। डोडियार का यह भी आरोप है कि बच्चों और महिलाओं से मारपीट हुई। उन्होंने जातीय दुर्व्यवहार का भी आरोप लगाया।
पट्टों पर डोडियार का सवाल
डोडियार ने पूर्व मुख्यमंत्री पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि वे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे। लेकिन उन्होंने आदिवासियों को पट्टे नहीं दिए। पट्टे यानी जमीन पर कब्जे का कानूनी हक। उनका कहना है कि हक न मिलने से आदिवासी ऐसी कार्रवाई झेल रहे हैं।
क्या है कोसमी का पूरा मामला
कोसमी गांव सीहोर जिले में है। यह बुधनी विधानसभा क्षेत्र में आता है। यहां 11 अक्टूबर को आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े गए। रिपोर्टों के मुताबिक 12 परिवारों के मकान गिराए गए। खेतों में खड़ी मक्का और अरहर की फसल को नुकसान पहुंचा। एक कुएं को मिट्टी से पाट दिया गया। कार्रवाई वन विभाग और राज्य वन विकास निगम से जुड़ी बताई गई है। ग्रामीणों के मुताबिक वे यहां कई साल से रह रहे थे।
वन विकास निगम का दावा- जमीन सरकारी है
निगम और वन अधिकारियों का कहना है कि जमीन सरकारी है। यह जमीन पौधरोपण के लिए निगम को दी गई थी। यहां सागौन का रोपण हुआ था। उनका दावा है कि 2022 के बाद लोगों ने पौधरोपण को नुकसान पहुंचाया। फिर उन्होंने जमीन पर कब्जा कर लिया। इसी आधार पर यह कार्रवाई की गई।
निगम के अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई कानून के दायरे में हुई। रेंजर जया यादव के मुताबिक ग्रामीण वैध कागज नहीं दिखा सके। उन्होंने कहा कि कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराई गई।
कार्रवाई से पहले क्या हुआ
मिली जानकारी के मुताबिक अगस्त 2025 में परिवारों के खिलाफ वन अपराध के मामले दर्ज हुए। दिसंबर 2025 में वन अधिनियम की धारा 80 ए के तहत नोटिस दिया गया। सात सितंबर 2026 को बेदखली का अंतिम आदेश जारी हुआ। 9 अक्टूबर को निगम ने पुलिस सहयोग के लिए पत्र लिखा। इसके दो दिन बाद कार्रवाई हुई।
ग्रामीणों का आरोप- नोटिस नहीं दिया
ग्रामीणों का कहना है कि वे 2004 से यहां रह रहे हैं। उनके पास 2005 की दंड पर्चियां होने की बात सामने आई है। एक व्यक्तिगत वन अधिकार दावा मार्च 2024 में दाखिल हुआ था। उसका नतीजा रिपोर्ट में नहीं बताया गया। पूर्व सरपंच विक्रम सिंह बरेला का आरोप है कि नया नोटिस नहीं दिया गया। उनके मुताबिक गांव का इकलौता कुआं भी नष्ट कर दिया गया। यह कुआं 11 परिवार इस्तेमाल करते थे।
बरेला का आरोप है कि एक रेंजर ने बच्ची को बाल पकड़कर निकाला। यह उनका आरोप है और अभी जांच का विषय है। वन विभाग के मुताबिक नामजद 9 लोगों के पक्के मकान सिंहपुर में हैं। बरेला का कहना है कि उन्होंने सिंहपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान बनाया। उनके मुताबिक कोसमी में उन्हें मकान नहीं मिल सका।
अब तक क्या कार्रवाई हुई
मामला बढ़ने पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने मुख्य सचिव से जांच कर रिपोर्ट देने को कहा। उन्होंने कहा कि जांच से दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। जांच की समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी नोटिस भेजा है। नोटिस मुख्य सचिव, डीजीपी, वन प्रमुख सचिव, सीहोर कलेक्टर और एसपी को गया। इन्हें तीन दिन में जवाब देना है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी गांव जाकर पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने कार्रवाई को गलत बताया। उन्होंने पीड़ितों को पक्के मकान दिलाने का भरोसा दिया।
विपक्ष हुआ मुखर
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस कार्रवाई की आलोचना की। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सरकार पर सवाल उठाए। इसी बीच डोडियार ने सीधे सरकार से आरपार की लड़ाई की बात कही है। डोडियार ने कहा कि अब जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर लड़ाई होगी। उन्होंने इसे भाजपा की मोहन सरकार से आरपार की लड़ाई बताया।
उनकी मांग है कि बेदखली न हो। वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) के पट्टे दिए जाएं। इसके साथ बिजली, सड़क, पानी और स्कूल की व्यवस्था हो। डोडियार का कहना है कि इसी रास्ते से आदिवासियों को न्याय मिलेगा। उन्होंने साफ किया कि वे पीड़ितों के साथ खड़े रहेंगे।
ग्रामीणों की चेतावनी
कोसमी के लोग निगम के दफ्तर के पास सड़क पर धरने पर हैं। वे वन अधिकार पट्टा चाहते हैं। मांगें न मानी गईं तो उन्होंने 25 हजार लोगों के भोपाल कूच की चेतावनी दी है।
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