किसान की बात,सूत्र के साथ

राजस्थान की अलवर मंडी में बाजरा भाव बढ़ा, फिर भी किसान हरियाणा जा रहे… जानिए क्यों?

newz@gmail.com | Oct 14, 2026, 20:40 IST

अलवर मंडी में नए बाजरे की आवक शुरू हो गई है। भाव 2300 से 2600 रुपए प्रति क्विंटल तक हैं। इसके बावजूद राजस्थान के किसान हरियाणा में बेहतर सुविधाओं और भावांतर सहायता के लिए उपज बेचने जाते हैं। हालांकि हरियाणा की योजना पंजीकृत किसानों और तय नियमों से जुड़ी है।

बाजरा

राजस्थान की अलवर उपज मंडी में खरीफ सीजन के नए बाजरे की आवक शुरू हो गई है। बाजार में फसल के भाव 2300 से 2550 और 2600 रुपए प्रति क्विंटल तक बताए जा रहे हैं। बेहतर उत्पादन और भाव से किसानों को पिछले वर्षों के मुकाबले राहत मिली है। इसके बावजूद सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर किसानों की चिंता बनी हुई है।

भारतीय उद्योग व्यापार संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राजस्थान खाद्य पदार्थ संघ के कार्यकारी प्रांतीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल जलालपुरिया ने मंडी की स्थिति बताई। उनके अनुसार इन दिनों मंडी में रोजाना करीब 10 से 12 हजार कट्टे बाजरा पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि करीब आठ से दस दिन पहले आवक 20 से 22 हजार कट्टे रोजाना तक थी।

आवक पहले के मुकाबले कम हुई है। फिर भी मंडी में बाजरे का कारोबार जारी है। जलालपुरिया के मुताबिक भाव 2300 रुपए से शुरू होकर 2550 से 2600 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच रहे हैं। यह जानकारी मंडी के कारोबार और किसानों की मौजूदा स्थिति पर व्यापार संघ के पदाधिकारी ने दी।

हरियाणा की भावांतर व्यवस्था

जलालपुरिया के मुताबिक इस बार किसानों को उत्पादन और बाजार भाव दोनों में बेहतर स्थिति दिख रही है। उन्होंने हरियाणा की भावांतर भरपाई व्यवस्था का उदाहरण दिया। उनके अनुसार बाजरे के लिए 2900 रुपए प्रति क्विंटल का स्तर तय है। बाजार भाव कम होने पर निर्धारित स्तर और बिक्री भाव के बीच अंतर की भरपाई की जाती है।

उदाहरण के तौर पर यदि बाजरा 2300 रुपए प्रति क्विंटल बिकता है तो अंतर 600 रुपए होता है। जलालपुरिया ने कहा कि इस व्यवस्था से कम बाजार भाव मिलने पर किसानों को आर्थिक सहारा मिलता है। ऐसी मदद से किसान अपनी उपज बेचने का फैसला कर सकते हैं। मंडियों में कारोबार जारी रखने में भी यह व्यवस्था मदद कर सकती है।

हरियाणा सरकार के 2026 खरीफ सीजन संबंधी बयान में बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2900 रुपए प्रति क्विंटल बताया गया है। राज्य सरकार ने खरीद और भावांतर भुगतान के लिए पंजीकरण तथा फसल सत्यापन की शर्तें भी बताई हैं। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक भुगतान मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल के रिकॉर्ड और जारी जे-फॉर्म के आधार पर होगा।

राजस्थान के किसानों की मांग

जलालपुरिया के मुताबिक राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों के किसान बेहतर सुविधा और भाव की तलाश में हरियाणा जाते हैं। उन्होंने अलवर और भरतपुर के अलावा सीकर तथा झुंझुनू का भी उल्लेख किया। गंगानगर और हनुमानगढ़ के किसानों के जाने की बात भी उन्होंने कही।

इन जिलों से हरियाणा की ओर उपज ले जाने का कारण बेहतर बाजार और सरकारी सहायता की उम्मीद बताई गई है। हालांकि हरियाणा की आधिकारिक योजना के नियम राज्य के पंजीकृत किसानों से जुड़े हैं। इसलिए राजस्थान से बाजरा ले जाने वाले किसानों को योजना का लाभ मिलेगा या नहीं, यह नियमों और सत्यापन पर निर्भर करेगा।

मंडी कारोबार के दौरान किसानों की समस्याएं और अपेक्षाएं सामने आती रहती हैं। जलालपुरिया ने कहा कि व्यापार संघ ऐसे मुद्दों को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश करता है। किसानों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि राजस्थान में भी कम बाजार भाव की स्थिति में ऐसी आर्थिक सुरक्षा क्यों नहीं मिलती।

किसानों की मांग है कि बाजार भाव घटने पर नुकसान से बचाने वाली व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि बेहतर भाव के बावजूद खेती की लागत और आय की सुरक्षा चिंता का विषय हैं। वे चाहते हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक स्पष्ट नियमों के साथ पहुंचे। मंडी में भावों की स्थिति इस मांग को फिर सामने ला रही है।

बाजरा फीड उद्योग में जाता है

जलालपुरिया के मुताबिक बाजरे का करीब 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा पशु आहार और पोल्ट्री फीड में इस्तेमाल होता है। फीड उद्योग में इसकी मांग बाजार को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाले बाजरे की ग्रेडिंग की जाती है। इसके बाद उपज गुजरात सहित दूसरे राज्यों में भेजी जाती है।

इससे बाजरे का कारोबार केवल स्थानीय खपत तक सीमित नहीं रहता। अलग-अलग राज्यों की मांग भी व्यापार को प्रभावित करती है। गुणवत्ता के आधार पर उपज की छंटाई और बिक्री होती है। किसानों को मिलने वाला भाव मंडी में खरीदारों की मांग और फसल की गुणवत्ता पर निर्भर कर सकता है।

जलालपुरिया ने कहा कि मोटे अनाज के प्रति जागरूकता बढ़ाने से बाजरे की मांग को समर्थन मिल सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्री अन्न को बढ़ावा देने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। बाजरा पोषण के लिहाज से महत्वपूर्ण मोटा अनाज है। उत्पादन और बाजार से जुड़े प्रयास किसानों के लिए नए अवसर बना सकते हैं।

भंडारण और प्रसंस्करण पर जोर

केंद्रीय स्तर पर श्री अन्न को बढ़ावा देने से बाजरे जैसे मोटे अनाज की पहचान बढ़ी है। पर किसानों को लाभ तभी मिलेगा जब उपज का बाजार भी मजबूत हो। इसके लिए खरीद, भंडारण और प्रसंस्करण की व्यवस्था अहम है। जलालपुरिया ने कहा कि बाजरे की गुणवत्ता के अनुसार दूसरे राज्यों में भी बिक्री होती है।

बाजरे की बेहतर ग्रेडिंग से अलग-अलग गुणवत्ता की उपज को बाजार तक पहुंचाया जा सकता है। प्रसंस्करण से फसल के उपयोग के नए रास्ते बन सकते हैं। इससे फीड उद्योग और अन्य खरीदारों तक पहुंच आसान हो सकती है। हालांकि इस खबर में किसी नई सरकारी खरीद योजना की घोषणा नहीं की गई है।

इस बार अलवर मंडी में भाव पिछले वर्षों के मुकाबले बेहतर बताए गए हैं। रोजाना आवक घटने के बावजूद व्यापार चल रहा है। किसानों की चिंता अब केवल मंडी भाव तक सीमित नहीं है। वे सरकारी योजनाओं की पात्रता, भुगतान और खेती से होने वाली आय की सुरक्षा भी चाहते हैं।

ये भी पढ़ें…

राजस्थान में कृषि मंत्री का दावा- खरीफ में मांग से अधिक उर्वरकों की आपूर्ति, रबी सीजन में भी किसानों को मिलेगा डीएपी-यूरिया

पंजाब से दक्षिण तक चमक फैला रहा राजस्थान के दौसा का बाजरा, बड़े दाने और मिठास के मुरीद हुए व्यापारी

राजस्थान में खाद संकट: स्टॉक के बाद भी डीएपी को तरसे किसान, अब 744 निरीक्षक रोकेंगे कालाबाजारी

राजस्थान के अलवर में DAP खाद के लिए भारी भीड़: 600 कट्टे कम पड़े, कई किसान खाली हाथ लौटे

GENERAL newz@gmail.com

Read more