नागौर में फसल बीमा के फर्जी दावों के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। यह मामला प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) से जुड़ा है। पुलिस ने वकील बीरबल राम कमेडिया को हिरासत में लिया है। उनकी पत्नी बसंती को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस का आरोप है कि किसानों की जमीन के रिकॉर्ड का गलत इस्तेमाल हुआ। बीमा क्लेम की रकम दूसरों के बैंक खातों में गई। ये अभी आरोप हैं और दोष सिद्ध होना अभी बाकी है।
क्या है नागौर का मामला
नागौर पुलिस फसल बीमा से जुड़े कई मामलों की जांच कर रही है। इस जांच में विशेष जांच दल (SIT) लगा है। इसकी अगुवाई सुरेश कुमार कस्वा कर रहे हैं।
आरोप है कि असली जमीन मालिकों के नाम और खसरा नंबर इस्तेमाल हुए। उनके नाम से बीमा पॉलिसी बनाई गई। फर्जी बंटाईदार के कागज भी तैयार किए गए। इसके बाद फसल खराब होने के दावे किए गए। आरोप है कि क्लेम की रकम असली किसानों को नहीं मिली। वह आरोपियों और उनके परिवार के खातों में गई।
कौन हैं बीरबल राम कमेडिया
बीरबल राम कमेडिया पेशे से वकील बताए गए हैं। वे पहले जिला प्रशासन की ओर से वकालत करते थे। पुलिस उन्हें इस मामले का मुख्य आरोपी मानकर पूछताछ कर रही है।
बताया गया है कि वे कई महीनों से पुलिस से बच रहे थे। पुलिस ने उन्हें मंगलवार को हिरासत में लिया। उनकी पत्नी बसंती को भी थाने लाया गया। बसंती का जिला परिषद के वार्ड 30 से नामांकन दाखिल होना था। नागौर कलेक्ट्रेट में यह नामांकन भरा जाना था। उसी दिन यह कार्रवाई हुई।
रिमांड और अदालत
अदालत ने बीरबल को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। यह रिमांड 19 अक्टूबर तक है। बसंती को तीन दिन की पुलिस रिमांड मिली है। यह 16 अक्टूबर तक है।
सदर थाने के मामलों में बीरबल, बसंती और परिवार के कई नाम हैं। इनमें बीरबल के भाई किशनाराम का नाम भी है। वे ग्राम विकास अधिकारी बताए गए हैं। किशनाराम फरार बताए गए हैं। एक रिपोर्ट में भाई की भूमिका की जांच की बात कही गई है।
परिवार के खातों की जांच
एसआईटी की जांच में सामने आया कि रकम कई खातों में पहुंची। इनमें बीरबल की पत्नी, साले और पिता के खाते शामिल बताए गए हैं। दूसरे रिश्तेदारों के खाते भी इसमें हैं।
पुलिस अब इन सभी की भूमिका देख रही है। पिता का नाम भागीरथ राम बताया गया है। उनकी भूमिका की भी जांच हो रही है। पुलिस ने कार्रवाई में फर्जी मुहरें और दूसरे दस्तावेज बरामद किए हैं। इनकी जांच की जा रही है।
कितने मामले, कितनी गिरफ्तारी
एक रिपोर्ट के मुताबिक दो महीनों में 39 एफआईआर (First Information Report) दर्ज हुईं। अलग अलग मामलों में अब तक 15 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। जांच 2021 से जुड़े मामलों तक जा रही है। एक मामले में करीब 2.28 लाख रुपए के फर्जी क्लेम की बात है। कुल रकम का आंकड़ा किसी रिपोर्ट में साफ नहीं है।
पुलिस बीमा कंपनी के कोऑर्डिनेटर की भूमिका भी देख रही है। कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालकों की भूमिका भी जांच में है। दूसरे बिचौलियों की भूमिका भी जांच में है।
भाजपा ने किया निष्कासित
इस कार्रवाई के बाद भाजपा ने बीरबल को पार्टी से बाहर कर दिया। भाजपा जिला अध्यक्ष रामधन पोटलिया के मुताबिक उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया गया। यह फैसला पार्टी का है। इससे मामले में दोष तय नहीं होता। अदालत की प्रक्रिया पूरी होने पर ही आरोपों पर फैसला होगा।
पहले भी उठ चुका है फर्जीवाड़ा
नागौर में फसल बीमा फर्जीवाड़े का मामला नया नहीं है। अगस्त में राज्य के 15 जिलों से शिकायतें सामने आई थीं। इनमें नागौर भी शामिल था।
बड़े पैमाने के कारण निगरानी विशेष अभियान समूह (SOG) को सौंपी गई। यह राजस्थान पुलिस की इकाई है। तब एसओजी एडीजी विशाल बंसल ने कई थानों में मामले बताए थे। उन्होंने और एफआईआर की संभावना भी बताई थी।
उस समय नागौर के दूजासर गांव का मामला भी सामने आया था। उसमें एक फर्जी पॉलिसी पर 4.7 लाख रुपए का क्लेम लिया गया था। उसमें बीमा कंपनी के कोऑर्डिनेटर, सह कोऑर्डिनेटर और एक एजेंट के नाम आए थे।
सरकार ने क्या कदम उठाए
अगस्त में कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए। बीमा पॉलिसी के साथ किसान आईडी जरूरी की गई। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। फर्जी पॉलिसी वाले किसानों से कहा गया कि वे उसे खुद रद्द कराएं। ऐसा न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
पुलिस का क्या कहना है
पुलिस का कहना है कि पहले सभी जरूरी सबूत और रिकॉर्ड जुटाए जाएंगे। इसके बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई होगी। सभी आरोपों की पुष्टि जांच और अदालती प्रक्रिया के बाद ही होगी। इसलिए अभी किसी को दोषी मान लेना ठीक नहीं है।
किसान क्या सावधानी रखें
यह मामला किसानों के लिए भी एक चेतावनी है। किसानों के नाम और जमीन के कागज का गलत इस्तेमाल हो सकता है। इसलिए बीमा पॉलिसी की जानकारी समय समय पर जांचते रहें। यह सामान्य सलाह है।
अपने नाम की कोई अनजान पॉलिसी या क्लेम दिखे, तो तुरंत शिकायत करें। पुलिस ने भी किसानों से ऐसे मामले बताने को कहा है। अपनी जमीन के कागज किसी अनजान व्यक्ति को न दें।
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