राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में सरसों की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी है। कृषि विभाग रबी सीजन 2026-27 के लिए प्रमाणित बीज बांटेगा। इसके तहत कुल 1,600 क्विंटल सरसों बीज उपलब्ध कराया जाएगा। यह वितरण राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत होगा। इस मिशन का उद्देश्य देश में खाद्य तेलों का उत्पादन बढ़ाना है। साथ ही, किसानों को बेहतर बीज और खेती के विकल्प उपलब्ध कराना है।
विभाग को उम्मीद है कि इस पहल से सरसों की बुवाई बढ़ेगी। करीब 40 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में खेती को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
तीन क्षेत्रों में बंटेगा बीज
कृषि विभाग ने जिले में बीज वितरण के लिए क्षेत्रवार लक्ष्य तय किए हैं। कृषि संयुक्त निदेशक यशवंती के अनुसार, बीज की आपूर्ति दो संस्थाएं करेंगी। राजस्थान राज्य बीज निगम, हनुमानगढ़ 960 क्विंटल बीज उपलब्ध कराएगा। वहीं, राष्ट्रीय बीज निगम, सूरतगढ़ से 640 क्विंटल बीज मिलेगा।
क्षेत्रवार वितरण की बात करें तो हनुमानगढ़ क्षेत्र को 770 क्विंटल बीज आवंटित किया गया है। नोहर क्षेत्र के लिए 530 क्विंटल बीज निर्धारित है। भादरा क्षेत्र को 300 क्विंटल बीज दिया जाएगा। इस तरह तीनों क्षेत्रों का कुल आवंटन 1,600 क्विंटल होता है।
किसानों को अपने क्षेत्र में उपलब्धता की जानकारी कृषि विभाग से लेनी चाहिए। इससे आवेदन और बीज प्राप्त करने की प्रक्रिया समझने में मदद मिलेगी।
किसान कैसे करें आवेदन?
योजना का लाभ लेने के लिए पात्र किसानों को आवेदन करना होगा। किसान अपने क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षक या सहायक कृषि अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। आवेदन के साथ जन आधार कार्ड की प्रति देनी होगी। इसके अलावा जमाबंदी की प्रति भी जमा करनी होगी।
आवेदन के बाद संबंधित प्रक्रिया पूरी होने पर परमिट जारी किया जाएगा। परमिट मिलने के बाद किसान निर्धारित केंद्र से बीज प्राप्त कर सकेंगे। बीज वितरण के लिए ग्राम सेवा सहकारी समिति (GSSS, Gram Seva Sahakari Samiti) और क्रय-विक्रय सहकारी समिति (KVSS, Kraya Vikraya Sahakari Samiti) का उल्लेख किया गया है।
किसानों को आवेदन से पहले अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी से जानकारी लेनी चाहिए। उनसे पात्रता, जरूरी दस्तावेज और वितरण केंद्र की पुष्टि करें। इससे अनावश्यक चक्कर लगाने से बचा जा सकता है।
कौन-सी किस्म का बीज मिलेगा?
इस योजना के तहत सरसों की आरएच-1706 किस्म उपलब्ध कराई जाएगी। यह एक उन्नत किस्म के रूप में बताई गई है। इसका विकास वर्ष 2023 में किया गया था। इसे चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने विकसित किया था।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह किस्म लगभग 140 दिनों में तैयार हो सकती है। इसकी औसत उपज करीब 37 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। इसमें तेल की मात्रा लगभग 38 प्रतिशत बताई गई है। इरूसिक अम्ल की मात्रा दो प्रतिशत से कम बताई गई है।
ये आंकड़े किस्म की बताई गई विशेषताएं हैं। खेत में वास्तविक उत्पादन मौसम, मिट्टी, सिंचाई और देखभाल पर निर्भर करेगा। इसलिए किसान अपने खेत की स्थिति के अनुसार कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें।
सरसों की बुवाई क्यों बढ़ सकती है?
हनुमानगढ़ में सरसों की खेती पहले से महत्वपूर्ण है। कृषि विभाग के अनुसार, पिछले साल जिले में 1.89 लाख हेक्टेयर में सरसों बोई गई थी। इस बार रबी सीजन में इसका रकबा बढ़ने की संभावना जताई गई है। अनुमान के मुताबिक, क्षेत्रफल 2.50 लाख से तीन लाख हेक्टेयर तक पहुंच सकता है।
इस संभावना के पीछे पानी की उपलब्धता भी अहम कारण है। खरीफ सीजन में कम बारिश और बांधों के घटते जलस्तर ने चिंता बढ़ाई है। इसका असर रबी फसलों की सिंचाई पर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में कम पानी में उगने वाली फसलों का महत्व बढ़ जाता है।
सरसों किसानों को फसल विकल्प के रूप में आकर्षित कर सकती है। लेकिन सही फैसला लेने से पहले खेत की मिट्टी और पानी की स्थिति देखना जरूरी है। बीज की किस्म के साथ बुवाई का समय और कृषि प्रबंधन भी अहम हैं।
मुफ्त बीज से किसानों को क्या लाभ?
प्रमाणित बीज किसानों को बेहतर किस्म अपनाने का अवसर देते हैं। मुफ्त मिनीकिट से शुरुआती बीज खरीदने का खर्च भी बच सकता है। इससे किसान नई किस्म को अपने खेत में आजमा सकते हैं। हालांकि, एक मिनीकिट में केवल चार किलो बीज मिलेगा।
किसान को अपनी जमीन और बुवाई की जरूरत के हिसाब से योजना बनानी चाहिए। मुफ्त बीज मिलने का मतलब पूरी खेती का खर्च माफ होना नहीं है। खाद, सिंचाई, मजदूरी और फसल सुरक्षा पर खर्च हो सकता है।
किसानों को बीज की गुणवत्ता और किस्म की जानकारी भी समझनी चाहिए। बुवाई से पहले कृषि अधिकारी से उपयुक्त दूरी और बीज दर पूछें। स्थानीय सलाह के अनुसार खेती करने से बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
खाद्य तेल उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
भारत में खाद्य तेलों की मांग को पूरा करना कृषि नीति का अहम हिस्सा है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन इसी दिशा में प्रयास करता है।
हनुमानगढ़ में सरसों बीज वितरण इस लक्ष्य से जुड़ी पहल है। जिले में बुवाई बढ़ने से तेलहन उत्पादन को प्रोत्साहन मिल सकता है। हालांकि, इसका असर फसल उत्पादन और किसानों की भागीदारी के बाद ही स्पष्ट होगा।
कृषि विभाग ने किसानों से समय पर आवेदन करने की अपील की है। इच्छुक किसान अपने नजदीकी कृषि कार्यालय से जानकारी लें। पात्रता और दस्तावेजों की पुष्टि करके ही आवेदन आगे बढ़ाएं।
ये भी पढ़ें…
राजस्थान की अलवर मंडी में बाजरा भाव बढ़ा, फिर भी किसान हरियाणा जा रहे… जानिए क्यों?
