राजस्थान के बीकानेर में शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ। यह समारोह राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय का नवम दीक्षांत समारोह था। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने इसकी अध्यक्षता की। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए पशुपालन का महत्व बताया।
राज्यपाल ने कहा कि पशुपालन भारत और राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है। इससे ग्रामीण परिवारों को आमदनी का एक महत्वपूर्ण साधन मिलता है। पशुपालन खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाता है। इससे ग्रामीण समुदायों को लगातार आजीविका के अवसर मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में पशुपालन का योगदान महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने से किसानों और पशुपालकों को लाभ मिल सकता है। ग्रामीण परिवार खेती के साथ पशुपालन करके अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
दूध उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी
राज्यपाल ने भारत के दुग्ध उत्पादन में राजस्थान की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है। देश में कई उन्नत पशु नस्लें दूध उत्पादन बढ़ाने में योगदान देती हैं। इनमें गिर, थारपारकर, साहिवाल और मुर्रा नस्लें प्रमुख हैं।
राज्यपाल के अनुसार, देश के कुल दुग्ध उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी लगभग 14.51 प्रतिशत है। इस हिस्सेदारी के साथ राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है। उत्तर प्रदेश इस मामले में पहले स्थान पर है। राज्यपाल ने इसे राजस्थान के लिए गर्व की बात बताया।
राजस्थान में पशुपालन ग्रामीण जीवन और खेती से गहराई से जुड़ा है। कई किसान फसल उत्पादन के साथ दूध का व्यवसाय भी करते हैं। इससे उन्हें खेती के अलावा कमाई का दूसरा रास्ता मिलता है। डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देना इसी वजह से जरूरी है।
राज्यपाल ने कहा कि डेयरी क्षेत्र पशुपालकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद करता है। कृषि और पशुपालन को उन्होंने एक-दूसरे का पूरक बताया। दोनों क्षेत्रों को साथ लेकर चलने से ग्रामीण परिवारों को फायदा मिल सकता है। इससे किसानों की आय के स्रोत भी बढ़ सकते हैं।
बेटियां शोध में आगे आएं
समारोह में राज्यपाल ने छात्राओं को विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। कृषि और पशुपालन से जुड़े क्षेत्रों में भी उनकी भागीदारी जरूरी है। उन्होंने छात्राओं से शोध कार्यों में आगे बढ़ने की अपील की।
पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान में पढ़ाई करने वाली छात्राएं कई क्षेत्रों में योगदान दे सकती हैं। पशुओं के स्वास्थ्य, बेहतर नस्लों और दुग्ध उत्पादन से जुड़े शोध महत्वपूर्ण हैं। ऐसे काम पशुपालकों की समस्याओं को समझने में भी मदद कर सकते हैं। हालांकि, राज्यपाल का मुख्य संदेश छात्राओं को शोध के लिए प्रोत्साहित करना था।
उन्होंने प्रतिभाशाली युवाओं को भारत की बड़ी ताकत बताया। उनके अनुसार, भारतीय युवाओं में अच्छी बौद्धिक क्षमता और कल्पनाशक्ति है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों की कई बड़ी कंपनियों में भारतीय युवा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। यह देश की प्रतिभा और क्षमता को दिखाता है।
राज्यपाल ने युवाओं से अपनी क्षमता का पूरा उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को देश की प्रगति में योगदान देना चाहिए। शिक्षा और शोध के जरिए वे समाज की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। पशुपालन जैसे क्षेत्रों में नई सोच ग्रामीण जीवन को बेहतर बना सकती है।
नई शिक्षा नीति और युवा शक्ति
राज्यपाल ने नई शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए शिक्षा के उद्देश्य पर बात की। उन्होंने कहा कि देश में बच्चों की बौद्धिक क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। नई शिक्षा नीति पहली कक्षा से बच्चों के बौद्धिक विकास को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखती है।
उन्होंने कहा कि भारत में युवाओं की बड़ी आबादी मौजूद है। यह देश के लिए एक महत्वपूर्ण ताकत है। युवाओं को अपनी योग्यता का इस्तेमाल देश को आगे बढ़ाने में करना चाहिए। इसके लिए पढ़ाई के साथ जिम्मेदारी और सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है।
राज्यपाल ने शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं माना। उनके अनुसार, शिक्षा से विवेक, समझ, नैतिकता और ईमानदारी का विकास होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से इन मूल्यों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षित लोगों को देश की प्रगति में अपना योगदान देना चाहिए।
युवाओं को नशे से दूर रहने की अपील
राज्यपाल ने युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति भारत की महत्वपूर्ण ताकत है। उनके अनुसार, कुछ विदेशी ताकतें युवाओं को नशे की ओर धकेलने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने इस तरह के प्रयासों से सतर्क रहने की अपील की।
उन्होंने जागरूक नागरिकों से युवाओं को नशे से दूर रखने में मदद करने को कहा। उनके मुताबिक, इस दिशा में समाज के हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नशा मुक्त भारत की परिकल्पना का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे सफल बनाने के लिए सामूहिक योगदान की जरूरत बताई।
राज्यपाल का संदेश विद्यार्थियों की शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी, दोनों से जुड़ा था। उन्होंने युवाओं को अपनी प्रतिभा सही दिशा में लगाने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि शिक्षा का लाभ व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इससे समाज और देश को भी फायदा मिलना चाहिए।
कन्या छात्रावास का लोकार्पण
दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में एक कन्या छात्रावास का लोकार्पण भी हुआ। इस छात्रावास के निर्माण पर 2.55 करोड़ रुपए खर्च किए गए। यह कार्यक्रम समारोह के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित हुआ।
इसके अलावा, राज्यपाल ने विश्वविद्यालय से जुड़ी कई सामग्री का लोकार्पण किया। इनमें विश्वविद्यालय का वर्चुअल टूर भी शामिल था। उन्होंने ‘राजुवास अवलोकन’ नाम की पुस्तिका का भी लोकार्पण किया। विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन 2025-26 भी जारी किया गया।
समारोह में राजुवास न्यूजलेटर का नया अंक भी जारी हुआ। इन सामग्रियों के जरिए विश्वविद्यालय की गतिविधियों और कामकाज की जानकारी सामने आती है। वार्षिक प्रतिवेदन में विश्वविद्यालय की प्रगति से जुड़ी जानकारी शामिल थी। कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
623 विद्यार्थियों को मिली उपाधि
विश्वविद्यालय के नवम दीक्षांत समारोह में कुल 623 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 462 विद्यार्थियों को स्नातक की उपाधियां मिलीं। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के 141 विद्यार्थियों को उपाधियां दी गईं। वहीं, 20 विद्यार्थियों को विद्या-वाचस्पति की उपाधि प्रदान की गई।
इन आंकड़ों के अनुसार, स्नातक उपाधियां पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या सबसे अधिक रही। स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को भी समारोह में सम्मानित किया गया। विद्या-वाचस्पति की उपाधि पाने वाले 20 विद्यार्थी भी इस उपलब्धि का हिस्सा बने। सभी श्रेणियों को मिलाकर उपाधियों की कुल संख्या 623 रही।
समारोह में पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पदक भी दिए गए। कुल 42 पदक प्रदान किए गए। इनमें दो विद्यार्थियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक मिला। इसके अलावा, 36 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। दो विद्यार्थियों को रजत पदक और दो विद्यार्थियों को कांस्य पदक मिला। इस तरह स्वर्ण, रजत, कांस्य और कुलाधिपति स्वर्ण पदकों की संख्या मिलाकर 42 हुई।
पशुपालन शिक्षा का बढ़ता महत्व
इस दीक्षांत समारोह में शिक्षा, शोध और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे सामने आए। राज्यपाल ने पशुपालन को ग्रामीण आजीविका से जोड़कर देखने पर जोर दिया। उन्होंने छात्राओं को शोध के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही युवाओं से सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान की पढ़ाई ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयोगी हो सकती है। पशुओं के स्वास्थ्य और बेहतर उत्पादन से पशुपालकों को लाभ मिल सकता है। शोध से इन क्षेत्रों की चुनौतियों को समझने के नए अवसर भी मिलते हैं। हालांकि, इन लाभों के लिए शिक्षा के साथ व्यावहारिक काम भी जरूरी है।
समारोह में कन्या छात्रावास का लोकार्पण भी विश्वविद्यालय की गतिविधियों का हिस्सा रहा। वहीं, उपाधियां और पदक विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों को सामने लाए। राज्यपाल का संदेश शिक्षा को समाज और देश की जरूरतों से जोड़ने पर केंद्रित रहा। पशुपालन, शोध और युवा शक्ति इस आयोजन के प्रमुख विषय रहे।
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