राज्य में पशुपालन और डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने की तैयारी है। इसके लिए गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना पर जोर दिया जा रहा है। योजना के तहत श्रेष्ठ दुग्ध उत्पादक पशुपालकों को नकद पुरस्कार मिलेगा। पहले स्थान पर आने वाले पशुपालक को एक लाख रुपए दिए जाएंगे।
दूसरे स्थान के विजेता को 50 हजार रुपए मिलेंगे। तीसरे स्थान पर रहने वाले पशुपालक को 25 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। यह जानकारी 22 अक्टूबर 2026 को इंदौर में हुई समीक्षा बैठक में सामने आई। बैठक की अध्यक्षता कृषि उत्पादन आयुक्त केसी गुप्ता ने की।
बैठक में पशुपालन, डेयरी विकास और संबंधित विभागों के कामकाज की समीक्षा हुई। पशुओं की नस्ल सुधारने और दूध उत्पादन बढ़ाने पर चर्चा की गई। पशुओं के पोषण, स्वास्थ्य, उपचार और टीकाकरण को भी अहम माना गया। अधिकारियों को इन विषयों पर पशुपालकों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए।
गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना
राज्य सरकार ने भारतीय उन्नत नस्ल के गोवंश को बढ़ावा देने के लिए यह योजना शुरू की है। इसका मकसद बेहतर नस्ल के पशुओं के पालन को प्रोत्साहित करना है। साथ ही, दूध उत्पादन में अच्छा प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को पहचान देना है। बैठक में बताया गया कि प्रतियोगिता गोवर्धन पूजा के अवसर पर आयोजित होगी। योजना के तहत वृंदावन गांव के पशुपालकों की गायों को शामिल करने का उल्लेख है।
उन्नत नस्ल के गोवंश पर जोर
समीक्षा बैठक में उन्नत नस्ल के गोवंश पालन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। कृषि उत्पादन आयुक्त के.सी. गुप्ता ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने पशुपालकों को नस्ल सुधार, पोषण और पशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की बात कही।
बेहतर नस्ल का चयन डेयरी व्यवसाय में महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन केवल नस्ल के आधार पर दूध उत्पादन तय नहीं होता। पशु का स्वास्थ्य, आहार, पानी और देखभाल भी परिणाम को प्रभावित करते हैं। इसलिए पशुपालकों को इन सभी बातों पर ध्यान देना होगा।
कामधेनु योजना से डेयरी को मदद
बैठक में बताया गया कि डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत डेयरी शुरू करने के लिए ऋण सहायता दी जाती है। इस योजना में एक इकाई में एक ही नस्ल के गाय या भैंसवंशीय पशु रखे जाते हैं। अधिकारियों को योजना का अधिक प्रचार करने के निर्देश दिए गए।
डेयरी शुरू करने से पहले पशुपालकों को अपनी आर्थिक स्थिति का आकलन करना चाहिए। पशुओं की खरीद, चारा, पानी, श्रम और इलाज पर खर्च होता है। दूध की बिक्री और भुगतान व्यवस्था भी समझना जरूरी है। ऋण लेने से पहले उसकी शर्तों और चुकौती योजना की जानकारी लेनी चाहिए।
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
बैठक में इंदौर संभाग में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को उत्पादन की वृद्धि दर नौ प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने के निर्देश दिए गए। इंदौर सहकारी दुग्ध संघ को दूध संकलन बढ़ाने के लिए भी कहा गया।
दुग्ध संघ को संभाग के सभी जिलों में नए पार्लर खोलने के निर्देश दिए गए। इन पार्लरों में दुग्ध उत्पादों की बिक्री की योजना है। इससे दूध से बने उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाने के नए रास्ते खुल सकते हैं। हालांकि, नए पार्लरों की संख्या और स्थापना की समय-सीमा की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
पशु आहार और हरे चारे पर ध्यान
बैठक में पशुओं के लिए हरे चारे और संतुलित आहार की व्यवस्था पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि पशुओं को उचित पोषण मिले। हरा चारा पशुओं के आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
जहां हरे चारे की कमी है, वहां साईलेज के उपयोग की जानकारी दी गई। साईलेज चारे को सुरक्षित रखने की एक विधि है। इसमें हरे चारे को नियंत्रित तरीके से संरक्षित किया जाता है। जरूरत के समय इसे पशुओं के आहार में इस्तेमाल किया जा सकता है।
पशुओं को केवल चारा देना ही पर्याप्त नहीं होता। आहार में पोषक तत्वों का संतुलन भी जरूरी है। पशु की उम्र, नस्ल और दूध उत्पादन के अनुसार आहार की जरूरत बदल सकती है। पशुपालक पशु चिकित्सक या पोषण विशेषज्ञ से उचित सलाह ले सकते हैं।
टीकाकरण और नस्ल सुधार
बैठक में पशु उपचार, टीकाकरण और कृत्रिम गर्भाधान जैसे विषयों की समीक्षा हुई। कृत्रिम गर्भाधान से नियोजित प्रजनन और नस्ल सुधार में मदद मिल सकती है। इसके लिए प्रशिक्षित कर्मियों और सही समय पर सेवा की जरूरत होती है।
बैठक में दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान और किसान कार्ड वितरण पर भी चर्चा हुई। गोबर और गौमूत्र से जैविक खाद बनाने के विषय को भी शामिल किया गया। राष्ट्रीय पशुधन मिशन और पशुपालन से जुड़ी अन्य योजनाओं की समीक्षा हुई।
सहकारी दुग्ध संघ की व्यवस्था
बैठक में इंदौर सहकारी दुग्ध संघ के कामकाज की जानकारी भी दी गई। संघ के डेयरी संयंत्र की प्रसंस्करण क्षमता चार लाख लीटर प्रतिदिन बताई गई। यहां दूध के अलावा श्वेत मक्खन और दुग्ध चूर्ण जैसे उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं।
संघ के अनुसार, नौ जिलों में उसकी 2,637 दुग्ध समितियां हैं। ये समितियां पशुपालकों से दूध इकट्ठा करने का काम करती हैं। बैठक में बताया गया कि संबंधित हितग्राहियों को समय पर भुगतान किया जा रहा है।
दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। भारत सरकार की राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (National Programme for Dairy Development, NPDD) परियोजना के तहत 23 नए बीएमसी (Bulk Milk Cooler) स्थापित किए गए हैं। इनका उद्देश्य संकलित दूध की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करना है।
पशु मेलों और बिक्री केंद्रों को बढ़ावा
अधिकारियों को संभाग के सभी जिलों में पशु मेलों और पशु हाट को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए। इन आयोजनों के जरिए पशुओं की खरीद-बिक्री के अवसर मिल सकते हैं। इससे पशुपालकों को पशुओं के बारे में जानकारी जुटाने का मौका भी मिल सकता है।
पशु खरीदते समय स्वास्थ्य, उम्र और नस्ल की जानकारी जांचना जरूरी है। दूध उत्पादन से जुड़े दावों की पुष्टि करना भी उपयोगी होगा। पशु के टीकाकरण और उपचार का रिकॉर्ड देखना चाहिए। खरीद के बाद देखभाल और आहार की व्यवस्था भी पहले से तय होनी चाहिए।
बैठक में मुख्यमंत्री गौसेवा योजना के तहत मनरेगा मद से स्वीकृत गौशालाओं की जानकारी भी दी गई। इसके साथ हिरण्यगर्भा अभियान और लखपति गौपालक दीदी योजना पर चर्चा हुई। इन पहलों से जुड़े कामों की समीक्षा भी बैठक का हिस्सा रही।
पशुपालकों के लिए आगे क्या?
बैठक के निर्देशों का मुख्य उद्देश्य पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करना है। इसके लिए नस्ल सुधार, संतुलित आहार, स्वास्थ्य सेवाओं और दूध संकलन पर ध्यान दिया जा रहा है। पुरस्कार योजना के जरिए बेहतर दुग्ध उत्पादन करने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहन देने की तैयारी है।
पशुपालकों के लिए योजनाओं की जानकारी और समय पर सेवाएं मिलना जरूरी है। सरकारी सहायता का लाभ लेने से पहले पात्रता और शर्तों की पुष्टि करनी चाहिए। डेयरी व्यवसाय में निवेश से पहले लागत और संभावित कमाई का आकलन भी जरूरी है।
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