महाराष्ट्र के बीड में एक किसान का अनोखा विरोध चर्चा में है। केज तालुका के वरपगांव के किसान विजयकुमार खंडारे ने मनीऑर्डर भेजा। यह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम है। रकम 5,000 रुपए है। साथ में उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी अमृता फडणवीस के लिए साड़ी भी भेजी। यह सब उन्होंने डाक के जरिए किया। खबर के मुताबिक यह विरोध का उनका अपना तरीका है।
क्यों चुना ऐसा विरोध
खंडारे का कहना है कि इतनी कम रकम में दिवाली मनाना कितना मुश्किल है। यही बात दिखाने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया। मनीऑर्डर और साड़ी के जरिए उन्होंने अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वे दिन रात मेहनत करते हैं। फिर भी हाथ में कुछ नहीं बचता। यह बात उनके बयान के हवाले से सामने आई है।
सरकार की 5,000 रुपए की मदद
सरकार ने दिवाली पर 5,000 रुपए की मदद घोषित की थी। दावा है कि यह रकम भी अभी खातों में नहीं पहुंची। खंडारे ने इस मदद को घाव पर नमक छिड़कने जैसा बताया। यानी उनके हिसाब से यह रकम नुकसान के सामने बहुत कम है। मनीऑर्डर भेजकर उन्होंने यही संदेश देना चाहा। यह बात उन्होंने अपने तरीके से रखी है।
बीड में सूखे के हालात
बता दें कि बीड में भीषण सूखे जैसे हालात हैं। बारिश नहीं हुई और तेज धूप पड़ी। इससे फसलें सूख गईं। इस वजह से किसानों में नाराजगी है। महंगाई और फसल नुकसान को देखते हुए 5,000 रुपए पर सवाल उठ रहे हैं।
पांच एकड़ की सोयाबीन सूख गई
खंडारे के पास पांच एकड़ जमीन है। इस साल उन्होंने पूरी जमीन पर सोयाबीन बोई थी। बारिश न होने से पूरी फसल सूख गई। उन्होंने बताया कि खेती में उन्हें भारी घाटा हुआ है। खबर में इसका पूरा हिसाब भी दिया गया है। यह हिसाब किसान के दावे के तौर पर सामने आया है।
बुवाई, जुताई, छिड़काव, कटाई और मड़ाई पर करीब 20,000 रुपए खर्च हुए। खाद की पांच बोरियों पर 7,500 रुपए लगे। खबर में कुल खर्च 40,000 रुपए बताया गया है।
कितनी उपज मिली
पांच एकड़ से करीब पौने तीन क्विंटल सोयाबीन ही निकली। इसकी कीमत 21,000 रुपए बताई गई। किसान को खर्च के मुकाबले 19,000 रुपए का घाटा हुआ। यानी 40,000 रुपए खर्च करके उन्हें 21,000 रुपए की उपज मिली। ।
खंडारे ने मांग की है कि सूखाग्रस्त किसानों को तुरंत और पर्याप्त मदद मिले। उनका कहना है कि इससे किसान त्योहार मना सकेंगे। वे अपनी जरूरतें भी पूरी कर सकेंगे। उनकी नजर में 5,000 रुपए की रकम काफी नहीं है। हालांकि खबर में यह नहीं बताया गया कि वे कितनी मदद चाहते हैं।
सरकार का पक्ष नहीं आया
फिलहाल इस मामले पर सरकार या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं है। यह मामला सूखे में फसल नुकसान की मुश्किल को सामने रखता है। किसान का हिसाब बताता है कि खर्च निकालना भी कठिन हो गया।
हालांकि यह एक किसान का अनुभव है। सभी किसानों के नुकसान की तस्वीर अलग हो सकती है। सरकारी मदद के बारे में सही जानकारी कृषि विभाग या तहसील से लें।
अब देखना होगा कि सरकार इस मामले पर क्या कहती है। यह भी देखना होगा कि 5,000 रुपए की मदद खातों में कब पहुंचती है। सूखाग्रस्त किसानों के लिए और बड़ी मदद की मांग पर भी नजर रहेगी।
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