किसान की बात,सूत्र के साथ

मराठवाड़ा में सूखे का संकट, आठ जिलों में आठ महीने के भीतर 653 किसानों ने की आत्महत्या, बीड़ में सबसे ज्यादा

newz@gmail.com | Oct 16, 2026, 18:43 IST

मराठवाड़ा के आठ जिलों में जनवरी से अगस्त 2026 तक 653 किसानों ने आत्महत्या की। सूखा, फसल नुकसान और कर्ज को इसकी वजह बताया जा रहा है। हर मामले की जांच बाकी है। इस मामले पर विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा और मृतकों के लिए 10 लाख के मुआवजे की मांग की।

किसान आत्महत्या

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके में सूखे का असर किसानों पर भारी पड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक आठ जिलों में 653 किसानों ने आत्महत्या की। यह आंकड़ा 1 जनवरी से 31 अगस्त 2026 तक का है। यह आंकड़ा गहरी चिंता पैदा करता है। कम बारिश, फसल का नुकसान और कर्ज वजह बताए जा रहे हैं। सरकार और विपक्ष दोनों ने अपनी बात रखी है। हर मामले की अलग से जांच की जरूरत भी बताई गई है।

मराठवाड़ा में आत्महत्या के 653 मामले

मिली जानकारी के मुताबिक मराठवाड़ा के आठ जिलों में 653 आत्महत्याएं दर्ज हुईं। यह आठ महीने की अवधि है। हर मामले के हालात की अलग जांच जरूरी है।

सबसे ज्यादा 149 मामले बीड़ जिले में बताए गए हैं। छत्रपति संभाजीनगर में 138 और धाराशिव में 88 मामले दर्ज हुए। नांदेड़ में 82 और जालना में 61 मामले बताए गए हैं। लातूर में 46, परभणी में 45 और हिंगोली में 44 मामले हैं। आठों जिलों का जोड़ 653 बैठता है। बीड़ और छत्रपति संभाजीनगर को जोड़ें तो 287 मामले बनते हैं। यह कुल का करीब 44 प्रतिशत है।

सूखे से फसलों को नुकसान

दरअसल, इस साल बारिश कम रही। इससे खड़ी फसलें खराब हुईं और बढ़त रुक गई। कई खेतों में पानी नहीं है और किसान फसल बचा नहीं पा रहे।

अदरक और कपास को नुकसान की बात कही गई है। बागवानी में मौसंबी और अनार पर भी असर बताया गया है। गांवों में पशुओं के चारे और पीने के पानी की भी कमी है।

खेती की कमाई घटी है, जबकि खर्च और कर्ज बढ़ा है। ऐसे में परिवार के सामने रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाता है। यह दबाव कई किसानों को तोड़ देता है।

सरकार किसानों की मदद को तैयार

महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट ने किसानों की तकलीफ मानी है। उन्होंने कहा कि सरकार मदद के लिए तैयार है। उनके मुताबिक आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को नियमों के तहत सहायता मिलेगी। शिरसाट के मुताबिक 1972 के बाद पहली बार इतना गंभीर सूखा पड़ा है। उन्होंने बताया कि सरकार प्रभावित इलाकों की समीक्षा कर रही है।

हर मृतक के परिवार को मिले 10 लाख

शिवसेना यूबीटी (Uddhav Balasaheb Thackeray) के नेता अंबादास दानवे ने बात रखी। उनके मुताबिक कई जगह पानी की कमी है और टैंकर जरूरी हैं। उन्होंने आशंका जताई कि नवंबर से गर्मी तक हालात और बिगड़ सकते हैं। उनका आरोप है कि सरकार किसानों की समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही।

महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सरकार की आलोचना की। उनका आरोप है कि विभागों के लिए नई गाड़ियां खरीदी जा रही हैं। उनके मुताबिक किसानों को राहत कम मिल रही है। उन्होंने राज्य सरकार को जिम्मेदार बताया और मामला दर्ज करने की मांग की।

जालना के कांग्रेस सांसद डॉ. कल्याण काले ने कई मांगें रखीं। उन्होंने आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को 10 लाख रुपए की मदद मांगी। बच्चों की स्कूल और कॉलेज फीस माफ करने की मांग भी की।

बागवानी फसलों के नुकसान पर उन्होंने प्रति हेक्टेयर 2 लाख रुपए मांगे हैं। ये सभी बातें विपक्षी नेताओं के आरोप और मांगें हैं। रिपोर्ट में सरकार की ओर से इन पर अलग जवाब नहीं दिया गया।

सूखे की जांच की प्रक्रिया

मराठवाड़ा के संभागीय आयुक्त जी. श्रीकांत ने सूखे के आकलन की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने ट्रिगर वन और ट्रिगर टू का जिक्र किया। इसके बाद केंद्र की टीम इलाकों का दौरा कर रिपोर्ट देती है।

आयुक्त के मुताबिक आकलन में सिर्फ फसल का नुकसान नहीं देखा जाता। चारे, पीने के पानी और अनाज की उपलब्धता को भी परखा जाता है। इसलिए पूरी प्रक्रिया में समय लग सकता है।

सिल्लोड के एक परिवार का हाल

इस बीच, सिल्लोड तहसील के एक किसान परिवार की पीड़ा सामने आई। परिवार के मुताबिक उन पर करीब 1 लाख रुपए का कर्ज था। अदरक की फसल सड़ गई और कपास पर बारिश की कमी की मार पड़ी।

परिवार ने बताया कि खेत में पानी की कमी से फसल खराब हुई। इस साल घर में खेती से कोई कमाई नहीं हुई। खेती और घर के खर्च के लिए कर्ज लेना पड़ा।

पीछे तीन छोटे बच्चे हैं। परिवार ने बच्चों की परवरिश के लिए सरकार से आर्थिक मदद मांगी है। हम संवेदना के साथ इस परिवार की पहचान उजागर नहीं कर रहे।

कृषि अधिकारी की अपील

सिल्लोड के कृषि अधिकारी ने किसानों से धैर्य रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कोई भी कठोर कदम न उठाएं। उनके मुताबिक कुछ आत्महत्या के मामलों की जांच चल रही है।

अधिकारी ने यह भी कहा कि सरकार मदद के लिए तैयार है। किसानों को अपनी परेशानी स्थानीय कृषि कार्यालय या ग्राम पंचायत तक पहुंचानी चाहिए। मुश्किल वक्त में अकेले नहीं रहना चाहिए।

मदद के लिए कहां संपर्क करें

यह जानकारी सामान्य है, खबर का हिस्सा नहीं। अगर आप या कोई जानने वाला बहुत परेशान है, तो अकेले न रहें। तुरंत किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें।

सरकार की टेली मानस (Tele-MANAS) हेल्पलाइन पर मुफ्त परामर्श मिलता है। इसका नंबर 14416 है। आसपास खतरा हो तो तुरंत 112 पर कॉल करें। कर्ज और खेती की परेशानी के लिए स्थानीय कृषि कार्यालय से भी संपर्क करें।

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