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जल आयोग की रिपोर्ट में खुलासा: देश के जलाशयों में पानी 24.5 फीसदी घटा, रबी बुवाई पर बढ़ी चिंता

newz@gmail.com | Oct 23, 2026, 18:40 IST

देश के 178 प्रमुख जलाशयों में पानी पिछले साल से करीब 24.5 फीसदी कम है। दक्षिण भारत की स्थिति सबसे कमजोर है और रबी बुवाई धीमी है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट में यह आंकड़ा सामने आया है।

जलाशय

बड़े जलाशयों में पानी की कमी ने रबी सीजन की चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय जल आयोग की 15 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में यह दिखा है। रिपोर्ट 178 प्रमुख जलाशयों के आंकड़ों पर आधारित है। इन जलाशयों में अभी 126.717 अरब घन मीटर (Billion Cubic Metre) पानी है। यह उनकी कुल उपयोगी भंडारण क्षमता का 68.58 फीसदी है। पर पिछले साल और सामान्य स्तर से तुलना करने पर तस्वीर कमजोर दिखती है।

जलाशयों में कितना पानी है

रिपोर्ट के मुताबिक 178 प्रमुख जलाशयों में 126.717 अरब घन मीटर पानी बचा है। यह उनकी उपयोगी क्षमता का 68.58 फीसदी बताया गया है। यानी जलाशय अभी पूरी तरह भरे नहीं हैं। 68.58 फीसदी के हिसाब से कुल क्षमता करीब 184.8 अरब घन मीटर बैठती है। यह सिर्फ अनुमान है।

पिछले साल से कितना कम

पिछले साल इसी अवधि में इन जलाशयों में 167.910 अरब घन मीटर पानी था। इस साल का भंडार उसका 75.47 फीसदी है। यानी करीब 24.5 फीसदी कमी है। दोनों आंकड़ों का अंतर करीब 41.2 अरब घन मीटर है।

सामान्य स्तर से भी नीचे

जलाशयों का भंडार पिछले दस साल के सामान्य स्तर से भी कम है। रिपोर्ट में दस साल का सामान्य भंडार 151.647 अरब घन मीटर बताया गया है। मौजूदा भंडार इसका 83.56 फीसदी है। इस तुलना में कमी करीब 16.4 फीसदी की है। अंतर करीब 24.9 अरब घन मीटर का बैठता है।

दक्षिण भारत की स्थिति कमजोर

रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण भारत के जलाशयों की स्थिति सबसे कमजोर है। लेकिन किसी राज्य या जलाशय का नाम नहीं दिया गया। उनके आंकड़े भी नहीं बताए गए। इसलिए साफ नहीं कि किस राज्य के किसानों पर असर ज्यादा होगा। इसके लिए क्षेत्रवार रिपोर्ट का इंतजार करना होगा।

रबी बुवाई पर चिंता क्यों

रबी में गेहूं, चना, सरसों और दूसरी फसलों को सिंचाई की जरूरत पड़ती है। कम पानी का असर आगे के कृषि सीजन पर पड़ने की आशंका है। यह आशंका खबर में उठाई गई चिंता के रूप में है। रबी बुवाई की गति पिछले साल से धीमी है। हालांकि धीमेपन का कोई आंकड़ा नहीं दिया गया। बोए गए क्षेत्र का डेटा भी नहीं है।

असर कितना होगा, यह किस पर निर्भर

खबर में यह भी है कि फसलों पर असर कई बातों पर निर्भर करेगा। इनमें स्थानीय बारिश, मिट्टी की नमी, भूजल और सिंचाई की सुविधा शामिल हैं। यानी हर इलाके में हालात एक जैसे नहीं होंगे। इसलिए हर किसान को अपने इलाके की स्थिति अलग से जांचनी चाहिए।

देश में बुवाई की ताजा तस्वीर

एक अन्य रिपोर्ट में 16 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़े आए थे। इसके मुताबिक देश में रबी की बुवाई 3.43 लाख हेक्टेयर में हुई। पिछले साल इसी समय यह 4.65 लाख हेक्टेयर थी। यानी करीब 1.22 लाख हेक्टेयर की कमी रही। तब देश में गेहूं की बुवाई शुरू नहीं हुई थी। दोनों रिपोर्टों की तारीखें लगभग मिलती हैं।

राजस्थान-मध्य प्रदेश के किसान क्यों देखें

राजस्थान में 21 अक्टूबर तक रबी की बुवाई लक्ष्य का 5.16 फीसदी हुई है। वहां सरसों आगे चल रही है। इंदौर संभाग के चार जिले कम बारिश से प्रभावित हैं। इन राज्यों के लिए जलाशयों की रिपोर्ट में अलग आंकड़े नहीं दिए गए हैं। फिर भी देश का समग्र भंडार किसानों के लिए संकेत जरूर है।

किसानों के लिए क्या मायने

किसान अपने इलाके की नहर और सिंचाई व्यवस्था की जानकारी पहले लें। अगर पानी सीमित मिलने की आशंका हो, तो कृषि विभाग से सलाह लें। कम पानी में तैयार होने वाली फसल और किस्म के बारे में पूछें। बुवाई की योजना स्थानीय हालात देखकर बनाएं। सिर्फ राष्ट्रीय आंकड़े देखकर घबराने की जरूरत नहीं है।

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