किसान की बात,सूत्र के साथ

सागर के किसानों को खेत पर मिलेगी मिट्टी जांच सुविधा, इफको ने की मोबाइल लैब शुरू

Pawan Modiya | Oct 26, 2026, 13:34 IST

मध्य प्रदेश के सागर जिले में इफको की सचल मृदा परीक्षण प्रयोगशाला शुरू हुई है। वाहन अगले एक सप्ताह तक अलग-अलग विकासखंडों में जाकर खेतों की मिट्टी के नमूनों की जांच करेगा। इससे किसानों को संतुलित खाद इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।

लैब

मध्य प्रदेश के सागर जिले के किसानों के लिए मिट्टी जांच की सुविधा शुरू हुई है। अब सचल प्रयोगशाला किसानों के खेतों तक पहुंचकर मिट्टी के नमूनों की जांच करेगी। इससे किसानों को अपनी जमीन में मौजूद पोषक तत्वों की जानकारी मिल सकेगी। यह पहल खाद के संतुलित इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है।

इस सुविधा का उद्देश्य खेती की लागत घटाने और मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद करना है। मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी या अधिकता का असर फसल पर पड़ सकता है। सही जानकारी मिलने से किसान जरूरत के अनुसार खाद चुन सकते हैं। इससे बिना जरूरत खाद डालने पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है।

सचल लैब को दिखाई हरी झंडी

सागर जिले में 25 अक्टूबर 2026 को इस सचल प्रयोगशाला का शुभारंभ किया गया। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में कृषि विभाग और सहकारी संस्थाओं के अधिकारी भी मौजूद रहे।

इस अवसर पर अपर कलेक्टर अविनाश रावत उपस्थित थे। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उपसंचालक राजेश त्रिपाठी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। जिला विपणन संघ के मंडल प्रबंधक रोहित बघेल ने भी भाग लिया। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नीरज दुरेजा भी मौजूद रहे।

इसके अलावा कृषि विभाग के सहायक संचालक अनिल राय और जयदत्त शर्मा उपस्थित थे। कृषि विभाग के तकनीकी सहायक भूपेंद्र राजपूत ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इफको के क्षेत्रीय अधिकारी प्रतीक गुप्ता भी इस अवसर पर मौजूद रहे।

एक सप्ताह तक चलेगा अभियान

इफको के क्षेत्रीय अधिकारी प्रतीक गुप्ता ने अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सचल प्रयोगशाला अगले एक सप्ताह तक जिले में भ्रमण करेगी। इस दौरान वाहन अलग-अलग विकासखंडों में पहुंचेगा। वहां किसानों के खेतों की मिट्टी के नमूनों की जांच की जाएगी।

इस व्यवस्था से किसानों को मिट्टी जांच के लिए दूर जाने की जरूरत कम हो सकती है। खेतों के पास ही नमूने लेने से जांच की सुविधा अधिक सुलभ होगी। हालांकि, प्रत्येक गांव तक पहुंचने का समय और तरीका स्थानीय कार्यक्रम पर निर्भर करेगा। किसानों को अपने क्षेत्र में वाहन के दौरे की जानकारी संबंधित अधिकारियों से लेनी चाहिए।

इस पहल का एक अहम हिस्सा किसानों को जागरूक करना भी है। मिट्टी की रिपोर्ट केवल जानकारी देने के लिए नहीं होती। इसके आधार पर खाद की सही मात्रा तय करने में मदद मिलती है। किसान फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार खेती की योजना बना सकते हैं।

मिट्टी की जांच क्यों जरूरी?

हर खेत की मिट्टी एक जैसी नहीं होती। किसी खेत में नाइट्रोजन की कमी हो सकती है। दूसरे खेत में फास्फोरस या पोटाश की जरूरत अलग हो सकती है। सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी भी फसल के विकास को प्रभावित कर सकती है।

किसान अक्सर फसल की जरूरत समझकर खाद डालते हैं। लेकिन केवल अनुमान के आधार पर खाद डालना हमेशा सही नहीं होता। मिट्टी की जांच से उसमें मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति समझने में मदद मिलती है। इससे खाद के इस्तेमाल को बेहतर तरीके से तय किया जा सकता है।

मिट्टी की जांच के बाद किसान को रिपोर्ट के अनुसार खाद इस्तेमाल करनी चाहिए। सही मात्रा में खाद देने से अनावश्यक खर्च कम करने में मदद मिल सकती है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी सहायता मिलती है। फसल की उत्पादकता सुधारने की दिशा में भी यह उपयोगी कदम है।

खाद का खर्च कैसे घटेगा?

खेती में खाद और उर्वरकों पर होने वाला खर्च किसानों की लागत का हिस्सा है। बिना जरूरत खाद डालने से यह खर्च बढ़ सकता है। वहीं, जरूरी पोषक तत्वों की कमी रहने पर फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। मिट्टी परीक्षण इन दोनों स्थितियों को समझने में मदद करता है।

उदाहरण के लिए, किसी खेत में एक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद हो सकता है। ऐसी स्थिति में किसान को उस तत्व की जरूरत से ज्यादा खाद डालने से बचना चाहिए। दूसरी ओर, किसी तत्व की कमी मिलने पर उसकी पूर्ति की योजना बनाई जा सकती है। इस तरह खाद का इस्तेमाल मिट्टी की वास्तविक जरूरत के आधार पर हो सकता है।

हालांकि, मिट्टी परीक्षण से अपने आप लागत कम होने की गारंटी नहीं मिलती। किसान को जांच रिपोर्ट की सिफारिशों का सही तरीके से पालन करना होगा। खाद की कीमत, फसल, मौसम और सिंचाई की स्थिति भी लागत पर असर डालती है। इसलिए रिपोर्ट के साथ कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेना उपयोगी रहेगा।

किसानों को क्या करना चाहिए?

किसानों को अपने खेत की मिट्टी की जांच नियमित रूप से करानी चाहिए। सचल प्रयोगशाला उनके क्षेत्र में आए तो वे इस सुविधा की जानकारी ले सकते हैं। मिट्टी का नमूना सही तरीके से लेना भी जरूरी है। गलत नमूने से मिलने वाली रिपोर्ट खेत की वास्तविक स्थिति नहीं दिखा सकती।

किसान को खेत के अलग-अलग हिस्सों की मिट्टी में अंतर होने पर ध्यान देना चाहिए। नमूना लेते समय साफ उपकरणों का इस्तेमाल करना उपयोगी है। खाद डालने के तुरंत बाद नमूना लेने से बचने की सलाह दी जाती है। मिट्टी बहुत गीली या बहुत सूखी होने पर भी नमूना लेने में सावधानी रखनी चाहिए।

जांच रिपोर्ट मिलने के बाद उसे संभालकर रखना चाहिए। अगली फसल के लिए खाद की योजना बनाते समय रिपोर्ट काम आ सकती है। किसान को यह भी समझना चाहिए कि अलग-अलग फसलों की पोषक तत्वों की जरूरत अलग होती है। इसलिए एक ही मात्रा में खाद हर खेत और हर फसल के लिए सही नहीं होती।

मिट्टी की सेहत पर जोर

मिट्टी खेती का सबसे अहम आधार है। लगातार खेती और पोषक तत्वों के असंतुलित इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए मिट्टी की सेहत पर नियमित ध्यान देना जरूरी है। मिट्टी परीक्षण इस दिशा में किसानों की मदद कर सकता है।

संतुलित उर्वरक इस्तेमाल का मतलब केवल रासायनिक खाद कम करना नहीं है। इसका मतलब है कि फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार पोषक तत्व दिए जाएं। जहां उपयुक्त हो, वहां जैविक खाद और दूसरे स्रोतों का इस्तेमाल भी कृषि सलाह के अनुसार किया जा सकता है। इससे मिट्टी की सेहत बनाए रखने की योजना बेहतर बन सकती है।

सागर में शुरू हुई सचल प्रयोगशाला इसी उद्देश्य से किसानों तक पहुंचने का प्रयास है। किसानों को खेत के पास जांच सुविधा मिलने से वैज्ञानिक खेती अपनाने में मदद मिल सकती है। इसके साथ नियमित जागरूकता और रिपोर्ट को समझने में सहायता भी जरूरी है।

ये भी पढ़ें…

MP के 16.70 लाख किसानों के दिवाली गिफ्ट… खातों में भेजे फसल बीमा योजना के 317.86 करोड़, सिंचाई परियोजना भी शुरू

मध्यप्रदेश में गेहूं, चना और सरसों के प्रमाणित बीज का पर्याप्त भंडार, यहां से खरीदें किसान

मुरैना के चंबल बीहड़ों में औषधीय पौधों की खेती से रोजगार की उम्मीद, पलायन भी रुकेगा

एमपी में चार सिंचाई परियोजनाएं मंजूर, 3,076 करोड़ रुपए होंगे खर्च

GENERAL Pawan Modiya

Read more