मध्य प्रदेश में चार सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी मिल गई है। इन परियोजनाओं पर कुल 3,076.37 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। ये परियोजनाएं बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली जिलों में बनेंगी। सरकार का कहना है कि निर्माण आने वाले महीनों में शुरू होगा। परियोजनाओं से रबी और खरीफ दोनों सीजन में सिंचाई बढ़ने की उम्मीद है।
कैबिनेट बैठक में क्या हुआ
भोपाल में हुई कैबिनेट बैठक में सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की। बैठक में कुछ और प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। चार सिंचाई परियोजनाओं पर कुल खर्च 3,076.37 करोड़ रुपए तय किया गया है।
कौन सी चार परियोजनाएं मंजूर
पहली परियोजना बुरहानपुर की झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना है। दूसरी परियोजना रायसेन की है। यह बरना वृहद सिंचाई परियोजना की नहरों का विस्तार और आधुनिकीकरण है।
तीसरी परियोजना मंदसौर जिले की कयामपुर सीतामऊ सिंचाई परियोजना है। चौथी परियोजना सिंगरौली जिले की चित्रांगी सिंचाई परियोजना है।
अलग अलग लागत नहीं बताई
लागत 3,076.37 करोड़ रुपए की कुल राशि बताई गई है। लेकिन हर परियोजना की अलग लागत नहीं दी गई है। इसलिए यह साफ नहीं है कि किस जिले को कितनी राशि मिलेगी। फिलहाल सिर्फ कुल राशि सामने आई है।
बुरहानपुर की झिरमिटी परियोजना
बुरहानपुर जिले में झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना को मंजूरी मिली है। इससे जिले में सिंचाई बढ़ने की उम्मीद है। इस परियोजना के लिए अलग से सिंचित रकबा नहीं बताया गया है। किन गांवों को फायदा होगा, यह भी साफ नहीं है।
रायसेन में नहरों का आधुनिकीकरण
रायसेन में बरना वृहद सिंचाई परियोजना की नहरों का विस्तार और आधुनिकीकरण होगा। यहां नहरों का नेटवर्क पहले से मौजूद है। इस आधुनिकीकरण से पानी की बर्बादी कम होने की उम्मीद है। हालांकि इसके आंकड़े सोर्स में नहीं हैं।
मंदसौर और सिंगरौली में खास
मंदसौर की कयामपुर सीतामऊ और सिंगरौली की चित्रांगी परियोजनाएं नई बताई गई हैं। खबर के मुताबिक दोनों जिलों के किसानों को पहली बड़ी सिंचाई सुविधा मिल सकती है।
सरकार को उम्मीद है कि चारों जिलों में दोनों सीजन में सिंचाई बढ़ेगी। यह उम्मीद अभी सरकार के हवाले से है। असली फायदा निर्माण और जल प्रबंधन पर निर्भर करेगा।
निर्माण कब शुरू होगा
सरकार का कहना है कि निर्माण आने वाले महीनों में शुरू होगा। खबर में निर्माण पूरा होने की तारीख नहीं बताई गई है। यानी किसानों को इंतजार करना पड़ सकता है। सिंचित क्षेत्र का आंकड़ा भी अभी जारी नहीं हुआ है। सरकार के मुताबिक यह अलग से जारी होगा। यह आंकड़ा निर्माण पूरा होने के बाद बताया जाएगा।
जल संसाधन विभाग की जिम्मेदारी
जल संसाधन विभाग को सरकार को नियमित प्रगति रिपोर्ट देनी होगी। यानी काम की स्थिति पर सरकार की नजर रहेगी। इससे देरी या गड़बड़ी की जानकारी समय पर मिल सकेगी।
स्थानीय किसान संगठनों ने देरी पर जवाबदेही तय करने की मांग की है। यह मांग किसान संगठनों की तरफ से सामने आई है। सरकार का इस पर कोई जवाब सोर्स में नहीं है।
एक नजर में चारों परियोजनाएं
बुरहानपुर में झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना है। रायसेन में बरना परियोजना की नहरों का आधुनिकीकरण होगा। मंदसौर में कयामपुर सीतामऊ परियोजना बनेगी। सिंगरौली में चित्रांगी सिंचाई परियोजना बनेगी।
चारों पर कुल लागत 3,076.37 करोड़ रुपए है। निर्माण आने वाले महीनों में शुरू होने की बात कही गई है। सिंचित क्षेत्र का आंकड़ा बाद में अलग से जारी होगा।
किसानों के लिए क्या मायने
सिंचाई की सुविधा बढ़ने से खेती का जोखिम घट सकता है। खासकर वहां, जहां अब तक बड़ी सिंचाई सुविधा नहीं थी। लेकिन अभी यह सब उम्मीद के स्तर पर है। नहर बनने और पानी पहुंचने में समय लगेगा। इसलिए किसानों को आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए।
आगे क्या देखना होगा
अब देखना होगा कि निर्माण कब शुरू होता है। जल संसाधन विभाग की प्रगति रिपोर्ट से भी तस्वीर साफ होगी। किसान संगठन जवाबदेही की मांग कर चुके हैं। इसलिए देरी हुई, तो सवाल उठ सकते हैं। फिलहाल मंजूरी मिलना पहला कदम है। असली परीक्षा खेतों तक पानी पहुंचने पर होगी।
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