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MP के धार में आधुनिक खेती की झलक, तिलगारा में ब्लूबेरी की नई किस्म और रूपाखेड़ा में पॉलीहाउस में गुलाब, जिप्सोफिला

newz@gmail.com | Sep 19, 2026, 19:19 IST

धार के तिलगारा और रूपाखेड़ा में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री जन विश्वास कार्यक्रम के तहत आधुनिक खेती देखी। तिलगारा में ब्लूबेरी की नई किस्म और रूपाखेड़ा में पॉलीहाउस में फूलों की खेती का निरीक्षण हुआ।

धार में आधुनिक खेती

धार जिले में आधुनिक उद्यानिकी खेती की एक खास झलक सामने आई है। मुख्यमंत्री जन विश्वास कार्यक्रम के तहत अधिकारियों ने दो गांवों का दौरा किया। यह दौरा 19 सितंबर 2026 को हुआ। प्रमुख सचिव सहकारिता विभाग डीपी आहूजा और कलेक्टर राजीव रंजन मीणा तिलगारा गांव पहुंचे। इसके बाद वे रूपाखेड़ा गांव भी गए। दोनों जगह उन्होंने किसानों की आधुनिक और संरक्षित खेती देखी।

तिलगारा में ब्लूबेरी का प्रयोग

तिलगारा में अधिकारी किसान वासुदेव के खेत पर पहुंचे। यहां उन्होंने ब्लूबेरी की खेती देखी। वहां पौधों की देखभाल और उत्पादन पर उनकी नजर रही। किसान ने अधिकारियों को अपनी खेती का सफर बताया। उन्होंने कहा कि पहले खेत में बिलॉक्सी किस्म की ब्लूबेरी लगाई गई थी। अब उसी खेत में नई किस्म आजमाई जा रही है।

नई किस्म से क्या उम्मीद

इस साल किसान ने बाहर से पौधे मंगवाए हैं। ये पौधे अजरा ब्लू किस्म के हैं। किसान का मकसद ज्यादा उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता पाना है। यानी किसान ने एक ही किस्म पर टिके रहने के बजाय नया रास्ता चुना। अब देखना होगा कि नई किस्म कितना असर दिखाती है। अधिकारियों ने इस दौरान कई सवाल पूछे। उन्होंने पौधों के प्रबंधन की जानकारी ली। उत्पादन, बाजार और खेती की संभावनाओं पर भी बात हुई।

तकनीक और सिंचाई पर चर्चा

प्रमुख सचिव ने तकनीक से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की। उन्होंने पौधों की वृद्धि के बारे में पूछा। उत्पादन क्षमता की जानकारी भी ली गई। सिंचाई और फसल प्रबंधन भी बातचीत का हिस्सा रहे। ब्लूबेरी जैसी फसल में पौधों की देखभाल पर खास ध्यान देना पड़ता है। इसलिए ये सवाल किसानों के लिए भी काम के हैं।

पॉलीहाउस में हो रही खेती का निरीक्षण करते अधिकारी।

स्ट्रॉबेरी की फसल का जायजा

इसी खेत में स्ट्रॉबेरी की फसल भी लगी थी। अधिकारियों ने उसका भी निरीक्षण किया। उन्होंने उत्पादन और विपणन की जानकारी ली। विपणन का मतलब है कि फसल कहां और कैसे बिकती है। किसान की कमाई इसी पर टिकी होती है। इसलिए अधिकारियों ने सिर्फ खेत नहीं देखा, बाजार की बात भी पूछी।

रूपाखेड़ा में पॉलीहाउस खेती

इसके बाद अधिकारी रूपाखेड़ा गांव पहुंचे। यहां किसान जमनालाल पारिडा के खेत पर पॉलीहाउस में संरक्षित खेती चल रही है। अधिकारियों ने इसे करीब से देखा। पॉलीहाउस एक ढका हुआ ढांचा होता है। इसमें फसल को मौसम की मार से काफी हद तक बचाया जा सकता है। इसी वजह से इसे संरक्षित खेती कहा जाता है।

गुलाब जरबेरा और जिप्सोफिला

यहां गुलाब, जरबेरा और जिप्सोफिला की खेती हो रही है। यह खेती आधुनिक तकनीक से की जा रही है। अधिकारियों ने फूलों के उत्पादन की व्यवस्थाएं देखीं। उन्होंने फसल प्रबंधन की जानकारी भी ली। यानी फूलों की देखभाल कैसे होती है, यह समझा गया। तकनीक के इस्तेमाल पर भी सवाल पूछे गए।

अमरूद और डेजी की फसल

पॉलीहाउस के साथ अधिकारियों ने अमरूद का बगीचा भी देखा। वहां नीले और सफेद डेजी की फसल भी थी। यानी किसान एक ही जगह कई तरह की उद्यानिकी फसलें ले रहे हैं। अमरूद फल की फसल है और डेजी फूल की। दोनों का अलग-अलग बाजार होता है। इससे किसान की आय के रास्ते बढ़ सकते हैं।

फसल विविधीकरण पर चर्चा

निरीक्षण के दौरान किसानों से कई बातें पूछी गईं। अधिकारियों ने उद्यानिकी फसलों से होने वाली आय की जानकारी ली। फसल विविधीकरण पर भी चर्चा हुई। आधुनिक तकनीक के उपयोग की बात भी हुई।

फसल विविधीकरण का मतलब है एक ही फसल पर निर्भर न रहना। किसान अलग-अलग फसलें लगाते हैं। इससे किसी एक फसल का दाम गिरने पर भी नुकसान बंट जाता है।

अधिकारियों ने ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, गुलाब और जरबेरा पर बात की। जिप्सोफिला और अमरूद सहित दूसरी फसलों पर भी चर्चा हुई। उत्पादन, तकनीकी प्रबंधन और विपणन इसके मुख्य बिंदु रहे।

नवाचार की जानकारी

अधिकारियों ने विभाग के अफसरों से भी बात की। उन्होंने जिले में हो रहे नवाचारों की जानकारी ली। आधुनिक खेती की तकनीकों के बारे में भी पूछा गया। जिले के किसान आधुनिक और संरक्षित खेती अपना रहे हैं। वे कई तरह की उद्यानिकी फसलें उगा रहे हैं। इनमें फल और फूल दोनों शामिल हैं।

किसानों के लिए क्या सीख

इस दौरे से किसानों के लिए कुछ बातें साफ निकलती हैं। पहली बात, नई किस्म आजमाने से पहले उसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए। दूसरी बात, उत्पादन के साथ बाजार की योजना भी जरूरी है। तीसरी बात, संरक्षित खेती में तकनीक और प्रबंधन दोनों जरूरी हैं। इसमें जानकारी की कमी हो, तो लागत बेकार जा सकती है। इसलिए किसान कृषि और उद्यानिकी विभाग से सलाह ले सकते हैं।

निरीक्षण के दौरान बदनावर के एसडीएम (Sub-Divisional Magistrate) प्रियंका मिमरोट मौजूद रहीं। उनके साथ संबंधित विभागों के अधिकारी भी थे। धार जिले के तिलगारा और रूपाखेड़ा के किसान अपनी तकनीक से चर्चा में हैं। अब सबकी नजर रहेगी कि नई किस्म से ब्लूबेरी की पैदावार कैसी रहती है।

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