संजय शर्मा@ BHOPAL. खेती के घाटे में दबे मध्य प्रदेश के किसानों ने जागरुकता के सहारे आत्मनिर्भर बनने की राह खोज ली है। यह आत्मनिर्भरता केवल खेती बाड़ी से संबंधित नहीं है, बल्कि घर में उपयोग होने वाली रसोई गैस की भी है। यानी किसान बिना किसी खर्च के घर पर ही फसलों के लिए पोषक बना रहे हैं, बल्कि भोजन पकाने के लिए रसोई गैस भी तैयार कर रहे हैं। भोपाल से सटे बेरखेड़ी गांव के किसान परिवार अब फ्री की गैस से भोजन पका रहे हैं।
अरे, हैरान होने की जरूरत नहीं है आप भी यह तरीका अपनाकर खेत के लिए पोषण और रसोई गैस फ्री में तैयार कर सकते हैं। तो चलिए बिना किसी खर्च के खेत और घर की जरूरत पूरी करने वाला तरीका आपको भी बता ही देते हैं।
दरअसल, यह तरीका है कार्बन बायो फर्टिलाइजर बैग। यह एक छोटा सा पॉली बैग होता है, जो पाइप के जरिए प्लास्टिक की टंकी से जुड़ा होता है। इसे रखने के लिए 10 फीट लंबी और करीब 4 फीट चौड़ी जगह चाहिए होती है। कार्बन बायो फर्टिलाइजर बैग दो एकड़ के छोटे और उससे ज्यादा जमीन वाले किसानों के लिए बेहद कारगर है। बड़े किसान इसे बड़े आकार में भी लगा सकते हैं।
बैग कैसे बनाता है आत्मनिर्भर
कार्बन बायो फर्टिलाइजर के काम करने का सिद्धांत पूरी तरह प्राकृतिक है। इसे इंस्टॉल करने के बाद प्लास्टिक टैंक में गोबर, गोमूत्र और हरी घास-खरपतवार डालनी होती है। शुरूआत में इस टंकी में गोबर, गोमूत्र के साथ कच्चा चावल, गुड़, छाछ और कार्बन बैक्टीरिया मिलाने होते हैं। मिश्रण को पानी के घोल के साथ टंकी में 45 दिन छोड़ना होता है। बस उसके बाद पॉली बैग में बनी गैस स्टोर होने लगती है। जब जरूरत हो तब इससे भोजन पकाया जा सकता है। 45 दिन के बाद इस टकी में हर दिन हरा कचरा, थोड़ा सा गोबर और गोमूत्र मिलाओ और बिना कोई खर्च भरपूर गैस पाओ।
ये है फसलों के पोषण की रैसिपी
टंकी से रिसकर पॉली बैग में जमा होने वाली तरल स्लरी खेतों में रासायनिक खाद की जगह पोषक के रूप में डाली जाती है। इसे किसान 45 दिन के बाद नियमित पॉली बैग से निकालकर टंकी में जमा कर सकते हैं या प्रतिदिन निकालकर खेतों में स्प्रे या पानी के साथ डाल सकते हैं। यह स्लरी एक से दो महीने में ही खेत में बोई गई फसल पर असर दिखाती है। इस स्लरी में नाइट्रोजन, कार्बन, फास्फोरस जैसे तत्व होते हैं, जो फसल को पोषण देने के लिए जरूरी हैं।
एक उपाय से दोहरा फायदा
कार्बन फर्टिलाइजर बैग किसानों के लिए सबसे ज्यादा कारगर है। दो एकड़ के किसान तो इसके सहारे भरपूर किफायत कर सकते हैं। सबसे छोटा पॉली बैग दो एकड़ के खेत को पर्याप्त प्राकृतिक पोषक उपलब्ध करा सकता है। यानी किसान इस जैविक स्लरी का उपयोग करके साल भर बाद ही रासायनिक खाद की निर्भरता से मुक्ति पा सकते हैं।
यही नहीं, पांच या छह सदस्यों वाले परिवार के लिए महीने में लगने वाले एलपीजी सिलेंडर की जरूरत भी नहीं रह जाती। इसका सीधा मतलब है किसान हर महीने एलपीजी पर होने वाले 900 से 1000 रुपए तो बचा ही सकते हैं। रासायनिक खाद पर होने वाला तगड़ा खर्च भी रोक सकते हैं।
जरूरी FAQ
कार्बन बायो फर्टिलाइजर बैग कैसे काम करता है?
यह व्यवस्था जैविक सामग्री को बंद वातावरण में सड़ाती है। इससे मीथेन वाली बायोगैस और तरल स्लरी बनती है। गैस भोजन पकाने में उपयोग हो सकती है। स्लरी खेतों में जैविक पोषक के रूप में दी जाती है।
इस संयंत्र से गैस कितने दिनों में मिलती है?
स्थानीय किसानों ने लगभग 45 दिनों की अवधि बताई है। सरकारी पोर्टल 30 से 40 दिन बताता है। वास्तविक समय तापमान, सामग्री और संयंत्र के आकार पर निर्भर रहेगा।
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