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CG के किसान ने गुलाब की खेती से कमाए 8 लाख रुपए, जानें पूरी खेती की तकनीक और कमाई का हिसाब

newz@gmail.com | Sep 17, 2026, 13:10 IST

छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में एक किसान ने गुलाब की खेती से बड़ा मुनाफा कमाया। कालीपुर गांव के विकास कुमार श्रीवास्तव ने संरक्षित खेती का तरीका अपनाया। उन्होंने 8,000 वर्गमीटर जमीन में गुलाब की व्यावसायिक खेती शुरू की। उनके खेत से करीब 1.60 लाख गुलाब के डंठल तैयार हुए। खर्च निकालने के बाद उन्हें करीब 3.80 लाख रुपए का शुद्ध मुनाफा मिला।

गुलाब की खेती

खेती में सही फसल का चुनाव किसान की जिंदगी बदल सकता है। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में एक किसान ने यह साबित कर दिया है। बस्तर के कालीपुर गांव के रहने वाले हैं विकास कुमार श्रीवास्तव। उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर नया रास्ता चुना। उन्होंने गुलाब की व्यावसायिक खेती शुरू की और अच्छा मुनाफा कमाया।

संरक्षित खेती से शुरुआत

विकास कुमार ने संरक्षित खेती यानी प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन (Protected Cultivation) का तरीका अपनाया। इस तकनीक में फसल को मौसम की मार से बचाया जाता है। पौधों को जरूरत के हिसाब से पानी और खाद मिलता है। इससे फसल की सेहत और पैदावार दोनों बेहतर होती है। उन्होंने खेती की शुरुआत सोच समझकर की थी। पहले उन्होंने जमीन और मौसम को ध्यान में रखा। फिर गुलाब की खेती के लिए सही तरीका चुना। यह फैसला आगे चलकर उनके लिए फायदेमंद साबित हुआ।

संरक्षित खेती में शुरुआती खर्च थोड़ा ज्यादा लगता है। इसके लिए ढांचा तैयार करना पड़ता है। लेकिन एक बार सेटअप होने के बाद फसल का जोखिम कम हो जाता है। लंबे समय में यह किसानों के लिए फायदे का सौदा बन जाता है।

8000 वर्गमीटर में गुलाब की खेती

विकास कुमार ने करीब 8,000 वर्गमीटर जमीन में गुलाब की खेती की। यह जमीन संरक्षित वातावरण में तैयार की गई थी। खेत में सिंचाई का पूरा ध्यान रखा गया। पौधों को समय पर खाद और पोषण भी दिया गया। फसल की सुरक्षा पर भी खास ध्यान दिया गया। कीट और बीमारी से बचाव के उपाय किए गए। इससे गुलाब के फूलों की गुणवत्ता बेहतर हुई। बाजार में ऐसे फूलों की मांग ज्यादा रहती है।

बस्तर जैसे इलाके में ज्यादातर किसान पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहते हैं। धान और मक्का जैसी फसलें आम तौर पर उगाई जाती हैं। ऐसे में फूलों की खेती एक नया प्रयोग था। विकास कुमार ने यह जोखिम उठाकर अच्छा नतीजा हासिल किया।

1.60 लाख डंठल का उत्पादन

वैज्ञानिक तरीके से खेती करने का फायदा सीधा उत्पादन में दिखा। विकास कुमार के खेत से करीब 1.60 लाख गुलाब के डंठल तैयार हुए। यह आंकड़ा किसी भी छोटे किसान के लिए बड़ी उपलब्धि है। इतनी बड़ी पैदावार सीमित जमीन में मिलना आसान नहीं होता। बाजार में गुलाब की मांग हमेशा बनी रहती है। शादी, त्योहार और सजावट में गुलाब का खूब इस्तेमाल होता है। इसी मांग का फायदा विकास कुमार को मिला। उनकी फसल हाथोंहाथ बिक गई।

आय और खर्च का हिसाब

गुलाब के डंठल बेचकर विकास कुमार को करीब 8 लाख रुपए की आय हुई। इस खेती में उनका कुल खर्च करीब 4.20 लाख रुपए रहा। इसमें खाद, दवा, मजदूरी और सिंचाई का खर्च शामिल था। संरक्षित ढांचे की देखभाल पर भी पैसा खर्च हुआ। सारा खर्च निकालने के बाद उनका मुनाफा साफ दिखा। कुल आय में से खर्च घटाने पर करीब 3.80 लाख रुपए बचे। यह रकम उनका शुद्ध मुनाफा है। इतनी कमाई कई पारंपरिक फसलों से कहीं ज्यादा है।

कैसे बढ़ा मुनाफा

संरक्षित खेती ने विकास कुमार की सफलता में बड़ी भूमिका निभाई। इस तरीके से फसल का वातावरण किसान के नियंत्रण में रहता है। मौसम की मार का असर फसल पर कम पड़ता है। इससे उत्पादन में स्थिरता भी बनी रहती है। संतुलित खाद और सही सिंचाई से भी फर्क पड़ा। समय पर फसल की देखभाल करने से गुणवत्ता बढ़ी। अच्छी गुणवत्ता के चलते बाजार में अच्छे दाम मिले। इन सब वजहों से मुनाफा लगातार बढ़ता गया।

फूलों की खेती का भविष्य

गुलाब जैसी फूलों की खेती अतिरिक्त कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है। जहां बाजार में फूलों की मांग रहती है, वहां यह खेती फायदेमंद है। किसान पारंपरिक फसलों के साथ उद्यानिकी को भी अपना सकते हैं। इससे उनकी कुल आमदनी में इजाफा हो सकता है। विकास कुमार की कहानी छोटे किसानों के लिए मिसाल है। कम जमीन में भी वैज्ञानिक तरीके से अच्छी कमाई हो सकती है। उनकी सफलता देखकर आसपास के किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। कई किसान अब संरक्षित खेती की तरफ रुख कर रहे हैं।

बस्तर जैसे इलाकों में खेती का दायरा सीमित रहता है। ऐसे में यह प्रयोग नई उम्मीद जगाता है। सही तकनीक और मेहनत से मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है। विकास कुमार का अनुभव इसका जीता जागता सबूत है। छोटे और मझोले किसानों के लिए यह कहानी एक सीख है। पारंपरिक फसलों के साथ नई तकनीक अपनाना जरूरी हो गया है। बाजार की मांग समझकर सही फसल चुनना फायदेमंद रहता है। इससे किसानों की आमदनी में स्थिरता भी आ सकती है।

कृषि विशेषज्ञ भी किसानों को उद्यानिकी फसलों की सलाह देते रहते हैं। फूल, फल और सब्जी की खेती से भी अच्छी कमाई होती है। कम जमीन में भी यह मुमकिन है। विकास कुमार की सफलता इसी सोच को मजबूत करती है। आने वाले समय में बस्तर में ऐसे और प्रयोग देखने को मिल सकते हैं।

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