भारत और न्यूजीलैंड का मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो रहा है। इसमें सेब, कीवी, एल्बुमिन और मनुका शहद के नियम तय हैं। इन उत्पादों पर शुल्क दर, सालाना कोटा और शर्तें भी तय हैं। ये आंकड़े विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की अधिसूचना के हवाले से सामने आए हैं। समझौते पर 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में दस्तखत हुए थे। भारत से पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड से टॉड मैक्ले ने हस्ताक्षर किए।
20 अक्टूबर से लागू समझौता
समझौते का पहला साल 20 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक माना गया है। इस अवधि में सेब और कीवी का रियायती कोटा शून्य है। यानी इस दौरान इन दोनों फलों पर कोटे की रियायत नहीं मिलेगी।
एल्बुमिन और मनुका शहद के लिए इसी अवधि में आयात कोटा तय है। सेब और कीवी का कोटा 1 जनवरी 2027 से शुरू होगा। उसके बाद हर साल कोटा बढ़ता जाएगा।
सेब पर 25 फीसदी शुल्क
सेब के लिए कोटे के भीतर आयात पर 25 फीसदी शुल्क लगेगा। इसकी न्यूनतम सीआईएफ (Cost, Insurance and Freight) कीमत 1.25 अमेरिकी डॉलर प्रति किलो रखी गई है। यानी इससे कम कीमत पर सेब का आयात नहीं हो सकेगा।
सेब का कोटा साल दर साल बढ़ेगा। साल 2027 में यह 35,000 मीट्रिक टन रहेगा। साल 2028 में यह 37,500 मीट्रिक टन होगा। साल 2029 में 40,000 और 2030 में 42,500 मीट्रिक टन तय है।
साल 2031 से हर साल 45,000 मीट्रिक टन सेब आयात किया जा सकेगा। सेब का आयात हर साल 1 अप्रैल से 31 अगस्त तक होगा।
कीवी पर शून्य शुल्क
कीवी के लिए कोटे के भीतर शुल्क शून्य रखा गया है। इसकी न्यूनतम सीआईएफ कीमत 1.80 अमेरिकी डॉलर प्रति किलो तय है। कीवी का आयात हर साल एक अप्रैल से 15 अक्टूबर के बीच हो सकेगा।
कीवी का कोटा भी चरणों में बढ़ेगा। साल 2027 में यह 8,000 मीट्रिक टन रहेगा। साल 2028 में 9,750 और 2029 में 11,500 मीट्रिक टन होगा। साल 2030 में 13,250 मीट्रिक टन तय है। साल 2031 से हर साल 15,000 मीट्रिक टन कीवी का आयात हो सकेगा।
मनुका शहद का कोटा
प्रमाणित मनुका शहद के लिए भी कोटा तय किया गया है। साल 2026 में 40 मीट्रिक टन आयात की अनुमति है। साल 2027 से हर साल 200 मीट्रिक टन मनुका शहद आ सकेगा।
इसकी सीआईएफ कीमत कम से कम 20 अमेरिकी डॉलर प्रति किलो होनी चाहिए। साथ ही यह कीमत 30 डॉलर प्रति किलो से कम रहनी चाहिए। मनुका शहद का आयात साल भर किया जा सकेगा।
कोटे में आयात की प्रक्रिया
कोटे के तहत आयात के लिए भारतीय आयातकों को डीजीएफटी की मंजूरी लेनी होगी। पहले न्यूजीलैंड का सक्षम प्राधिकरण निर्यातक या उत्पादक को प्रमाणपत्र देगा। इस प्रमाणपत्र में उत्पाद और मात्रा का ब्योरा होगा। भारतीय आयातक का नाम भी उसमें दर्ज होगा।
इसके बाद आयातक को डीजीएफटी के पोर्टल पर आवेदन करना होगा। आवेदन में यही प्रमाणपत्र लगाना जरूरी होगा। डीजीएफटी मंजूरी और कोटे के इस्तेमाल पर नजर रखेगा।
कोटा खत्म तो मंजूरी बंद
जब किसी साल का कोटा पूरा हो जाएगा, तब आगे मंजूरी नहीं दी जाएगी। यह नियम उसी साल के लिए लागू रहेगा। मंजूरी सिर्फ संबंधित कोटा वर्ष के लिए मान्य होगी।
मंजूरी के साथ उत्पाद की आयात अवधि का पालन भी जरूरी है। जैसे सेब अप्रैल से अगस्त के बीच ही आएगा। कीवी के लिए यह अवधि अप्रैल से 15 अक्टूबर तक है।
बचा हुआ कोटा अगले साल नहीं जुड़ेगा। यानी जितना कोटा उसी साल इस्तेमाल नहीं हुआ, वह खत्म माना जाएगा। इससे हर साल की सीमा तय रहती है।
किसानों के लिए क्या मायने
खबर में इन फलों के आयात की सीमा और समय साफ बताया गया है। आयात सिर्फ तय कोटे और तय महीनों में हो सकेगा। न्यूनतम कीमत की शर्त भी रखी गई है।
हालांकि सोर्स में किसान संगठनों की प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। बाजार भाव पर असर के आंकड़े भी नहीं बताए गए हैं। इसलिए अभी यह नहीं कहा जा सकता कि घरेलू बागवानों पर कितना असर होगा।
एक नजर में सालाना कोटा
सेब का कोटा 2027 में 35,000 मीट्रिक टन रहेगा। यह 2031 में 45,000 मीट्रिक टन हो जाएगा। कीवी का कोटा इसी दौरान 8,000 से बढ़कर 15,000 मीट्रिक टन होगा। मनुका शहद का कोटा 2027 से 200 मीट्रिक टन सालाना रहेगा।
तीनों उत्पादों के लिए कीमत की न्यूनतम सीमा भी तय है। सेब के लिए यह 1.25 डॉलर प्रति किलो है। कीवी के लिए 1.80 डॉलर और मनुका शहद के लिए 20 डॉलर प्रति किलो है।
आगे क्या देखना होगा
सबसे पहले एक जनवरी 2027 के बाद की स्थिति अहम रहेगी। तब सेब और कीवी का कोटा शुरू होगा। इसके बाद अप्रैल में आयात की खिड़की खुलेगी।
उसी समय पता चलेगा कि आयातक कितना कोटा इस्तेमाल करते हैं। साथ ही न्यूनतम कीमत की शर्त का असर भी देखा जाएगा। किसान और व्यापारी इन संकेतों पर नजर रख सकते हैं।
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