इंदौर में सोयाबीन उद्योग का बड़ा जमावड़ा लगा। मौका था दो दिवसीय 9वें अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव का। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसमें मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने किसानों की आय और खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता पर बात की। आयोजन इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में हुआ। इसे सोपा यानी सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Soybean Processors Association of India) ने कराया।
कॉन्क्लेव का मुख्य विषय है आत्मनिर्भर भारत, पावरिंग द ऑयल एंड प्रोटीन विजन। देश और विदेश से 500 से ज्यादा प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। इनमें नीति निर्माता, कृषि वैज्ञानिक, उद्योग जगत के लोग और प्रगतिशील किसान थे। आयोजकों के मुताबिक मकसद सोयाबीन और खाद्य तेल क्षेत्र की दिशा तय करना है। घरेलू उत्पादन बढ़ाना और वैश्विक बाजार में भारत को मजबूत करना भी लक्ष्य है।
सोयाबीन उत्पादन में ताकत
मुख्यमंत्री ने कहा, मध्य प्रदेश देश की फूड बास्केट कहलाता है। उन्होंने बताया कि सोयाबीन उत्पादन में भी राज्य की बड़ी भूमिका है। उनके अनुसार मालवा सोयाबीन की राजधानी है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक देश के कुल सोयाबीन उत्पादन का 45 फीसदी यहीं होता है। उन्होंने कहा कि सरकार कई क्षेत्रों में विकास की रफ्तार बढ़ा रही है। इनमें कृषि, उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण शामिल हैं। एमएसएमई (Micro, Small and Medium Enterprises), खनन, स्वास्थ्य और शिक्षा भी शामिल हैं।
मौसम की चुनौती और किसान
मुख्यमंत्री ने किसानों की मेहनत की तारीफ की। उन्होंने कहा कि मौसम की मुश्किल हालत रही। अल नीनो (El Nino) का असर भी था। फिर भी किसानों ने सोयाबीन उत्पादन में उल्लेखनीय काम किया।
उनके मुताबिक मध्य प्रदेश में चुनौतियों को अवसर में बदलने की क्षमता है। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उत्पादकता सुधारने और खेती आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की बात कही।
उन्होंने बताया कि सरकार इस समय किसान कल्याण वर्ष मना रही है। ऐसे में विशेषज्ञों, उद्यमियों और किसानों का इंदौर में जुटना गौरव की बात है।
निवेश और इंडस्ट्री कॉरिडोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल है। उन्होंने सस्ती बिजली, जमीन और पानी की उपलब्धता गिनाई। उनके मुताबिक इन सुविधाओं से निवेशक आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि अलग अलग अंचलों में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव कराए गए हैं। इनसे स्थानीय संसाधनों और रोजगार को नई दिशा मिली है।
पिछले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में करीब 30 लाख करोड़ रुपए के प्रस्ताव मिले थे। उनके मुताबिक इनमें से 30 प्रतिशत से ज्यादा प्रस्ताव जमीन पर उतर चुके हैं। उन्होंने कहा कि बाकी को भी असली परियोजनाओं में बदलने की कोशिश जारी है। जबलपुर, भोपाल और इंदौर को जोड़ने वाले नए इंडस्ट्री कॉरिडोर की घोषणा हुई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह घोषणा हाल ही में कैबिनेट में हुई।
प्रसंस्करण से क्या फायदा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रसंस्करण उद्योग बढ़ने से उपज का बेहतर दाम मिलेगा। इससे मूल्य संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा। भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन को भी मजबूती मिलेगी।
सरल शब्दों में कहें तो खेत की उपज यहीं प्रोसेस होगी। इससे किसान को बाजार तक पहुंचने के ज्यादा रास्ते मिल सकते हैं। यह बात समझाने के लिए जोड़ी गई है और भाषण का हिस्सा नहीं है।
खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोयाबीन सिर्फ एक कृषि उपज नहीं है। यह किसानों की आय, खाद्य तेल उद्योग और प्रोटीन पोषण से जुड़ा क्षेत्र है। उनके अनुसार सोया उद्योग में आधुनिक तकनीक पर ध्यान देना होगा। बेहतर प्रसंस्करण और गुणवत्ता भी जरूरी है। उत्पादों में विविधता लाना और बाजार बढ़ाना भी अहम है। इन कदमों से भारत खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे अंतर्राष्ट्रीय आयोजन संवाद और सहयोग को मजबूत करते हैं। इसमें कृषि वैज्ञानिक, किसान, नीति निर्माता और उद्योग जगत एक मंच पर आते हैं।
प्रधानमंत्री और सरकार पर भी बोले
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी बात की। उन्होंने कहा कि इस नेतृत्व में भारत हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के कल्याण के लिए काम चल रहा है।
उन्होंने बताया कि सुशासन के 25 वर्ष पर सेवा संकल्प अभियान चल रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी ने गुजरात में विकास का प्रभावी मॉडल रखा। उनके अनुसार मध्य प्रदेश भी संभावनाओं के आधार पर नए प्रतिमान बना रहा है।
सोपा के चेयरमैन ने क्या कहा
कार्यक्रम की शुरुआत में सोपा के चेयरमैन नरेश गोयनका ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने मध्य प्रदेश को सोयाबीन उत्पादन का प्रमुख केंद्र बताया। उनके मुताबिक राज्य सरकार किसानों के हित में अहम फैसले ले रही है।
गोयनका ने भावांतर योजना का जिक्र किया। इसमें किसानों को उपज के मूल्य में अंतर की राशि मिलती है। उन्होंने इसे किसानों के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि सरकार के सहयोग से सोया उद्योग में नए अवसर बनेंगे।
कंपनियों का सम्मान
कार्यक्रम में सोयाबीन उद्योग में अच्छा काम करने वाली कंपनियों को सम्मानित किया गया। यह काम सोयाबीन की मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात और प्रोसेसिंग से जुड़ा था। उपभोक्ता बिक्री और रिफाइंड ऑयल विपणन वाली कंपनियां भी शामिल थीं।
लगभग 15 उद्योगपतियों और उनके प्रतिनिधियों को अवार्ड दिया गया। कार्यक्रम के अंत में नरेश गोयनका ने मुख्यमंत्री को शॉल और नारियल भेंट किया।
कार्यक्रम में कौन रहा मौजूद
कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट मौजूद रहे। इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी शामिल हुए। सुमित मिश्रा, सोपा के डिप्टी चेयरमैन गिरीश मतलानी और डेविश जैन भी वहां थे। कृष्णवीर और विजय पाल भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। इनके साथ सोयाबीन उद्योग, खेती और व्यापार जगत के कई प्रतिनिधि भी आए।
अब आगे क्या
कॉन्क्लेव दो दिन का है। इसमें सोयाबीन और खाद्य तेल क्षेत्र के भविष्य पर चर्चा हो रही है। किसानों की नजर रहेगी कि ये बातें खेत तक कितनी पहुंचती हैं।
सोयाबीन किसानों के लिए दाम, खरीदी और प्रसंस्करण की व्यवस्था सबसे अहम मुद्दे हैं। आने वाले दिनों में इन पर क्या कदम उठते हैं, यह देखना अहम होगा।
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