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बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम से एमपी-सीजी में बारिश के आसार, राजस्थान में मानसून विदाई की ओर

newz@gmail.com | Sep 26, 2026, 08:00 IST

26 सितंबर यानी शनिवार को एमपी और सीजी में भारी बारिश का अलर्ट है। रीवा-सतना में अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। राजस्थान में मानसून की विदाई शुरू, पूर्वी हिस्से में अभी बारिश का खतरा बना है।

आज का मौसम

26 सितंबर को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान का मौसम अलग-अलग है। तीनों राज्यों में अलग तस्वीर दिख रही है। मौसम विभाग ने एमपी और सीजी में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं राजस्थान से मानसून की विदाई शुरू हो चुकी है। बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का सिस्टम बना था। यह अब कमजोर होकर आगे बढ़ रहा है। इसी सिस्टम का असर एमपी और सीजी पर पड़ रहा है। यहां बारिश जारी रहने का अनुमान है।

एमपी में भारी बारिश अलर्ट

मध्य प्रदेश में बारिश का दौर अभी थमा नहीं है। मौसम विभाग ने इसकी जानकारी दी है। 26 सितंबर को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश जारी रहेगी। गरज-चमक की स्थिति भी बनी रह सकती है। खासकर पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां ज्यादा रहने का अनुमान है। कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं। इनकी रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है।

रीवा-सतना में सबसे ज्यादा खतरा

मौसम विभाग ने रीवा और सतना जिलों के लिए खास चेतावनी जारी की है। यहां कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। पिछले दिनों भी इन जिलों में तेज बारिश दर्ज हुई थी। पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी बारिश का असर दिख सकता है। यहां 25 और 26 सितंबर को कुछ जगह बहुत भारी बारिश का अनुमान है। इस मानसून सीजन की बात करें तो आंकड़े अच्छे रहे हैं। मध्य प्रदेश में अब तक करीब 34 इंच बारिश दर्ज हुई है। यह प्रदेश के सामान्य कोटे का करीब 92 प्रतिशत है। नए सिस्टम से कई जिले अपना सामान्य कोटा पूरा कर सकते हैं।

सीजी में भी जारी बारिश

छत्तीसगढ़ में भी बारिश से राहत मिलने के आसार फिलहाल कम हैं। मौसम विभाग ने इसकी जानकारी साझा की है। 26 सितंबर को कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट भी है। राजधानी रायपुर में आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रह सकता है। यहां गरज-चमक के साथ हल्की बौछारें पड़ने की संभावना है।

राजस्थान में दो तरह का मौसम

राजस्थान में मौसम की तस्वीर बाकी दोनों राज्यों से अलग है। पश्चिमी राजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई शुरू हो चुकी है। जैसलमेर और बाड़मेर जैसे इलाकों में मौसम साफ हो गया है। यहां तापमान 39 से 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। सितंबर के महीने में भी लोगों को मई जैसी गर्मी महसूस हो रही है। आने वाले दिनों में भी इन इलाकों में मौसम साफ रहने का अनुमान है।

पूर्वी राजस्थान में सतर्कता

वहीं पूर्वी राजस्थान की स्थिति अभी अलग बनी हुई है। यहां मानसून ने अभी तक पूरी तरह विदाई नहीं ली है। मौसम विभाग ने यहां 26 सितंबर के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। जयपुर, कोटा, उदयपुर और अलवर जैसे जिले प्रभावित हो सकते हैं। यहां मध्यम से भारी बारिश की आशंका है। इसके साथ गरज-चमक वाली तेज हवाएं भी चल सकती हैं। इनकी रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है। यानी राजस्थान में एक तरफ गर्मी है। दूसरी तरफ बारिश का खतरा भी बना हुआ है।

किसानों के लिए सलाह

मौसम में यह उतार-चढ़ाव किसानों के लिए चुनौती बनकर आया है। एमपी और सीजी में सोयाबीन और धान की फसल कटाई के करीब है। लगातार बारिश से पकी फसल में नमी बढ़ने का खतरा है। इससे फसल के खराब होने और दाने में अंकुरण की आशंका बढ़ जाती है। कुछ इलाकों में खेतों में पानी भरने का भी खतरा बना रहता है।

किसानों को कुछ अहम सलाह दी जा रही है। कटाई से पहले मौसम का अपडेट जरूर देखें। धान के खेतों में पानी की निकासी का इंतजाम पहले से कर लें। पूर्वी राजस्थान में भी किसानों को सतर्क रहना होगा। यहां सोयाबीन और मूंग की फसल पर असर पड़ सकता है। पश्चिमी राजस्थान के किसानों के लिए मौसम फायदेमंद रहेगा। वे साफ मौसम में कटाई और भंडारण का काम निपटा सकते हैं।

मानसून सीजन का हाल

मध्य प्रदेश में मानसून जल्द विदा होने वाला है। इससे पहले यह बारिश का आखिरी बड़ा दौर माना जा रहा है। इसके बाद प्रदेश से मानसून लौटना शुरू हो सकता है। छत्तीसगढ़ में भी आने वाले दिनों में राहत मिल सकती है। यहां बारिश की रफ्तार धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है।

राजस्थान से मानसून की विदाई की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। किसानों के लिए यह समय रबी की तैयारी शुरू करने का भी है। खेतों की जुताई अभी से शुरू करने की सलाह है। बीज की व्यवस्था भी समय रहते कर लें। मौसम साफ होते ही रबी की बुवाई की योजना बनाई जा सकती है।

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