किसान की बात,सूत्र के साथ

नए बीज कानून पर टकराव, किसान संघ ने विदेशी कंपनियों पर उठाए सवाल; सरकार का दावा- बीज अधिकार को खतरा नहीं

newz@gmail.com | Oct 6, 2026, 15:50 IST

प्रस्तावित नया बीज कानून विवादों में घिर गया है। भारतीय किसान संघ ने पारंपरिक बीजों और विदेशी कंपनियों पर सवाल उठाए हैं। हालांकि सरकार का दावा है कि किसानों के बीज अधिकार सुरक्षित रहेंगे। कानून अभी परामर्श प्रक्रिया में है।

बीज कानून

देश में प्रस्तावित नया बीज कानून अब चर्चा में है। भारतीय किसान संघ ने इसके कई प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने कानून का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कानून किसानों से बीज छीन सकता है। उन्होंने विदेशी बीज कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

उनका सवाल है कि भारत को विदेशी बीज क्यों चाहिए। उन्होंने देशी बीजों और किसान अधिकारों की सुरक्षा मांगी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकार परामर्श कर रही है। किसान संगठनों से कानून पर लगातार सुझाव लिए जा रहे हैं।

क्या है प्रस्तावित कानून

केंद्र ने बीज विधेयक का मसौदा 2025 में जारी किया था। प्रस्तावित कानून पुराने बीज अधिनियम की जगह लेगा। मौजूदा बीज अधिनियम वर्ष 1966 में बनाया गया था। बीज नियंत्रण आदेश वर्ष 1983 से लागू है।

सरकार का कहना है कि पुराने नियम अब पर्याप्त नहीं हैं। कृषि बाजार और बीज कारोबार में बड़े बदलाव हुए हैं। नए कानून का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना है। सरकार नकली और घटिया बीजों की बिक्री रोकना चाहती है। बीज आपूर्ति व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। कानून में डिजिटल रिकॉर्ड और बीज की पहचान शामिल होगी।

किसान संघ की मुख्य चिंता

भारतीय किसान संघ पारंपरिक बीज व्यवस्था को लेकर चिंतित है। गांवों में किसान वर्षों से अपने बीज बचाते आए हैं। किसान इन्हें अगली फसल में दोबारा इस्तेमाल करते हैं। कई किसान आपस में बीजों का लेनदेन भी करते हैं।

संगठन को आशंका है कि नई व्यवस्था निर्भरता बढ़ा सकती है। इससे बड़ी बीज कंपनियों का बाजार मजबूत हो सकता है। मिश्र ने विदेशी कंपनियों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने भारतीय बीजों और स्थानीय किस्मों को प्राथमिकता देने की मांग की। किसान संघ का पक्ष एक आशंका और राजनीतिक मांग है। कानून के अंतिम प्रावधान अभी तय नहीं हुए हैं।

सरकार ने क्या जवाब दिया

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आशंकाओं पर जवाब दिया है। उन्होंने किसानों के बीज अधिकार सुरक्षित रहने का भरोसा दिया। सरकार के अनुसार किसान अपने पारंपरिक बीज इस्तेमाल कर सकेंगे। वे आपस में बीज बांट और बेच भी सकेंगे। कृषि मंत्री ने कहा कि पारंपरिक किस्मों पर रोक नहीं लगेगी। राज्यों के कृषि संबंधी अधिकार भी कायम रखे जाएंगे।

सरकार का दावा है कि कानून किसानों के खिलाफ नहीं होगा। इसका मुख्य निशाना नकली और अमानक बीज कारोबार रहेगा। हालांकि अंतिम कानून आने पर प्रावधानों की दोबारा जांच जरूरी होगी। मसौदे और अंतिम कानून में बदलाव संभव हैं।

बीज कंपनियों का पंजीकरण

प्रस्तावित व्यवस्था में बीज कंपनियों का पंजीकरण जरूरी होगा। बिना अनुमति वाले विक्रेता बीज नहीं बेच सकेंगे। हर बीज की आपूर्ति श्रृंखला दर्ज करने की तैयारी है। इससे बीज बनाने और बेचने वाले की पहचान होगी। बीज पैकेट पर QR (Quick Response) कोड लगाया जा सकता है। किसान इसे स्कैन करके बीज की जानकारी देख सकेंगे।

इसमें बीज की उत्पत्ति और विक्रेता की जानकारी होगी। शिकायत मिलने पर जिम्मेदारी तय करना भी आसान होगा। सरकार इसे बीज ट्रेसिंग व्यवस्था बता रही है। इसका उद्देश्य खराब बीज की पहचान तेजी से करना है।

नकली बीज पर कड़ा दंड

नकली बीज से किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान होता है। खराब अंकुरण पूरी फसल और लागत बिगाड़ सकता है। प्रस्तावित कानून में गंभीर उल्लंघन पर कड़े दंड होंगे। अमानक बीज बेचने पर जेल का प्रावधान प्रस्तावित है। सरकार ने तीन वर्ष तक जेल की जानकारी दी है। जुर्माना 30 लाख रुपए तक हो सकता है।

छोटी प्रक्रियागत गलतियों को अपराधमुक्त करने का प्रस्ताव भी है। सरकार इसे कारोबारी प्रक्रिया आसान बनाने से जोड़ती है। गंभीर धोखाधड़ी और सामान्य गलती अलग रखने की योजना है। अंतिम कानून में इसकी स्पष्ट परिभाषा महत्वपूर्ण होगी।

मुआवजे का क्या प्रस्ताव

खराब बीज से नुकसान होने पर मुआवजा महत्वपूर्ण मुद्दा है। किसान संगठनों ने लंबे समय से इसकी मांग की है। सरकार ने 15 दिनों में मुआवजा दिलाने का प्रस्ताव बताया। इसके लिए राज्यों में बीज सुरक्षा कोष बन सकता है।

यह व्यवस्था लागू होने पर किसान को जल्दी राहत मिल सकती है। इसके लिए नुकसान की निष्पक्ष जांच जरूरी होगी। अंकुरण विफल होने के कई कारण हो सकते हैं। बीज, मौसम और खेती के तरीके की जांच करनी होगी। मुआवजे की प्रक्रिया सरल और समयबद्ध रखना जरूरी होगा। किसान को लंबी कानूनी प्रक्रिया से भी बचाना होगा।

विदेशी बीज पर क्या विवाद

सरकारी मसौदा बीज आयात आसान बनाने की बात करता है। इसे नई किस्मों और नवाचार से जोड़ा गया है। किसान संघ इसी नीति पर सवाल उठा रहा है। संगठन विदेशी कंपनियों पर बढ़ती निर्भरता से चिंतित है। विदेशी बीज मिलने से किसानों को नए विकल्प मिल सकते हैं। साथ ही स्थानीय बीजों के संरक्षण की चुनौती बढ़ सकती है।

विशेषज्ञ जांच के बिना किसी बीज को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। स्थानीय मौसम और मिट्टी के अनुसार परीक्षण जरूरी होगा। विदेशी और भारतीय कंपनियों पर समान नियम लागू होने चाहिए। किसान को कीमत और गुणवत्ता की सही जानकारी मिलनी चाहिए।

कानून अभी अंतिम नहीं

सरकार ने सितंबर 2026 में किसान संगठनों से चर्चा की। इस बैठक में करीब 20 संगठनों ने अपनी राय रखी। कृषि मंत्रालय के अनुसार लगभग 18 हजार सुझाव मिले हैं। सरकार ने कानून बनाने में जल्दबाजी नहीं करने की बात कही।

प्रस्तावित कानून के लिए कोई अंतिम समयसीमा तय नहीं है। परामर्श के बाद मसौदे में बदलाव किए जा सकते हैं। इसलिए इसे अभी लागू कानून समझना सही नहीं होगा। फिलहाल यह प्रस्तावित व्यवस्था और राजनीतिक बहस है। अंतिम विधेयक संसद में पेश होने पर तस्वीर साफ होगी। उसके प्रावधानों का कानूनी अध्ययन भी जरूरी रहेगा।

किसानों के लिए क्या बदलेगा

कानून लागू होने पर बीज बाजार में निगरानी बढ़ सकती है। कंपनियों और विक्रेताओं की जवाबदेही भी तय हो सकती है। किसान बीज की पूरी जानकारी डिजिटल माध्यम से देख सकेंगे। नकली बीज की शिकायत पर जांच तेजी से हो सकती है।

दूसरी तरफ छोटे बीज उत्पादकों की चिंताएं भी महत्वपूर्ण हैं। कठिन नियमों से उनका खर्च बढ़ने की आशंका रहेगी। पारंपरिक बीज बचाने वाले किसानों को स्पष्ट कानूनी सुरक्षा चाहिए। उनके बीज ज्ञान और स्थानीय किस्मों का संरक्षण जरूरी है। सरकार और किसान संगठनों के बीच संवाद आगे भी जरूरी होगा। अंतिम कानून में किसानों की सहमति सबसे अहम रहेगी।

ये भी पढ़ें…

नए सीड बिल पर शिवराज सिंह की किसान संगठनों से चर्चा, नकली बीजों पर सख्ती की तैयारी, भारी जुर्माना लगेगा

खेत बचाओ अभियान 22 अक्टूबर से; कृषि मंत्री शिवराज ने ली समीक्षा बैठक, योजनाओं की धीमी गति पर अफसरों को चेताया

खाद बिक्री का नया सिस्टम: देशभर के 222 जिलों में खपत 28 फीसदी घटी, सरकार का दावा- 1,470 करोड़ रुपए बचे

कपास खरीद की डिजिटल व्यवस्था: CCI दिखाएगा नया मॉडल, ऐप से ही स्लॉट बुकिंग और किसानों भुगतान

GENERAL newz@gmail.com

Read more