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MP के किसानों पर 87 हजार करोड़ का KCC कर्ज, देश में सबसे ज्यादा बकाया वाला तीसरा राज्य; राजस्थान दूसरे नंबर पर

newz@gmail.com | Sep 14, 2026, 15:39 IST

मध्य प्रदेश के किसानों पर वित्त वर्ष 2025-26 में KCC का 87,391 करोड़ रुपए बकाया कर्ज है, जो देश में तीसरा सबसे ज्यादा है। सिर्फ उत्तर प्रदेश और राजस्थान का कर्ज इससे ज्यादा है। बढ़ती खेती लागत को इसकी बड़ी वजह बताया जा रहा है।

किसान पर कर्ज

मध्य प्रदेश के किसानों पर किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC का भारी कर्ज है। लोकसभा में केंद्र सरकार ने इससे जुड़े आंकड़े पेश किए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश का KCC बकाया कर्ज 87,391 करोड़ रु. रहा। यह आंकड़ा देश के बड़े कृषि राज्यों में तीसरा सबसे ज्यादा है। सिर्फ उत्तर प्रदेश और राजस्थान का बकाया कर्ज मध्य प्रदेश से ज्यादा है। इससे मध्य प्रदेश के किसानों पर बढ़ते कर्ज का दबाव साफ दिखता है। यह आंकड़ा राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम संकेत है।

देश के बड़े राज्यों से तुलना

केंद्र सरकार के आंकड़े देशभर के प्रमुख कृषि राज्यों की तस्वीर सामने रखते हैं। उत्तर प्रदेश में 2025-26 में KCC का बकाया कर्ज 1,39,986 करोड़ रुपए रहा। यह देश में सबसे ज्यादा है। राजस्थान में यह आंकड़ा 1,15,769 करोड़ दर्ज हुआ। मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर है। गुजरात में बकाया कर्ज 81,322 करोड़ रुपए रहा। कर्नाटक में यह आंकड़ा 67,398 करोड़ तक पहुंचा। मध्य प्रदेश और कर्नाटक के कर्ज में करीब 20 हजार करोड़ का अंतर है।

क्यों बढ़ रहा है कर्ज

मध्य प्रदेश देश के बड़े कृषि राज्यों में गिना जाता है। यहां लाखों किसान खेती पर ही पूरी तरह निर्भर हैं। खरीफ और रबी दोनों सीजन में यहां बड़े पैमाने पर बुआई होती है। ऐसे में KCC से मिलने वाला कर्ज उनकी खेती का बड़ा सहारा बनता है। लेकिन बकाया कर्ज की बड़ी रकम एक चिंता का विषय भी है। यह आंकड़ा बताता है कि किसान खेती के खर्च के लिए कर्ज लेते हैं। साथ ही यह भी दिखाता है कि कर्ज चुकाना कितना आसान है।

महंगे इनपुट बड़ी वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक बीज, खाद और कीटनाशक की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। डीजल और कृषि मशीनरी की लागत में भी बढ़ोतरी हुई है। इन सभी वजहों से किसान KCC के जरिए ज्यादा संस्थागत कर्ज ले रहे हैं। मध्य प्रदेश के किसान भी इससे अछूते नहीं हैं। KCC किसानों को अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर फसल कर्ज उपलब्ध कराता है। इसलिए किसान साहूकारों की जगह इस औपचारिक रास्ते को चुन रहे हैं। यह बदलाव किसानों को महंगे निजी कर्ज से बचा सकता है। हालांकि लगातार बढ़ता बकाया कर्ज एक नई चुनौती को भी सामने ला रहा है। यह खेती की लागत और किसान की आय के बीच असंतुलन दिखाता है।

छोटे किसानों का सहारा

मध्य प्रदेश सरकार भी किसानों को संस्थागत कर्ज देने पर जोर दे रही है। राज्य में सहकारी बैंकों और अन्य बैंकों के जरिए KCC कर्ज दिया जाता है। इससे किसानों को समय पर फसल के लिए पैसा मिल पाता है। खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह सुविधा अहम मानी जाती है। बिना गारंटी के मिलने वाला यह कर्ज उनकी तत्काल जरूरतें पूरी करता है। इससे उन्हें बुआई के समय अलग से पैसे जुटाने की चिंता कम होती है। लेकिन बढ़ता बकाया बताता है कि कई किसान समय पर कर्ज नहीं चुका पाते। इसकी वजह मौसम की मार और उपज की अनिश्चित कीमतें भी हो सकती हैं।

KCC सीमा अब 5 लाख रुपए

केंद्र सरकार ने बजट 2025-26 में KCC को लेकर बड़ा ऐलान किया था। संशोधित ब्याज अनुदान योजना के तहत KCC कर्ज की सीमा बढ़ाई गई। पहले यह सीमा 3 लाख रुपए थी। अब इसे बढ़ाकर 5 लाख कर दिया गया है। सरकार का मकसद किसानों को ज्यादा संस्थागत कर्ज उपलब्ध कराना है। इससे साहूकारों जैसे गैर-संस्थागत स्रोतों पर निर्भरता भी कम होगी। मध्य प्रदेश के किसानों को भी इस बढ़ी सीमा का फायदा मिल सकता है। इससे उन्हें खेती के लिए ज्यादा पूंजी आसानी से मिल सकेगी। इसका फायदा फसल के हर सीजन में महसूस किया जा सकता है।

फसलों में नकदी की जरूरत

मध्य प्रदेश में गेहूं, सोयाबीन और दलहन की खेती बड़े पैमाने पर होती है। बुआई और कटाई के समय किसानों को नकदी की जरूरत पड़ती है। ऐसे समय पर KCC कर्ज उनकी मदद करता है। हर साल बढ़ता बकाया किसानों की माली हालत पर सवाल खड़े करता है। अगर उपज की सही कीमत नहीं मिलती तो कर्ज चुकाना मुश्किल हो जाता है। इससे किसान अगले साल फिर नया कर्ज लेने को मजबूर हो जाते हैं। यह चक्र लंबे समय तक चलने पर किसानों के लिए बोझ बन सकता है।

बेहतर नीति की दरकार

किसानों के लिए बेहतर नीतियों की जरूरत अब महसूस हो रही है। फसल की सही कीमत और समय पर भुगतान समस्या को कम कर सकते हैं। इसके साथ ही कर्ज माफी जैसी योजनाओं पर भी लगातार चर्चा होती रहती है। सरकार और बैंकों को मिलकर किसानों की असल जरूरतों को समझना होगा। तभी KCC कर्ज असली मायने में किसानों की पूरी मदद कर पाएगा। यह आंकड़े कृषि नीति पर आगे बहस का आधार बन सकते हैं। मध्य प्रदेश जैसे बड़े कृषि राज्य के लिए यह आंकड़े खास मायने रखते हैं।

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