बीते गुरुवार यानी 10 सितंबर को सिवनी में राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के बैनर तले किसान इकट्ठा हुए। किसान ट्रैक्टर रैली निकालकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपने जा रहे थे। लेकिन ऐन वक्त पर प्रशासन ने रैली की अनुमति रद्द कर दी।
इस फैसले से किसानों में गहरी नाराजगी फैल गई। सिवनी-मंडला बायपास चौक पर पुलिस ने बेरिकेड्स लगाकर किसानों को रोक दिया। इसी दौरान किसानों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
प्रदर्शन का नेतृत्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा कर रहे थे। उन्हें किसान संगठन में कक्काजी के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने मौके पर प्रशासन के रवैये पर सीधी नाराजगी जताई।
कक्काजी बोले, प्रशासन का रवैया किसान विरोधी
कक्काजी ने मौके पर कहा कि प्रशासन का यह रवैया पूरी तरह किसान विरोधी है। उनके मुताबिक शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकना किसानों के अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने प्रशासन से रैली की अनुमति फिर देने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सरकार को अब सुनना ही होगा। कक्काजी के अनुसार एमएसपी लागू नहीं हुई तो राजधानी जाम कर दी जाएगी। उनका यह बयान किसानों के बीच खासा चर्चा का विषय बना।
उन्होंने कहा कि किसान अब और इंतजार करने को तैयार नहीं हैं। संगठन के मुताबिक आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा। जिलेभर के किसानों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई है।
भावांतर योजना पर भी जताई नाराजगी
कक्काजी ने अपने संबोधन में भावांतर भुगतान योजना पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक भावांतर योजना के नाम पर किसानों के साथ छल हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों को असली फायदा नहीं देती।
कक्काजी के अनुसार भावांतर योजना का लाभ सीमित किसानों तक ही पहुंचता है। उनका आरोप है कि इससे बड़ी संख्या में किसान वंचित रह जाते हैं। यह उनका निजी बयान है और सरकार का पक्ष अलग हो सकता है।
उन्होंने साफ कहा कि भावांतर योजना किसी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे। संगठन का कहना है कि सिर्फ एमएसपी ही किसानों के हित में सही है। इसी मांग पर आगे भी आंदोलन जारी रखने की बात कही गई।
सीएम से चर्चा का दिया हवाला
कक्काजी ने अपने बयान में मुख्यमंत्री से हुई पिछली चर्चा का जिक्र किया। उनके मुताबिक इस चर्चा में किसानों की मांगों पर बात हुई थी। लेकिन अब तक कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया है।
उन्होंने कहा कि सरकार से बार-बार आश्वासन मिलते रहे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को कोई राहत नहीं मिली है। इसी वजह से किसानों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
महासंघ के अनुसार अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन और बड़ा होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि हर हाल में एमएसपी लागू करानी होगी। वरना पूरे भोपाल को जाम करने की तैयारी है।
पुलिस और किसानों में हुई नोकझोंक
बेरिकेड्स लगने के बाद कुछ देर के लिए मौके पर तनाव बढ़ गया। किसान नेताओं ने प्रशासन से सीधी बातचीत की मांग की। पुलिस अधिकारियों ने किसानों को शांति बनाए रखने की अपील की।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा कारणों से अनुमति वापस ली गई। हालांकि किसान इस तर्क से संतुष्ट नजर नहीं आए। मौके पर कुछ देर तक माहौल गरमाया रहा।
बाद में पुलिस बल की मौजूदगी में स्थिति सामान्य हुई। किसान संगठन ने मौके पर ही ज्ञापन सौंपने की कोशिश जारी रखी। प्रशासन ने आगे बातचीत का भरोसा दिलाया है।
किसानों के लिए क्यों अहम है एमएसपी की मांग
एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य किसानों की आय से सीधा जुड़ा मुद्दा है। बाजार भाव गिरने पर एमएसपी किसानों को नुकसान से बचाती है। इसी वजह से किसान संगठन लगातार यह मांग उठाते रहे हैं।
मध्य प्रदेश में कई फसलों की एमएसपी पर किसान लंबे समय से मुखर हैं। सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों की कीमत को लेकर भी शिकायतें आम रही हैं। किसान संगठनों का कहना है कि सही समर्थन मूल्य मिलने से आय बढ़ेगी।
आगे क्या होगी आंदोलन की दिशा
महासंघ के अनुसार आने वाले दिनों में जिला स्तर पर और बैठकें होंगी। संगठन जिलेभर में किसानों को आंदोलन से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। अगर मांगें नहीं मानी गईं तो राजधानी घेराव की योजना बनाई जाएगी।
प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर औपचारिक बयान नहीं आया है। स्थानीय अधिकारी फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में मामला और तूल पकड़ सकता है।
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