नई दिल्ली में भारत और आसियान का कृषि सहयोग मजबूत होने जा रहा है। आसियान यानी Association of Southeast Asian Nations दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन है। मंगलवार को नई दिल्ली में 9वीं आसियान-भारत कृषि एवं वानिकी मंत्रिस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ खेती पर साझा कार्ययोजना तय हुई। मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाने पर भी सहमति बनी। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की। आसियान की तरफ से फिलीपींस के कृषि सचिव फ्रांसिस्को पी. तिऊ लॉरेल मौजूद रहे। दोनों पक्षों ने अगले पांच साल की योजना पर भी मुहर लगाई। यह बैठक भारत-आसियान रिश्तों के लिए बड़ा कदम मानी जा रही है।
हर दो साल में होती है बैठक
यह मंत्रिस्तरीय बैठक हर दो साल में आयोजित होती है। इसका मकसद भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के दस देशों को जोड़ना है। खेती, वानिकी और खाद्य सुरक्षा पर साझा रणनीति बनाना इसका लक्ष्य है। इस बार की बैठक खास समय पर हुई है। दुनिया भर में मौसम की अनिश्चितता बढ़ रही है। बदलते जलवायु का असर कई देशों की खेती पर साफ दिख रहा है। आपूर्ति शृंखला में रुकावटों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। इसलिए क्षेत्रीय स्तर पर तालमेल बढ़ाने पर खास जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने मिलकर काम करने का भरोसा जताया। इससे क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
खाद-बीज पर बड़ा फैसला
बैठक में उर्वरक, बीज और कीटनाशकों की आपूर्ति बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों पक्ष आपूर्ति के नए स्रोत तलाशेंगे। इससे किसी एक देश पर निर्भरता कम होगी। सप्लाई के स्रोत बढ़ने से बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है। आपूर्ति में रुकावट का असर किसानों तक नहीं पहुंचेगा। इसके साथ ही फसल और बाजार निगरानी व्यवस्था भी मजबूत होगी। इससे कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव का पहले पता चल सकेगा। खाद्यान्न की कमी जैसी स्थितियों का भी समय रहते अंदाजा लगेगा। यह कदम किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। समय पर मिलने वाली जानकारी से नुकसान भी कम होगा।
2026-30 की नई योजना
बैठक में आसियान-भारत कृषि सहयोग की नई पांच साल की योजना भी मंजूर हुई। यह योजना 2026 से 2030 तक लागू रहेगी। इसमें चार मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। पहला क्षेत्र नीतिगत संवाद और व्यापार से जुड़ा है। दूसरा क्षेत्र डिजिटल तकनीक आधारित नवाचार का है। तीसरा क्षेत्र क्षमता निर्माण से जुड़ा हुआ है। चौथा क्षेत्र मानव संसाधन विकास पर केंद्रित रहेगा। इन चारों क्षेत्रों में मिलकर काम होगा। इससे दोनों पक्षों के कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद आसान होगा। नीति-निर्माताओं के बीच भी बातचीत बेहतर हो सकेगी। कृषि नीतियों को लेकर आपसी समझ भी बढ़ेगी।
छात्रों को मिलेगी स्कॉलरशिप
इसी योजना के तहत आसियान-भारत फेलोशिप भी शुरू होगी। अगले पांच साल में आसियान देशों के छात्रों को 50 मास्टर्स स्कॉलरशिप दी जाएंगी। ये छात्र कृषि और संबंधित विषयों में पढ़ाई कर सकेंगे। इससे क्षेत्रीय स्तर पर कृषि अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। तकनीकी आदान-प्रदान भी आसान होने की उम्मीद है। यह पहल युवा वैज्ञानिकों के लिए बड़ा मौका मानी जा रही है। इससे आने वाले सालों में कृषि क्षेत्र को नए विशेषज्ञ मिलेंगे। छात्रों को दूसरे देशों की खेती के तरीके सीखने का भी मौका मिलेगा। इससे भारत और आसियान देशों के बीच शोध सहयोग भी बढ़ेगा। यह फेलोशिप दोनों पक्षों के रिश्ते को और गहरा कर सकती है।
डिजिटल तकनीक पर जोर
डिजिटल नवाचार को लेकर भी बैठक में अहम बातचीत हुई। इसमें कृषि से जुड़े मोबाइल एप साझा करने पर चर्चा हुई। बाजार सूचना प्रणाली को भी मजबूत बनाने की बात कही गई। ऐसे एप से किसानों को मंडी भाव की जानकारी भी आसानी से मिल सकेगी। मौसम आधारित सलाह देने वाली तकनीकों को भी साझा किया जाएगा। इससे छोटे किसानों को समय पर सही जानकारी मिल सकेगी। यह जानकारी उनकी फसल की सुरक्षा में मदद करेगी। मौसम की सही जानकारी मिलने से किसान समय पर फैसले ले सकेंगे। इससे फसल के नुकसान की आशंका भी घट सकती है। बैठक के अंत में अगली मंत्रिस्तरीय बैठक की तारीख भी तय हुई। यह बैठक अब 2028 में आयोजित होगी। तब तक दोनों पक्ष अपनी योजनाओं पर काम करते रहेंगे।
भारत को होगा फायदा
भारत के लिए यह सहयोग कई मायनों में अहम है। दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ कृषि व्यापार बढ़ने की उम्मीद है। इससे भारतीय किसानों को भी नए बाजार मिल सकते हैं। निर्यात के नए रास्ते खुलने से किसानों की आय भी बढ़ सकती है। खाद और बीज की आपूर्ति स्थिर रहने से खेती की लागत काबू में रहेगी। आने वाले सालों में इस सहयोग का असर धीरे-धीरे दिखने लगेगा। किसानों के लिए यह एक उम्मीद भरा कदम माना जा रहा है। कृषि क्षेत्र में स्थिरता आने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है। भारत और आसियान देशों के बीच भरोसा भी इससे और बढ़ेगा।
जरूरी FAQ
9वीं आसियान-भारत कृषि मंत्रिस्तरीय बैठक में क्या तय हुआ?
नई दिल्ली में हुई इस बैठक में खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ खेती और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला पर साझा कार्ययोजना तय हुई। इसके साथ ही 2026 से 2030 तक की पांच साल की सहयोग योजना को भी मंजूरी दी गई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और आसियान की तरफ से फिलीपींस के कृषि सचिव फ्रांसिस्को पी. तिऊ लॉरेल ने की।
2026-2030 की नई सहयोग योजना में कौन से क्षेत्र शामिल हैं?
इस योजना में चार मुख्य क्षेत्र शामिल हैं, जो नीतिगत संवाद व व्यापार, डिजिटल तकनीक आधारित नवाचार, क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास हैं। इनके जरिए भारत और आसियान देशों के कृषि वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं के बीच सीधा संवाद आसान बनाने की कोशिश की जाएगी।
इस बैठक से किसानों को क्या फायदा होगा?
उर्वरक, बीज और कीटनाशकों की आपूर्ति के नए स्रोत बढ़ने से किसी एक देश पर निर्भरता कम होगी। फसल और बाजार निगरानी व्यवस्था मजबूत होने से कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव का पहले पता चल सकेगा। इसके अलावा मौसम आधारित सलाह और मंडी भाव की जानकारी मोबाइल एप के जरिए भी किसानों तक पहुंच सकेगी।
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